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FACT CHECK: क्या खतरे में हैं LIC और खरीदी गई इंश्योरेंस पॉलिसी, जानिए हकीकत?

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बेंगलुरू। अगर आप एलआईसी कंपनी के बीमा होल्डर हैं और भविष्य की सुरक्षा के लिए अपनी गाढ़ी कमाई प्रीमियम में खर्च कर रहे हैं तो संभल जाइए, क्योंकि सरकारी संस्था भारतीय जीवन बीमा निगम की 23 बीमा पॉलिसियां ही नहीं, बल्कि खुद एलआईसी की भी माली हालत संकट आ पड़ा है। हालांकि एलआईसी के मौजूदा संकट से आपकी पॉलिसी पर तत्काल कोई फर्क नहीं पड़ने जा रहा हैं।

LIC

दरअसल, बीमा नियामक संस्था आईआरडीए के निर्देश पर एलआईसी को 23 बीमा पॉलिसियों को बंद करना पड़ रहा है, जिसमें चर्चित जीवन आनंद पॉलिसी भी शामिल है, जिसे आईआरडीए ने दो महीने पहले ही एलआईसी को बंद करने का निर्देश दिया था, लेकिन बाद में आईआरडीए ने पॉलिसी को बंद करने के लिए एलआईसी को दो माह का वक्त दे दिया था।

LIC

उधर, एलआईसी पर संकट को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं, क्योंकि केन्द्र सरकार सबसे अधिक एनपीए Non Performing Assets)वाली बैंक आईडीबाई को एलआईसी के हवाले करने जा रही है। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के कदम को अनुचित बताते हुए ट्वीट किया कि केंद्र सरकार एलआईसी को बर्बाद करने जा रही है।

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सच्चाई यह है कि केंद्र सरकार देश में सरकारी बैंकों के सामने खड़ी एनपीए की समस्या को निपटाने कवायद के तहत आईडीबीआई को एलआईसी के हवाले करने का निश्चय किया है। इसी योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए साल के शुरुआत में केंद्र सरकार ने बैंकों को एनपीए से मुक्त कराने के लिए जनवरी में 2.1 लाख करोड़ रुपए के रीकैपेटलाइजेशन प्रोग्राम को मंजूरी दी थी।

IRDA की नई गाइड लाइन के खिलाफ थे जीवन आंनद समेत 23 प्लान

IRDA की नई गाइड लाइन के खिलाफ थे जीवन आंनद समेत 23 प्लान

दरअसल, नंबवर, 2019 को बीमा नियामक संस्था ने एलआईसी द्वारा मार्केट में उतारे गए 23 पॉलिसियां और राइडर्स बीमा को नियामक के नए दिशानिर्देशों के अनुरूप नहीं पाने के कारण 23 पॉलिसीज को बंद करने का निर्देश दिए थे। इनमें LIC न्‍यू जीवन आनंद, जीवन उमंग, जीवन लक्ष्‍य जैसे कुछ पॉपुलर इंश्‍योरेंस प्‍लान भी शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि 1 फरवरी को बंद किए जाने वाले 23 पुरानी पॉलिसियों को नए दिशानिर्देशों के अनुरूप दोबारा लॉन्‍च किए जाएंगे।

LIC की बंद हो रही 23 पॉलिसियों से उपभोक्ताओं कोई नुकसान नहीं

LIC की बंद हो रही 23 पॉलिसियों से उपभोक्ताओं कोई नुकसान नहीं

बड़ी बात यह है कि एलआईसी द्वारा 23 पॉलिसियों के बंद होने से उपभोक्ताओ कोई नुकसान होने जा रहा है, क्योंकि नवंबर, 2019 में ही LIC ने साफ कर दिया था कि पॉलिसी बंद होने से पॉलिसी होल्डर्स की पॉलिसी या उनके पॉलिसी बेनिफिट में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। पॉलिसी बंद होने के बावजूद उसके सभी फायदे और रकम आपको मिलेगी। चूंकि आईआरडीए के निर्देश के बाद 30 नवंबर को चिन्हित सभी 23 पॉलिसी के बंद कर दिया था, जिसके बाद कोई उक्त पॉलिसी को खरीद नहीं सका था। इसलिए नुकसान की कोई बात ही नहीं हैं।

अब ग्राहकों को गलत तरीके से लुभाकर पॉलिसियां नहीं बेच पाएंगे एजेंट

अब ग्राहकों को गलत तरीके से लुभाकर पॉलिसियां नहीं बेच पाएंगे एजेंट

बीमा नियामक संस्था IRDA की ओर की गई यह कार्रवाई ग्राहकों की हित में ही हैं। इस कवायद के जरिए आईआरडीए की कोशिश है कि जीवन बीमा पॉलिसियां ग्राहकों के लिए ज्‍यादा फायदेमंद हों। साथ ही, एजेंट ग्राहकों को गलत तरीके से लुभाकर जो पॉलिसियां बेचते हैं उन पर लगाम लगाई जा सके। इसीलिए, बीमा नियामक ने जीवन बीमा के लिए नए गाइलाइंड जारी किए, जो भी जीवन बीमा प्रोडक्‍ट नए दिशानिर्देशों के अनुरूप नहीं हैं, वो 1 फरवरी 2020 से बाजार में नजर नहीं आएंगे।

बंद होने वाले 23 पॉलिसीज नए रूप में फरवरी से उपलब्‍ध होंगे

बंद होने वाले 23 पॉलिसीज नए रूप में फरवरी से उपलब्‍ध होंगे

दरअसल, नवंबर के अंत में भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDA) ने जीवन बीमा कंपनियों को उन लाइफ इंश्‍योरेंस और राइडर्स को बाजार से वापस लेने के लिए दो महीने का समय दिया था जो नए प्रोडक्‍ट गाइडलाइंस के अनुरूप नहीं थे। पहले ऐसे प्रोडक्‍ट्स को वापस लेने की अंतिम तारीख 30 नवंबर 2019 थी, लेकिन बीमा नियामक ने जीवन कंपनियों को दो महीने का समय विस्‍तार दिया था, जो अब 31 जनवरी को खत्म हो रहा है। भारतीय जीवन बीमा निगम के प्रबंध निदेशक विपिन आनंद ने कहा कि बंद होने वाले प्रोडक्‍ट्स नए रूप में फरवरी से उपलब्‍ध होंगे।

NPA के बोझ तले डूब रहे IDBI बैंक को LIC के हवाले कर रही है सरकार

NPA के बोझ तले डूब रहे IDBI बैंक को LIC के हवाले कर रही है सरकार

अब बात करते हैं एलआईसी के संकट की। चूंकि खुद एलआईसी बैंकिंग सेक्टर में घुसने की पूर्व में योजना बना रही है, जिसकी अहम वजह उसके पास बड़ी मात्रा में पड़ा कैपिटल है जो देशभर में एलआईसी पॉलिसी के ग्राहकों द्वारा बतौर प्रीमियम एकत्र किया जाता है। इसलिए सरकार सर्वाधिक एनपीए अनुपात वाले IDBI बैंक को लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) के हवाले करने की योजना तैयारी की है। एलआईसी पहले भी IDBI समेत लगभग सभी सरकारी बैंकों में कुछ हिस्सेदारी खरीदती रही है। चूंकि केन्द्र सरकार बैंकिंग सुधार के नाम पर IDBI की 85 फीसदी हिस्सेदारी छोड़ रही है, तो यह एलआईसी के लिए मौका है कि वो खुद के लिए एक बैंक तैयार कर सके।

पहले LIC के पैसों को शेयर बाजार में निवेश की मंजूरी दे चुकी है सरकार

पहले LIC के पैसों को शेयर बाजार में निवेश की मंजूरी दे चुकी है सरकार

हालांकि डर यह बताया जा रहा है कि क्या एलआईसी सर्वाधिक एनपीए वाले आईडीबीआई बैंक को संभाल पाएगी और कहीं डूब गई तो उनका क्या होगा जो जनता अपनी जमा-पूंजी प्रतिवर्ष एलआईसी की पॉलिसी में जमा कर रही है, जिसकी एवज में वह अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित रखती है। केन्द्र एक सरकारी बैंक को बचाने के लिए उसे एलआईसी के हवाले करने जा रही है, जो पैसों के मामले सबसे मजूबत है और लोगों की प्रीमियम के पैसों को निवेश के लिए उसे सोचना पड़ता है। पूर्व में केन्द्र सरकार ने एलआईसी के पास पड़े इस पैसे से अधिक कमाई करने के लिए उसे शेयर बाजार में निवेश करने की भी मंजूरी दे दी थी।

IDBI से हिस्सेदारी कम करना केन्द्र सरकार के लिए सबसे आसान है

IDBI से हिस्सेदारी कम करना केन्द्र सरकार के लिए सबसे आसान है

बीते कुछ वर्षों के दौरान बैंकिंग सुधार के नाम पर केन्द्र सरकार ने बीमार पड़े सरकारी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी को कम करने की रणनीति पर काम किया है। इसी रणनीति के तहत IDBI से हिस्सेदारी कम करना केन्द्र सरकार के लिए सबसे आसान है, क्योंकि IDBI बैंक नैशनलाइजेशन एक्ट के तहत नहीं आता और हिस्सेदारी कम करने में उसे किसी तरह की कानूनी अड़चन का सामना नहीं करना पडेगा। इस प्रस्ताव पर केन्द्र सरकार इंश्योरेंस रेगुलेटर का दरवाजा खटखटा चुकी है और इस सौदे पर रेगुलेटर को फैसला लेना है।

वर्तमान में लोन मार्केट का एक बड़ा खिलाड़ी है एलआईसी

वर्तमान में लोन मार्केट का एक बड़ा खिलाड़ी है एलआईसी

मौजूदा समय में बिना बैंक हुए भी एलआईसी लोन मार्केट का एक बड़ा खिलाड़ी है। 31 दिसंबर, 2019 के लिए दायर कॉर्पोरेट शेयरहोल्डिंग के अनुसार एलआईसी के पास सार्वजनिक रूप से 23 से अधिक शेयर हैं और एलआईसी नेटवर्थ 63,499.7 करोड़ रुपए है।

वित्त वर्ष 2017 में LIC ने 1 ट्रिलियन रुपए से अधिक बांटा था कर्ज

वित्त वर्ष 2017 में LIC ने 1 ट्रिलियन रुपए से अधिक बांटा था कर्ज

वित्त वर्ष 2017 के दौरान एलआईसी ने कुल 1 ट्रिलियन रुपए से अधिक का कर्ज बाजार को दिया था और इसी कर्ज के कारोबार को बनाए रखने के लिए उसने लगभग सभी सरकारी बैंकों में कुछ न कुछ हिस्सेदारी खरीद कर रखी है, लेकिन अब खुद बैंक की भूमिका में आने के बाद एलआईसी के सामने भी वही चुनौती होगी, जिसके चलते ज्यादातर सरकारी बैंक बैड लोन बांटकर एनपीए के जाल में फंसे हैं। शायद इसी को डर का नाम दिया जा रहा है।

31 जनवरी को हमेशा के लिए बंद होंगे चिन्हित 23 बीमा पॉलिसी

31 जनवरी को हमेशा के लिए बंद होंगे चिन्हित 23 बीमा पॉलिसी

  • LIC सिंगल प्रीमियम एंडोमेंट प्‍लान
  • एलआईसी न्‍यू एंडोमेंट प्‍लान
  • एलआईसी न्‍यू मनी बैक-20 साल
  • एलआईसी न्‍यू जीवन आनंद
  • एलआईसी अनमोल जीवन-II
  • एलआईसी लिमिटेड प्रीमियम एंडोमेंट प्‍लान
  • एलआईसी न्‍यू चिल्‍ड्रंस मनी बैक प्‍लान
  • एलआईसी जीवन लक्ष्‍य
  • एलआईसी जीवन तरुण
  • एलआईसी जीवन लाभ प्‍लान
  • एलआईसी न्‍यू जीवन मंगल प्‍लान
  • एलआईसी भाग्‍यलक्ष्‍मी प्‍लान
  • एलआईसी आधार स्‍तंभ
  • एलआईसी आधार शिला
  • एलआईसी जीवन उमंग
  • एलआईसी जीवन शिरोमणि
  • एलआईसी बीमा श्री
  • एलआईसी माइक्रो बचत
  • एलआईसी न्‍यू एंडोमेंट प्‍लस (यूलिप)
  • एलआईसी प्रीमियम वेवर राइडर (राइडर)
  • एलआईसी न्‍यू ग्रुप सुपरएन्‍युएशन कैश एक्‍युमुलेशन प्‍लान (ग्रुप प्‍लान)
  • एलआईसी न्‍यू ग्रुप ग्रेच्‍युटी कैश एक्‍युमुलेशन प्‍लान (ग्रुप प्‍लान)
  • एलआईसी न्‍यू ग्रुप लीव इनकैशमेंट प्‍लान (ग्रुप प्‍लान)

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English summary
The truth is that the central government has decided to hand over IDBI to LIC as part of the exercise to solve the problem of NPAs standing in front of public sector banks in the country. In order to implement the same scheme, in the beginning of the year, the Central Government approved a re-capitalization program of Rs 2.1 lakh crore in January to free banks from NPAs.
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