अग्नि-5 के लांच के साथ मोदी को जवाब देकर जाएंगे डीआरडीओ प्रमुख!
बेंगलुरु। 31 जनवरी को डीआरडीओ प्रमुख अविनाश चंदर के कार्यकाल का अंतिम दिन और इसी दिन अग्नि 5 के एक वर्जन के लांच की भी तैयारियां हैं। डॉक्टर अविनाश चंदर को देश के उन चुनिंदा वैज्ञानिकों में माना जाता है जिन्होंने देश की मिसाइल टेक्नोलॉजी को बहुत कुछ दिया है। खास बात है कि जिस डॉक्टर अविनाश चंदर को सरकार ने उनकी उम्र और अक्षमताओं का हवाला देते हुए उनके पद से हटाया है, वह देश में मिसाइल टेक्नोलॉजी को एक नया रूप देने के लिए जाने जाते हैं।
31 जनवरी को अग्नि 5 का ट्रायल
विश्वस्त सूत्रों की ओर से वनइंडिया को इस बात की पुष्टि शनिवार को की गई है कि 31 जनवरी को सतह से सतह तक मार कर सकने वाली इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल का कैनस्टिराइज्ड वर्जन को लांच किया जाएगा।
इसी दिन डॉक्टर अविनाश चंदर बतौर डीआरडीओ प्रमुख अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाएंगे। पिछले दिनों केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने समय से पहले ही डॉक्टर अविनाश चंदर को उनके कार्यकाल के खत्म होने से पहले ही उनके पद से हटा दिया है।
लैब्स कर रही हैं तैयारियां
डीआरडीओ की आठ लैब्स के टॉप वैज्ञानिकों ने इस लांच की तैयारियां शुरू कर दी है और यह काफी अहम ट्रायल माना जा रहा है जिसमें 5,000 किमी की दूरी तक मार सकने वाली क्षमता को परखा जाएगा। लांच कैंपेन टीमें पहले ही ओडिशा की ओर रवाना कर दी गई हैं।
बनेगा आखिरी सफल लांच
अगर सबकुछ प्लान के मुताबिक हुआ तो फिर यह डॉक्टर अविनाश चंदर के कार्यकाल का आखिरी सफल लांच बन सकता है। पहले मीडिया की ओर से खबरें आ रही थीं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस लांच के दौरान मौजूद रहेंगे लेकिन अभी तक इस बारे में कोई भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। यह शायद पहला मौका होगा जब देश की किसी मिसाइल के लांच के समय इतनी संवेदनाएं और कई भावनांए एक साथ मौजूद होंगी।

गैस जनरेटर से लैस अग्नि 5
यह अग्नि5 का तीसरा लांच होगा। गैस जनरेटर सिस्टम और काम्पैक्ट सॉलिड रॉकेट मोटर को मिसाइल को कैनिस्टर से बाहर निकालने के लिए प्रयोग किया जाता है। अग्नि5 की तीसरी स्टेज सॉलिड प्रॉपेल्ड, रोड मोबाइल, स्टेट ऑफ द आर्ट न्यूक्लियर क्षमता से लैस लंबी दूरी की बैलेस्टिक मिसाइल है।

अग्नि5 के मेन आर्किटेक्ट
डॉक्टर अविनाश चंदर को अग्नि5 का मुख्य आर्किटेक्ट माना जाता है। जब से उनका कार्यकाल खत्म होने की खबरें आई हैं तब से ही हैदराबाद के मिसाइल कॉम्प्लेक्स में एक अजीब सा सन्नाटा पसरा हुआ है। यहां पर युवा वैज्ञानिकों की टीम के लिए यह समय वाकई काफी मुश्किल है।

कभी नहीं लिया काम का श्रेय
डीआरडीओ के आतंरिक सूत्रों की मानें तो डॉक्टर चंदर ने कई अहम टेक्नोलॉजी से जुड़े सिस्टम की डिजाइन और देश में उसके विकास से जुड़े कई बिंदुओं पर नजर रखी। उनकी मानें तो पीएम मोदी से पहले डॉक्टर चंदर ने इस बात का भरोसा दिलाया था कि इस क्षेत्र में वैज्ञानिकों में आत्मविश्वास पहले ही आ चुका है। उन्होंने कभी भी अपने काम का श्रेय खुद नहीं लिया।

अग्नि 5 उनकी बेहतरीन विदाई
डॉक्टर अविनाश चंदर ने टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में स्ट्रैप-डाउन इंटीरियल नेविगेशन के कांसेप्ट को लाकर एक बड़ा योगदान किया है। एक अधिकारी की मानें तो अग्नि 5 का लांच शायद उनके लिए एक बेहतरीन विदाई का विकल्प होगा।

सरकार के फैसले पर कोई बात नहीं
एक अधिकारी की ओर से जानकारी दी गई कि शुक्रवार के समय वह हैदराबाद पहुंचे हैं और वह काफी शांत नजर आ रहे थे। जाने से पहले वह कई रिव्यू मीटिंग्स में व्यस्त थे और हर उस टेक्निकल गड़बड़ी को दूर करने की कोशिशों को अंजाम देते नजर आ रहे थे जिन पर चर्चा की गई। वह अपने कार्यकाल के बारे में किसी तरह की कोई बात नहीं कर रहे हैं।












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