2021 तक स्कूलों में खत्म हो सकती है परीक्षा प्रणाली, हो सकता है बड़ा बदलाव

नई दिल्ली। राष्ट्रीय शिक्षा नीति कमेटी ने अपने ड्राफ्ट में जो सिफारिशें दी हैं उसे ध्यान में रखते हुए शिक्षा मंत्रालय ने फैसला लिया है कि वह मूल्यांकन प्रक्रिया में बदलाव करेगी। मानव संसाधन मंत्रालय ने फैसला लिया है कि वर्ष 2021 से स्कूलों में अब परीक्षा नहीं होगी। नए मूल्यांकन में अब छात्रों का कक्षा में उनके प्रदर्शन के आधार मुल्यांकन किया जाएगा। यह नया मूल्यांकन 5-3-3-4 पर आधारित होगा।

लिया जाएगा सुझाव

लिया जाएगा सुझाव

मानव संसाधन मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार उन तमाम विकल्पों पर विचार कर रही है ताकि नई शिक्षा नीति को अक्टूबर 2020 तक अंतिम रूप दिया जा सके, जिसके बाद इसे 2021 में इसे तमाम स्कूलों में लागू किया जा सके। अधिकारी ने बताया कि हम जल्द ही तमाम बोर्ड से उनके सुझाव के लिए नोटिफिकेशन जारी करेंगे ताकि वह नई परीक्षा प्रणाली पर कमेटी द्वारा दिए गए सुझाव पर अपने विचार व्यक्त कर सके।

10+2 का फॉर्मूला होगा खत्म

10+2 का फॉर्मूला होगा खत्म

तमाम बोर्ड व शिक्षा विशेषज्ञों द्वारा सुझाव हासिल करने के बाद मंत्रालय 10+2 के फॉर्मूले को खत्म करने पर विचार करेगी और नई मूल्यांकन प्रक्रिया को 2021 में लागू करेगी। जून माह में राष्ट्रीय शिक्षा नीति की कमेटी ने अपने ड्राफ्ट में 5-3-3-4 डिजाइन का सुझाव दिया है, जिसमे फाउंडेशन स्टेज होगी जोकि पांच वर्ष की होगी, जिसमे तीन वर्ष का प्री प्राइमरी स्कूल और दो वर्ष में कक्षा एक व कक्षा दो की पढ़ाई होगी। इसके बाद तीन वर्ष का कक्षा तीन से पांच का कार्यकाल होगा। जिसके बाद तीन वर्ष कक्षा 6 से कक्षा 8 की पढ़ाई होगी और आखिर के चार वर्ष कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई होगी।

अंतरराष्ट्रीय स्कूलों के आधार पर बदलाव

अंतरराष्ट्रीय स्कूलों के आधार पर बदलाव

कमेटी ने यह नया प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय स्कूलों के मूल्यांकन के आधार पर दिया है, जिसमे छात्रों का मूल्यांकन उनकी प्रदर्शन के आधार पर होता है। कमेटी का मानना है कि मौजूदा शिक्षा नीति छात्रों को कुछ ही विषयों पर ध्यान देने के लिए मजबूर करती है, जिससे छात्र रचनात्मकता से दूर रहते हैं और बाद में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कमेटी ने प्रस्ताव दिया है कि पूरे वर्ष छात्र के स्कूल में प्रदर्शन के आधार पर ही उसका मूल्यांकन किया जाए। बोर्ड परीक्षा का उद्देश्य सिर्फ अहम सिद्धांतों, क्षमता और उच्चतर क्षमता के मूल्यांकन के लिए किया जाए। छात्रों को इस बात का भी विकल्प दिया जाएगा कि वह किस विषय से बोर्ड की परीक्षा कब देना चाहते हैं। स्कूल की फाइनल परीक्षा की जगह यह बोर्ड परीक्षा होगी।

मुफ्त शिक्षा के अधिकार में बदलाव

मुफ्त शिक्षा के अधिकार में बदलाव

कमेटी उम्र के बंधन को भी शिक्षा व्यवस्था में खत्म करना चाहती है। कमेटी ने प्रस्ताव दिया है कि शिक्षा के अधिकार के तहत मुफ्त शिक्षा हासिल करने की उम्र को 14 से बढ़ाकर 18 किया जाए। ऐसे में नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद 3 वर्ष से 18 वर्ष तक की उम्र के बच्चे भी मुफ्त में शिक्षा हासिल कर सकते हैं। बता दें कि इन सब के बीच गुजरात, पश्चिम बंगाल और ओडिशा ने स्कूलों में पास-फेल व्यवस्था को बदल दिया है।

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