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ब्रू-रियांग शरणार्थियों को त्रिपुरा में बसाने के मोदी सरकार के फैसले पर मिजोरम के पूर्व राज्यपाल का बड़ा बयान

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नई दिल्ली- मिजोरम के पूर्व गवर्नर स्वराज कौशल ने ब्रू-रियांग शरणार्थियों को स्थाई तौर पर त्रिपुरा में बसाने के मोदी सरकार के फैसले के बारे में कहा है कि दिल्ली ने 34,000 लोगों की समस्याओं का स्थाई समाधान कर दिया है। उन्होंने इस फैसले की जमकर सराहना करते हुए कहा है कि अब वे न सिर्फ सम्मानजनक तरीके से जी सकेंगे, बल्कि यह समझौता स्थाई और टिकाऊ होगा। बता दें कि मिजो बहुल मिजोरम से इन्हें 1997 में ही इस वजह से भागना पड़ा था कि वहां के मिजो उन्हें बाहरी मानते थे। तब से लेकर अब तक ये करीब 5 हजार शरणार्थी त्रिपुरा में अस्थाई कैंपों में भारी मुश्किलों से जीवन गुजार रहे थे। नए समझौते के तहत अब उन्हें स्थाई तौर पर त्रिपुरा में ही बाया जाएगा और इसपर आने वाला 600 करोड़ रुपये का पूरा खर्च मोदी सरकार उठाएगी।

'यह बहुत बड़ा संदेश है कि देश आपका ख्याल रखता है'

'यह बहुत बड़ा संदेश है कि देश आपका ख्याल रखता है'

समाचार एजेंसी एएनआई को दिए एक खास इंटव्यू में मिजोरम के पूर्व राज्यपाल स्वराज कौशल ने कहा है कि "यह बहुत बड़ा संदेश है कि यह देश ख्याल रखता है। ये विद्रोह क्यों शुरू होता है, क्योंकि यह भावना होती है कि आप जबतक हथियार नहीं उठाएंगे समस्याओं का समाधान नहीं निकलेगा, यह देश किसी की चिंता नहीं करता, दिल्ली में कोई सुनता नहीं है। अब दिल्ली सुनती है और उसने समस्याएं सुनी हैं और कठिनाइयों का समाधान कर दिया है।" गुरुवार को ही में मिजोरम और त्रिपुरा के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और ब्रू-रियांग समुदाय के प्रतिनिधियों के बीच एक समझौता हुआ है, जिसमें मिजोरम से विस्थापित होकर त्रिपुरा आए 30 से 34 हजार शरणार्थियों को स्थाई तौर पर त्रिपुरा में ही बसाए जाने का समझौता हुआ है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण फैसला

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण फैसला

कौशल ने बताया कि 130 करोड़ की आबादी वाले देश में ब्रू जनजाति की तादाद करीब 2 लाख है, जिनमें से करीब 34 हजार लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। 1990 से 1993 के बीच मिजोरम के गवर्नर रहे कौशल के मुताबिक पहले इन राज्य सरकारों में राष्ट्रीय समझ की कमी थी, लेकिन अब जाकर बदलाव आया है इसलिए दो दशक बाद अब जाकर इसका समाधान हो पाया है। कौशल ने ब्रू जनजाति के बारे में कहा है, "ये भारतीय नागरिक हैं। यह भारत में बांग्लादेश की सीमा के साथ-साथ मौजूद हैं, यह आपकी सुरक्षा की पहली पंक्ति में हैं। आप इन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकते। इसके पीछे (समझौते) मानवीय करुणा और राष्ट्रीय सुरक्षा का दृष्टिकोण है।" उन्होंने कहा है कि इस फैसले में भारत सरकार की राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर दूरदृष्टि और ब्रू समाज के प्रति दया की भावना दिखाई देती है, जो कि दशकों से ऐसे कैंपों में रहने को मजबूर हैं, जहां किसी तरह की मूलभूत सुविधाएं भी मौजूद नहीं हैं।

यह समझौता एक स्थाई समाधान है- स्वराज कौशल

पूर्व गवर्नर के मुताबिक सबसे बड़ी बात ये है कि ब्रू-रियांग समुदाय के लोग सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें इसके लिए कोई स्थाई हल निकाला गया है। उन्होंने कहा- "ब्रू-रियांग समझौता उन्हें स्थाई तौर पर व्यवस्थित कर देगा, जिससे कि वे सम्मानजनक जिंदगी जी सकते हैं। इस समझौते की सबसे बढ़िया बात ये है कि यह अस्थाई व्यवस्था नहीं है। यह समझौता एक समाधान है, जो टिकेगा।"

ब्रू जनजातियों का सारा इंतजाम केंद्र करेगा

ब्रू जनजातियों का सारा इंतजाम केंद्र करेगा

इस करार के तहत त्रिपुरा में 30,000-34,000 ब्रू शरणार्थियों को बसाने के लिए केंद्र सरकार 600 करोड़ रुपये देगी। समझौते के तहत सरकार इन्हें जीवन जीने के लिए सभी जरूरी सुविधाएं देगी। उन्हें 2 साल तक हर महीने 5,000 रुपये की नकद सहायता और 2 साल तक मुफ्त में राशन दिया जाएगा। उन्हें 4 लाख रुपये का फिक्स डिपॉजिट और घर बनाने के लिए 40 से 30 फुट का प्लॉट और डेढ़ लाख रुपये भी दिए जाएंगे। इनका राज्य के वोटर लिस्ट में नाम भी शामिल किया जाएगा।

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English summary
Swaraj Kaushal, former Mizoram Governor, has praised the decision to resettle Bru refugees permanently in Tripura
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