• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

13 प्वाइंट रोस्टर के बारे में वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं

By Bbc Hindi
दिल्ली विश्वविद्यालय
Getty Images
दिल्ली विश्वविद्यालय

अगर आप किसी दफ़्तर में काम करते हैं तो 'रोस्टर' शब्द आपके लिए नया नहीं होगा. आपको किस दिन, किस शिफ़्ट में जाना है और किस दिन घर पर आराम फ़रमाना है, ये इस रोस्टर से ही तय होता है.

लेकिन बीते कुछ हफ़्तों से ये शब्द सड़कों पर भी सुनने को मिला और सदन की बैठकों में भी. 13 प्वाइंट रोस्टर को लेकर एसटी, एससी और ओबीसी वर्ग सरकार से ख़ासा नाराज़ है. उनकी मांग है कि सरकार इसमें हस्तक्षेप करके इसमें बदलाव लाए .

दरअसल, 13 प्वाइंट रोस्टर वो प्रणाली है जिससे आने वाले समय में विश्वविद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्तियां की जाएंगी. हालांकि इसके विरोध में कई सप्ताह से अध्यापकों का एक बड़ा वर्ग प्रदर्शन कर रहा है जिसके बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस पर पुनर्विचार कर अध्यादेश लाने की बात कही है.

यहां तक कि आरएसएस से जुड़ा अध्यापकों का एक संगठन एनडीटीएफ़ (नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ़्रन्ट) के अजय भागी भी कहते हैं कि 200 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम से ही नियुक्तियां होनी चाहिए, जैसा कि अब तक होता आया है.

दिल्ली विश्वविद्यालय
Getty Images
दिल्ली विश्वविद्यालय

पहले अध्यापकों की नियुक्ति के लिए यूनिवर्सिटी को एक इकाई के तौर पर माना जाता था और आरक्षण के अनुसार अध्यापक पद पर नियुक्तियां दी जाती थीं. लेकिन अब इस नए नियम के मुताबिक, विश्वविद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्ति विभाग के आधार पर की जाएगी.

यानी अब ईकाई विश्वविद्यालय नहीं बल्कि विभाग होंगे. पहले नियुक्तियां 200 प्वाइंट रोस्टर के आधार पर की जाती थीं लेकिन अब इसे 13 प्वाइंट रोस्टर बना दिया गया है. इसे 'एल शेप' रोस्टर भी कहते हैं.

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने साल 2017 में शैक्षणिक पदों पर भर्ती के लिए संस्थान के आधार पर आरक्षण निर्धारित करने के सर्कुलर को ख़ारिज कर दिया था. हाई कोर्ट ने फ़ैसला दिया कि विश्वविद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्ति 200 प्वाइंट रोस्टर के आधार पर नहीं होकर, 13 प्वाइंट रोस्टर के आधार पर हो. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी इलाहाबाद हाई कोर्ट के फ़ैसले को जारी रखा.

13 प्वाइंट रोस्टर है क्या?

आम भाषा में कहें तो पहले जो चीज़ 200 में से बांटी जाती थी अब उसे 13 में से बांटा जा रहा है.

दिल्ली विश्वविद्यालय
Getty Images
दिल्ली विश्वविद्यालय

दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर और डूटा के सदस्य राजेश झा कहते हैं "अब तक यूनिवर्सिटी और कॉलेज को यूनिट मानकर आरक्षण दिया जाता था और ये 200 प्वाइंट रोस्टर था. इसमें एक से लेकर 200 प्वाइंट तक जाते थे. मान लें कि पहला पद जनरल है, दूसरा पद जनरल है, तीसरा पद जनरल है तो चौथा पद ओबीसी के लिए आरक्षित हो जाएगा और इसी तरह आगे के भी आरक्षण निर्धारित हो जाते थे लेकिन 13 प्वाइंट रोस्टर में हमारी सीमा कम हो गई है. हम सिर्फ़ 13 प्वाइंट तक जा सकते हैं और इस वजह से आरक्षण पूरा नहीं हो पाता."

राजेश झा बताते हैं कि 13 प्वाइंट रोस्टर की वजह से रिज़र्व कैटेगरी की सीटें कम हो रही हैं.

वो कहते हैं कि इस रोस्टर सिस्टम का सबसे ज़्यादा असर उन डिपार्टमेंट्स पर पड़ेगा जो काफी छोटे हैं. क्योंकि किसी छोटे डिपार्टमेंट में एक साथ 13-14 सीटें आएं, ऐसा होने की संभावना बहुत कम होती है.

वरिष्ठ पत्रकार दिलीप सी मंडल भी इस बात पर सहमति जताते हैं.

200 प्वाइंट रोस्टर को ख़त्म करके 13 प्वाइंट रोस्टर लाए जाने को वो आरक्षण के लिए ख़तरा बताते हैं. वो कहते हैं जब 200 पर्सेंट या प्वाइंट रोस्टर सिस्टम था तो इसमें 49.5 पर्सेंट पद आरक्षित होते थे और 50.5 प्रतिशत पद अनारक्षित. लेकिन 13 प्वाइंट रोस्टर आ जाने के बाद आप सभी आरक्षित पदों को पूरा नहीं कर सकते.

इसके तहत...

शुरू के तीन पद अनारक्षित होंगे और इसके बाद चौथा पद ओबीसी को जाएगा

इसके बाद सातवां पद एससी को मिलेगा

फिर आठवां पद ओबीसी को मिलेगा और इसके बाद

अगर डिपार्टमेंट में 14 वां पद आता है तब जाकर वो एसटी को मिलेगा.

दिलीप मंडल कहते हैं, "अगर 13 प्वाइंट रोस्टर को ईमानदारी से लागू कर भी दें तो भी हम रिज़र्व कैटेगरी को 30 फ़ीसदी ही संतुष्ट कर पाएंगे जबकि अभी केंद्र सरकार में 49.5 प्रतिशत रिज़र्वेशन का प्रावधान है."

प्रोफ़ेसर राजेश कहते हैं कि आजकल इंटर-डिसीप्लीनरी कोर्सेज़ की संख्या बढ़ गई है जिससे डिपार्टमेंट छोटे हो गए हैं, ऐसे में इन विभागों के लिए तो कभी रिज़र्वेशन की सीटें आएंगी ही नहीं.

दिल्ली विश्वविद्यालय
Getty Images
दिल्ली विश्वविद्यालय

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एक प्रोफ़ेसर ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि 13 प्वाइंट रोटा को भले ही ये कहकर फैलाया जा रहा हो कि इससे नियुक्तियों में धांधलियां कम होंगी लेकिन ऐसा नहीं है.

वो कहते हैं, "ये तो सीधे तौर पर धांधली है. खुल्लम-खुल्ला आरक्षण को ख़त्म किया जा रहा है."

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में इसे लेकर कैसी प्रतिक्रिया है?

इस सवाल के जवाब में वो कहते हैं, "यहां प्रोफ़ेसर दो धड़े में बंटे नज़र आते हैं. जो स्वयं आरक्षित वर्ग से आए हैं वो इसके नुक़सान गिनाते हैं और जो अनारक्षित वर्ग से आए हैं वो इसे बेहतर पहल बताते हैं."

डूटा (दिल्ली विश्वविद्यालय टीचर्स एसोसिएशन) के पूर्व प्रेसिंडेट और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर आदित्य नारायण इस रोस्टर का एक और बड़ा नुक़सान बताते हैं. वो कहते हैं. "13 प्वाइंट रोस्टर में रिज़र्वेशन कैटेगरी के लिए तो जो नुक़सान है वो है ही लेकिन एक बड़ा मुद्दा ये भी है कि दिल्ली विश्वदिद्यालय में सैकड़ों टीचर अस्थाई तौर पर सालों से काम कर रहे हैं. उन सभी ने 200 प्वाइंट रोस्टर के आधार पर ज्वाइन किया था और अब जब 13 प्वाइंट रोस्टर लागू हो जाएगा तो उनका भविष्य भी ख़तरे में पड़ जाएगा."

अब ये समझना ज़रूरी है कि ये रोस्टर सिस्टम आया कहां से?

दिल्ली विश्वविद्यालय
Getty Images
दिल्ली विश्वविद्यालय

यूपीए के कार्यकाल में उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी आरक्षण लागू करने का मामला आया था. इसके बाद सरकार ने यूजीसी को एक पत्र लिखकर आरक्षण के नियमों को स्पष्ट करने कि लिए कहा. इसके बाद प्रोफ़ेसर रावसाहब काले की अध्यक्षता में एक समिति बनी और 200 प्वाइंट रोस्टर अस्तित्व में आया. इस रोस्टर में यूनिट विश्वविद्यालय को बनाया गया और उसी आधार पर आरक्षण लागू करने की बात की गई. 200 प्वाइंट को लागू करने का उद्देश्य ये था कि जो प्रतिशत आरक्षण के लिए निर्धारित किए गए हैं उनका पालन हो सके.

दिलीप मंडल इसी पर रोशनी डालते हुए कहते हैं, "जब किसी कैटेगरी के लिए 1 अंक पूरा हो जाता है तो नियुक्ति के लिए पद बनता है. ये लागू करने का सिस्टम है. वो बताते हैं कि एससी का आरक्षण 15 पर्सेंट है, एसटी का 7.5 पर्सेंट है और ओबीसी का 27 पर्सेंट है. इस हिसाब से एक पूरा नंबर पूरा करने के लिए ओबीसी को चौथी पोस्ट का इंतज़ार करना होगा और इसी क्रम में एससी को भी सातवीं सीट का इतज़ार करना होगा और एसटी को 14वीं सीट का."

सरकार का रुख़

विपक्षी पार्टियां इस रोस्टर सिस्टम का विरोध कर रही हैं और उनका आरोप है कि इससे आरक्षण ख़त्म हो जाएगा. हालांकि केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर भी इस रोस्टर सिस्टम को लेकर बयान दे चुके हैं कि वो पुनर्विचार कर इस पर अध्यादेश ला सकते हैं. लेकिन अलग-अलग विश्वविद्यालयों से संबद्ध शिक्षकों का मानना है कि सरकार इस पर पहले ही क़दम उठा सकती थी और जो बातें सरकार अब कह रही है उनका पालन वो पहले ही कर सकती थी.

दिल्ली विश्वविद्यालय के ही एक प्रोफ़ेसर कहते हैं, "जब शिक्षकों ने विरोध शुरू किया उसके बाद कहीं जाकर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी फ़ाइल की."

वो कहते हैं, "दिल्ली विश्वविद्यालय की 60 फ़ीसदी फैकल्टी अस्थाई है ऐसे में चयन प्रणाली में ये बदलाव उनके लिए बहुत ही ग़लत है."

हालांकि केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर कह चुके हैं कि सरकार इस पर पुनर्विचार करेगी और अध्यादेश लेकर आएगी.

BBC Hindi
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Everything you want to know about 13 Point Roster

Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X