मध्य प्रदेश चुनाव: राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बावजूद अब तक टिकट वितरण में नहीं बन सकी सर्वसम्मति
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकटों के वितरण पर फैसला अभी भी बाकी है। एमपी विधानसभा चुनावों के उम्मीदवारों के नामों के चयन के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की ओर से की गई दर्जनों आधिकारिक और अनौपचारिक बैठकें किसी भी निर्णय तक जाने सफल नहीं बन पाई है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और वरिष्ठ कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ उम्मीदवारों के नाम पर अभी तक सहमति नहीं बन पाई है।

सूत्रों ने कहा कि वास्तव में केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) की तीसरी बैठक को सामान्य सचिव और अध्यक्ष स्क्रीनिंग कमेटी के रूप में बुलाया गया था, मधुसूदन मिस्त्री मध्यप्रदेश के दो सशक्त लोगों के बीच विभाजन को हल करने में नाकाम रहे। ऐसा कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश की करीब दो दर्जन सीटों पर अंतिम फैसला अब राहुल गांधी पर छोड़ा जा सकता है। सूत्रों ने कहा है कि वरिष्ठ नेता मध्य प्रदेश में आधे से अधिक सीटों पर किसी समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहे हैं। कमलनाथ, सिंधिया और सीएलपी नेता अजय सिंह सभी दांव पेच लगाए हुए हैं, इनमें से कोई भी अपनी मांगो पर वापस जाने के लिए तैयार नहीं है। लेकिन इस बीच राज्य के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह सबसे बड़े मास्टर साबित हुए हैं। हालांकि उन्होंने किसी के टिकट के लिए कोई डिमांड नहीं की है लेकिन अयज सिंह और कमलनाथ को राजनीतिक ज्ञान देकर पर्दे के पीछे से बड़ा खेल खेला है।
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वहीं मध्य प्रदेश के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव जिन्होंने स्क्रीनिंग कमेटी के जरिए टिकट के लिए अनुरोध किया था लेकिन राहुल गांधी ने कोई महत्व नहीं दिया है। दूसरी तरफ, मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के कांग्रेस नेता राजमनी पटेल ने भी स्क्रीनिंग कमेटी को एक लंबी सूची प्रदान की लेकिन इसे नहीं माना गया। गुजरात के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने भी पाटीदार समुदाय की ओर से लगभग एक दर्जन सीटें मांगी हैं लेकिन अभी तक कोई फैसला नहीं हो पाया है। गांधीवादी नेता राजगोपाल आदिवासियों और भूमिहीनों के बीच काम कर रहे थे ताकि 4-5 सीटों की मांग की जा सके लेकिन उन्हें भी कोई ध्यान नहीं दिया गया।
मध्य प्रदेश कांग्रेस के महासचिव दीपक बवारिया ने उम्मीदवारों की एक लंबी सूची तैयार की है। वह कम से कम 15-20 उम्मीदवारों के लिए टिकट पाने की कोशिश में लगे हैं जिनके नाम सचिवों और पर्यवेक्षकों को भेज दिए गए हैं। कांग्रेस हाई कमांड को कई क्षेत्रों से शिकायत भी मिल रही है कि सचिव और पर्यवेक्षकों ने अपने संसाधनों के लिए टिकट तलाशने वालों के समक्ष सरेंडर कर दिया है।
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