'महुआ मोइत्रा को लोकसभा से निष्कासित करें', 500 पेज की रिपोर्ट में एथिक्स पैनल का रूख
तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा को सांसद के रूप में बने रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और उनकी सदस्यता भी खत्म कर दी जानी चाहिए। यह सिफारिश उनके खिलाफ कैश फॉर क्वेरी आरोपों की जांच कर रही संसदीय आचार समिति ने की है।
मीडिया रिपोट्स के मुताबिक, 500 पन्नों की रिपोर्ट में समिति ने यह भी सिफारिश की है कि केंद्र द्वारा पूरे मामले की कानूनी, गहन, संस्थागत और समयबद्ध जांच की जाए।

समिति ने महुआ मोइत्रा के कार्यों को अत्यधिक आपत्तिजनक, अनैतिक, जघन्य और आपराधिक बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि महुआ मोइत्रा और व्यवसायी दर्शन हीरानंदानी के बीच क्विड प्रो क्वो के एक हिस्से के रूप में नकद लेनदेन की भारत सरकार द्वारा कानूनी, संस्थागत और समयबद्ध तरीके से जांच की जानी चाहिए। रिपोर्ट संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा अध्यक्ष को सौंपी जाएगी और चर्चा के बाद कार्रवाई की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, 15 अक्टूबर को बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को चिट्ठी लिखी। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि महुआ ने संसद में सवाल पूछने के लिए बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी से मोटी रकम और तोहफे लिए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पीकर ने एथिक्स पैनल को मामला हैंडओवर कर दिया।
वहीं, 21 अक्टूबर को निशिकांत ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर महुआ को घेरते हुए पोस्ट किया कि कुछ पैसों के लिए एक सांसद ने देश की सुरक्षा को दांव पर लगा दिया। मैंने इसे लेकर लोकपाल से शिकायत की है। इसके बाद आरोपों का सिलसिला जारी रहा। अब एथिक्स पैनल ने महुआ को लोकसभा से निष्कासित करने की बात कही है।












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