Engineer's Day 2022: भारत के टॉप 7 इंजीनियर जिन्होंने देश के भविष्य को आकार दिया
नई दिल्ली, 14 सिंतबर: भारत में हर साल 15 सितंबर को अभियंता दिवस (इंजीनियर्स डे) के रूप में मनाया जाता है। इंजीनियर्स डे को भारत के महान इंजीनियर और भारत रत्न मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्मदिन है। वह भारत के महान इंजीनियरों में से एक थे। उन्होंने ही आधुनिक भारत की रचना की और देश को एक नया रूप दिया। उन्होंने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया है। वह भारत के सबसे महान सिविल इंजीनियर, बांध निर्माता, अर्थशास्त्री और राजनेता थे। यह दिन उन इंजीनियरों के योगदान की प्रशंसा करने और पहचानने के लिए मनाया जाता है जिनके आविष्कारों और विचारों ने लोगों के जीवन को सरल और प्रभावी बना दिया है। इंजीनियर किसी भी समाज का दिल होते हैं। महान विचारों को वास्तविकता में बदलने से लेकर अभूतपूर्व नवाचार लाने तक उनका योगदान बेजोड़ है। हम उन इंजीनियरों को सलाम करते हैं। भारत वर्तमान में दुनिया का दूसरा नंबर का देश है जहां सबसे अधिक इंजीनियर हैं। आइए बात करते हैं उनमें से कुछ के बारे में जिन्होंने दुनिया भर में हर क्षेत्र में भारत को गौरवान्वित किया। इन 7 इंजीनियरों ने विश्व स्तर पर भारत के प्रतिनिधित्व को पूरी तरह से बदल दिया:

भारत के मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम :
एपीजे अब्दुल कलाम को भारत के पूर्व राष्ट्रपति व जानेमाने वैज्ञानिक और अभियंता के रूप में जाना जाता है। इन्हें भारत के मिसाइल मैन के नाम से भी जाना जाता है। भारत के राष्ट्रपति बनने से पहले, उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के साथ एयरोस्पेस इंजीनियर के रूप में काम किया था। एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तत्कालीन मद्रास के पम्बन द्वीप पर रामेश्वरम में हुआ था। उन्होंने 1960 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कॉलेज से पढ़ाई की थी। कलाम ने वैमानिकी इंजीनियरिंग में डिग्री के साथ मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और 1958 में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन में शामिल हुए। 1969 में वे SLV-III अंतरिक्ष यान के परियोजना निदेशक के रूप में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में शामिल हुए।

प्रायोगिक द्रव गतिकी के जनक: सतीश धवन
आज हिंदुस्तान जमीन से छलांग मार आसमान तक जा पहुंचा है, तो इसका श्रेय मशहूर अंतरिक्ष वैज्ञानिक सतीश धवन को भी जाता है। सतीश धवन भारतीय मैथमेटिशियन और एयरोस्पेस इंजीनियर थे। उनका जन्म श्रीनगर में 25 सितंबर 1920 को हुआ था। उन्होंने भारतीय स्पेस कार्यक्रम में अहम योगदान दिया वह इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) के तीसरे चेयरमैन बने थे। सतीश धवन ने टरबुलेंस व बाउंडरी लेयर के क्षेत्र में रिसर्च की। पंजाब विश्वविद्यालय लाहौर से स्नातक धवन ने अपनी पढ़ाई के अलावा अमेरिका में की। धवन ने ग्रामीण शिक्षा, रिमोट सेंसिंग, सेटेलाइट कम्युनिकेशन में कार्य किया। उन्होंने इन टेली कम्युनिकेशन सेटेलाइट और पोलर सेटेलाइट लांच व्हीकल में भी रिसर्च की।

भारतीय दूरसंचार क्रांति के जनक: सैम पित्रोदा
वह एक भारतीय दूरसंचार इंजीनियर, आविष्कारक और उद्यमी हैं। उनका जन्म 4 मई 1942 को ओडिशा के टिटलागढ़ में एक गुजराती परिवार में हुआ था। भौतिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स में अपनी मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद, वे आगे की पढ़ाई के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका चले गए और फिर शिकागो से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री प्राप्त की। उन्हें भारत के भारत के विदेशी और घरेलू दूरसंचार को आकार देने वाले व्यक्ति के रूप में माना जाता है, जो भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री के सलाहकार के रूप में कार्यरत थे। राजीव गांधी। उन्होंने भारत के दूरसंचार से संबंधित लगभग 6 प्रौद्योगिकी मिशनों का नेतृत्व किया।

भारत के मेट्रो मैन: ई श्रीधरन
ई श्रीधरन भारत के एक विख्यात सिविल इंजीनियर है। ई श्रीधरन को मेट्रो मैन के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने 1995 से 2012 तक दिल्ली मेट्रो के निदेशक रहे। भारत सरकार ने इन्हें 2001 में पद्म श्री तथा 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया। ये भारतीय इंजीनियरिंग सेवा से सेवानिवृत्त इंजीनियर थे। इन्होंने आंध्रप्रदेश के काकीनाड़ा स्थित गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी।

मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड: सुंदर पिचाई
भारत के मद्रास के एक छोटे से गाँव से आने वाले सुंदर पिचाई Google के CEO पद पर आसीन हैं। सुंदर पिचाई का जन्म तमिलनाडु के मदुरई में हुआ था। पिचाई ने अपनी पढ़ाई आईआईटी खड़गपुर से की, उसके बाद वारटन बिजनस स्कूल से एमबीए किया। स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी से भी उन्होंने पढ़ाई की है। गूगल से पहले पिचाई मैकिन्से एंड कंपनी में कंसल्टेंट थे। 1 अप्रैल 2004 को उन्होंने गूगल में इंटरव्यू दिया था, जिस दिन जीमेल लॉन्च हुआ था। 2004 में गूगल जॉइन करने से पहले सॉफ्टवेयर कंपनी एप्लाइड मैटेरियल्स और मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म मैकेंजी में काम किया था। 2015 में सुंदर पिचाई गूगल के सीईओ बन गए और अब गूगल की पैरेंट कंपनी एल्फाबेट के प्रमुख बन गए हैं। गूगल क्रोम ब्राउजर तैयार करने में पिचाई की अहम भूमिका रही है। गूगल टूलबार को डेवलप करने में भी पिचाई ने काफी काम किया।

एनआर नारायण मूर्ति
देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इफोसिंस के संस्थापक नारायण मूर्ति हैं। नारायण मूर्ति का जन्म 20 अगस्त 1946 को मैसूर में हुआ था। उन्होंने मैसूर विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की। बाद में उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर से मास्टर की डिग्री हासिल की। इंफोसिस की शुरुआत करने से पहले नारायण मूर्ति ने कई जगह काम भी किया। हालांकि, बाद में उन्होंने अपनी कंपनी शुरू करने का फैसला लिया। 1981 में इन्होंने इंफोसिस की शुरुआत की थी।

भारत की पहली महिला इंजीनियर ए. ललिता
भारत की पहली महिला इलेक्ट्रिकल इंजीनियर ए. ललिता का जीवन किसी प्रेरणा से कम नहीं है। 27 अगस्त, 1919 को मद्रास (चेन्नई) में जन्मी ए ललिता पढ़ाई में बहुत अच्छी थी और विज्ञान और टेक्नोलॉजी के बारे में अधिक जानना चाहती थी। ललिता के पिता पप्पू सुब्बा राव इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर थे। सात बच्चों के परिवार में ललिता पांचवी संतान थीं। 15 साल की उम्र में उनकी शादी हुआ और 18 साल में एक बच्ची की माँ बन गयी। बच्ची के जन्म के चार महीने बाद पति का निधन हो गया। ललिता ने हिम्मत नहीं हारी और पढ़ाई जारी रखी। मद्रास कांलेज आंफ इंजीनियरिंग में उन्होंने दाखिला लिया और 1943 के आसपास अपनी डिग्री हासिल की।

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