कभी दूध बेचता था ये शख्स, बन गया अरबपति, अब पहुंचा जेल, जानिए कैसे

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    Pearls Group Owner Nirmal Singh Bhangoo की 472 crore की संपत्ति जब्त । वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्लीः कभी वो साइकिल पर दूध बेचता था। दूध बेचते-बेचते उसी कई लोगों से मुलाकात होती चली गई और उसके लोगों को धोखा देना शुरू कर दिया। हम बात कर रहे हैं पर्ल ग्रुप के मालिक निर्मल सिंह भंगू की। निर्मल सिंह एक बार फिर से चर्चा में है। इस बार चर्ची की वजह है सोमवार को ईडी ने निर्मल सिंह की 472 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त कर ली। इस संपत्ति में उसके ऑस्ट्रेलिया में दो होटल्स और कई दूसरी जमीनें शामिल हैं।

    भंगू पर कई तरह के आरोप लगे हैं।

    भंगू पर कई तरह के आरोप लगे हैं।

    पर्ल ग्रुप के मालिक निर्मल सिंह भंगू पर कई तरह के आरोप लगे हैं। कहा जा रहा है कि भंगू सिंह ने पांच करोड़ से ज्यादा लोगों को ऐसी स्कीम्स में फंसाकर हजारों करोड़ इकट्ठा किए और सारे पैसे को विदेशों में लगाया।इस मामले में सीबीआई पहली भी निर्मल सिंह की गिरफ्तारी कर चुकी है।

    पंजाब के बरनाला जिले का रहने वाला है निर्मल सिंह भंगू

    पंजाब के बरनाला जिले का रहने वाला है निर्मल सिंह भंगू

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भंगू सिंह की भारत में हजारों एकड़ जमीन और करीब 100 से ज्यादा बैंक खाते सीज किए जा चुके हैं। उसकी करीब एक हजार करोड़ से ज्यादा की संपत्ति पहली ही जब्त हो चुकी है। निर्मल सिंह भंगू पर्ल्स ग्रुप का मालिक है जो पंजाब के बरनाला जिले का रहने वाला है। पहले वो साइकिल से दूध बेचता था, इसी दौरान उसने पॉलिटिकल साइंस में पोस्‍ट ग्रैजुएशन किया और नौकरी की तलाश में कोलकाता चला गया।

    एक कंपनी में काम किया

    एक कंपनी में काम किया

    कोलकाता में उसने एक कंपनी में काम किया और फिर उसने इन्वेस्टर्स से करोड़ों की ठगी करने वाली हरियाणा की कंपनी गोल्डन फॉरेस्ट इंडिया लिमिटेड में काम करने लगा। कुछ ही दिन में ये कंपनी बंद हो गई और फिर निर्मल सिंह बेरोजगार हो गया।

    अच्छा मुनाफा लौटाने का वादा करता

    अच्छा मुनाफा लौटाने का वादा करता

    कंपनी बंद हुई तो निर्मल सिंह ने साल 1980 के दशक में पर्ल्‍स गोल्‍डन फॉरेस्‍ट (पीजीएफ) नाम की कंपनी बनाई। यह कंपनी भी वो लोगों से सागौन जैसे पेड़ों के प्लांटेशन पर इंवेस्टमेंट कर कुछ वक्त बाद अच्छा मुनाफा लौटाने का वादा करता। लेकिन कभी किसी को कोई पैसा नहीं लौटाया गया। साल 1996 तक इससे करोड़ों की रकम जुटा ली। इस मामले की जांच हुई तो कंपनी को बंद कर दिया।

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