तो क्या राजनीति की पिच पर सिद्धू हो गये हिट विकेट?

चंडीगढ़। कभी क्रिकेट के मैदान पर ओपनिंग करते हुए अपनी कलाइयों के दम पर नवजोत सिंह सिद्धू स्पिनर की बैंड बजा देते थे। क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद वो ही नवजोत सिंह सिद्धू ने क्रिकेट की कमेंटरी बॉक्स पर अपनी रोचक कमेंटरी से कब्जा कर लिया और देश के वे सबसे चहेते होस्ट में से एक बन बैठे।

लेकिन क्रिकेट के जादूगर और बातों के धनी नवजोत सिंह सिद्धू की राजनैतिक पारी खासा अच्छी नहीं रही है। जिसकी वजह से राजनीति को समझने वाले लोगों ने कहना शुरू कर दिया है कि शायद राजनीति की पिच पर सिद्धू हो गये हैं हिट विकेट।

हाल ही में भाजपा पार्टी ने उन्हें अमृतसर से टिकट नहीं दिया और उनकी जगह मौजूदा राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता अरूण जेटली को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। जिसके बाद लगातार कहा जा रहा था कि सिद्धू इस बात से नाराज चल रहे हैं।

हालांकि पार्टी आलाकमान ने उनसे बात करके उन्हें समझाने की कोशिश की है और वह मान भी गये हैं लेकिन अब शायद वह कभी ही बीजेपी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ेंगे।

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क्यों नहीं मिला टिकट?

क्यों नहीं मिला टिकट?

पंजाब से भाजपा के एकमात्र सांसद सिद्धू को बाहर का रास्ता इसलिए दिखाया गया क्योंकि उनका पार्टी की प्रदेश इकाई के नेताओं और साझीदार शिरोमणि अकाली दल के 'शिखर नेतृत्व' के साथ मनमुटाव चरम पर था।

कहीं और से चुनाव नहीं लड़ेंगे?

कहीं और से चुनाव नहीं लड़ेंगे?

आपको बता दें कि सिद्धू इस सीट से 2004, 2007 (उपचुनाव) और 2009 में चुनाव जीत चुके हैं। भाजपा ने उन्हें पश्चिमी दिल्ली और कुरुक्षेत्र (हरियाणा) सीट की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने अमृतसर के अलावा और कहीं से भी चुनाव लड़ने से मना कर दिया।

बादल से झगड़ा

बादल से झगड़ा

सिद्धू का संभवत: पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उनके बेटे एवं राज्य के उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल से झगड़ा चल रहा था और उनका सुखबीर बादल के साले और पंजाब के राजस्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के साथ भी कोल्ड वार चल रहा था।

सिद्धू का मुंह खोलना?

सिद्धू का मुंह खोलना?

सिद्धू ने खुलेआम पंजाब की अकाली-भाजपा सरकार पर अमृतसर में विकास और इसके लिए धन मुहैया कराने में उदासीनता बरतने का आरोप लगाया था। इसका नतीजा यह रहा कि वे राजनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ गए।

वरिष्ठ नेता सिद्धू के खिलाफ

वरिष्ठ नेता सिद्धू के खिलाफ

राज्य सरकार में मंत्री अनिल जोशी सहित अमृतसर में पार्टी के वरिष्ठ नेता सिद्धू को दोबारा प्रत्याशी बनाए जाने के खिलाफ हो गए और उन्होंने जेटली को प्रत्याशी बनाए जाने की मांग की। सिद्धू को समर्थन सिर्फ उनकी पत्नी और बादल सरकार में मुख्य संसदीय सचिव नवजोत कौर से मिला। नवजोत कौर भाजपा की विधायक हैं।

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