• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

क्या बिहार में समय से पहले हो सकता है चुनाव ? फागू चौहान की नियुक्ति से बड़ा अंदेशा

By अशोक कुमार शर्मा
|

नई दिल्ली। बिहार में मिलीजुली सरकार चला रहे दो दल जिस तरह बार-बार टकरा रहे हैं उससे इनके इरादे नेक नहीं लग रहे। इनकी राजनीतिक महात्वाकांक्ष हिलेरों मार रही हैं। तालमेल लगातार बिगड़ रहा। जासूसी कांड के बाद अब तीन तलाक बिल पर दोनों में तकरार होने वाली है। भाजपा और जदयू के बीच तकरार के कई नये और पुराने मुद्दे हैं जो कभी भी कोई सियासी गुल खिला सकते हैं।

कुछ भी हो सकता है बिहार में

कुछ भी हो सकता है बिहार में

बिहार में जो परिस्थितियां बन रही हैं उसमें कुछ भी हो सकता है। नीतीश सरकार गिर सकती है। रोज-रोज के झंझट से वे इस्तीफा दे सकते हैं। नीतीश सरकार को राजद बाहर से समर्थन दे सकता है। बहुमत साबित नहीं होने पर बिहार में राष्ट्रपति शासन लग सकता है। या फिर समय से पहले विधानसभा का चुनाव भी हो सकता है। इनमें अगर कोई भी संभावना सच होती है तो ऐसे में राज्यपाल की भूमिका निर्णायक हो जाएगी। जदयू और भाजपा में अंदरुनी खींचतान के बीच राज्यपाल का बदला जाना एक अहम सियासी फैसला है। विपक्षी दलों का आरोप है कि भाजपा ने भविष्य की राजनीति का अकलन कर ही नये राज्यपाल की नियुक्ति की है।

राज्यपाल की नयी नियुक्ति से नीतीश नाखुश

राज्यपाल की नयी नियुक्ति से नीतीश नाखुश

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अचानक राज्यपाल की नयी नियुक्ति से नाखुश बताये जा रहे हैं। ये परम्परा रही है कि राज्यपाल की नियुक्ति के समय संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री को इसकी जानकारी दी जाती है। लेकिन नीतीश को इस बात का मलाल है कि केन्द्र में सहयोगी दल की सरकार होने के बाद भी उन्हें फागू चौहान की नियुक्ति के बारे में पहले नहीं बताया गया। नीतीश ने कहा, मुझे तो इसकी जानकारी टेलीविजन से मिली। भाजपा और जदयू में विश्वास की डोर लगातार कमजोर हो रही है। नीतीश भाजपा को स्वभाविक सहयोगी मानते रहे हैं। लेकिन अब 'अटल युग' वाली बात नहीं रही। नीतीश कुमार ने मोदी कैबिनेट में नहीं शामिल होने के समय इस बात को बेबाकी से कहा भी था। भाजपा को भी नीतीश का अतिशय अल्पसंख्यक प्रेम खटक रहा है।

तीन तलाक बिल का असर बिहार पर भी

तीन तलाक बिल का असर बिहार पर भी

जदयू अल्पसंख्यक वोटों को ध्यान में रख कर ही तीन तलाक बिल का विरोध कर रहा है। चूंकि इस बात को वह सार्वजनिक रूप से कह नहीं सकता इस लिए अपने विरोध को सैद्धांतिक रूप देने की कोशिश कर रहा है। जदयू का कहना है भाजपा ने इस बिल को संसद में पेश करने से पहले एनडीए के सहयोगी दलों से कोई राय विचार नहीं किया था। चूंकि यह विधेयक आमसहमति से नहीं लाया गया है इस लिए वह इसका विरोध करेगा। लोकसभा में जदयू के विरोध से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला क्यों कि भाजपा को प्रचंड बहुमत है। लेकिन राज्यसभा में जदयू का विरोध भाजपा के लिए भारी पड़ जाएगा। राज्यसभा में जदयू के छह सांसद हैं। अभी राज्यसभा में एनडीए के 117 सदस्य हैं। इनमें जदयू भी शामिल है। अगर जदयू अलग रहता है तो राज्यसभा में एनडीए का संख्या बल 111 ही रह जाएगा। जब कि बहुमत के लिए 123 का आंकड़ा चाहिए। अगर राज्यसभा में जदयू की वजह से तीन तलाक बिल पारित नहीं होता है तो इसका असर बिहार की राजनीति पर पड़ सकता है।

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Elections in Bihar may be ahead of time?, Big fear of the appointment of Fagu Chauhan
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more