कर्नाटक में चुनाव प्रचार हुआ "जहरीला', चुनावी भाषणों के गिरते स्तर से किसे मिलेगी मदद?
कर्नाटक में चुनाव प्रचार हुआ "जहरीला', चुनावी भाषणों के गिरते स्तर से किसे मिलेगी मदद?

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए मतदान के अब महज चंद दिन बाकी बचे हैं। आखिरी चरण के चुनाव प्रचार में सभी राजनीतिक दलों का चुनाव प्रचार आक्रामक हो गया है। इसकी वजह है कि कर्नाटक की लड़ाई अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है। वहीं चुनाव प्रचार आक्रामक होने के साथ फ्री- फॉर ऑल कैंपेन बन चुका है।

राजनीतिक दल एक दूसरे पर आरोप -प्रत्यारोप करने के बाद अब नेता भद्दी और व्यक्तिगत टिप्प्णी तक कर रहे हैं। देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के सबसे शीर्ष पद पर बैठे मल्लिकार्जुन खड़गे ने जहां देश के प्रधानमंत्री को 'जहरीला सांप' कहा, वहीं बीजेपी के एक विधायक ने कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी को 'विषकन्या' कहकर पलटवार किया।
फ्री- फॉर ऑल कैंपेन
फ्री- फॉर ऑल कैंपेन को देखकर कर लगता है कि ये आने वाले दिनों में व्यक्तिगत और भद्दी टिप्पणियां कम नहीं होने वाली हैं। कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने पीएम मोदी को जहरीला सांप कहकर अपने पद और राजनीति की मर्यादा को तार-तार कर दिया वहीं भाजपा विधायक ने भी सोनिया गांधी को विषकन्या कहकर सारी हदें पार कर दी।
क्या पार्टियों को चुनाव जीतने में कोई मदद मिलेगी?
ऐसा तब है जब अभी पिछले महीने पहले ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी की पीएम मोदी पर 2019 आम चुनाव में चुनाव प्रचार के दौरान 'क्या हर मोदी चोर होते हैं' वाले बयान पर दो साल की जेल की सजा कोर्ट ने सुनाई है। जिसके कारण राहुल संसद से आयोग्य होकर सांसदी गवां चुके हैं। अब ऐसे में सवाल उठता है कि चुनाव प्रचार में ऐसे भाषणों के गिरते स्तर से क्या पार्टियों को चुनाव जीतने में कोई मदद मिलेगी?
क्या कहते हैं राजनीति के विशेषज्ञ
हालांकि विशेषज्ञ का इस बारे में कहना है कि चुनाव में दोनों पक्षों की ओर गलत बयानबाजी की गई और इस घिनौनी हरकत से कोई मदद नहीं मिलने वाली है। जब आप एक भद्दी टिप्पणी करते हैं, तो क्या होता है कि समर्थक उनकी वाहवाही करते हैं लेकिन उसी पल वो नेता बैलिस्टिक हो जाते हैं।
क्या बदल पाएगी लोगों की राय?
जानकारों काम मानाना है जमीन पर इन टिप्पणियों से बहुत अधिक फर्क नहीं पड़ता है। जो आपके विरोधी हैं वे उस टिप्पणी के आधार पर अपनी राय नहीं रखेंगे। ऐसी भद्दी टिप्पणियां केवल अभियान की पिच को साफ करता है और माहौल को और अधिक खराब करता है।
चुनाव प्रचार में अपनी बात से भटक चुकी है कांग्रेस और भाजपा
कांग्रेस और भाजपा ने शुरू में अपना अभियान यह कहते हुए शुरू किया था कि वे केवल इस बात पर ध्यान केंद्रित करेंगे कि उन्होंने क्या काम किया और आने वाले समय में क्या करने वाले हैं?
कांग्रेस ने जहां कहां था कि वो इस चुनाव मे भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेगी और सत्ता में आने पर अपने वादों को पूरा करेगी। वहीं भाजपा ने कहा था कि राज्य सरकार की उपलब्धियों और नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित करेगी। पिच डबल इंजन सरकार के लिए थी।
तारीखों के आते ही बदला तेवर
हालांकि चुनाव की तारीख नजदीक आते हुए सब बदलता जा रहा है और नेता और पार्टियां व्यक्तिगत और भद्दी टिप्पणियों में डूबती जा रही है। कुल मिलाकर कहें तो चुनाव प्रचार जहरीला हो चुका है जिससे किसी पार्टी को तो फायदा होता तो नजर नहीं आ रहा है लेकिन चुनाव प्रचार में नेताओं का गिरता स्तर राजनीतिक महौल को गंदा कर शर्मसार कर रहा है।












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