ओडिशा में सुरक्षित नहीं हैं बुजुर्ग, उनके प्रति बढ़ रहे हैं अपराध, एनसीआरबी रिपोर्ट में हुआ खुलासा
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) रिपोर्ट-2022 के अनुसार ओडिशा राज्य में अपराध में महज एक साल में बहुत वृद्धि हुई है। इतना ही नहीं एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा में भी खामियों को का खुलासा हुआ है, क्यों कि पिछले तीन वर्षो में राज्य में बुजुर्गों के प्रति राज्य में अपराधों की संख्या में खासा इजाफ हुआ है।

सूत्रों के अनुसार 2020 में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराध की लगभग 326 घटनाएं, 2021 में 210 और 2022 में 551 घटनाएं दर्ज की गईं। पिछले साल बुजुर्गों के खिलाफ हुए कुल अपराधों में से चार हत्या के थे और एक गैर इरादतन हत्या का था।
इस रिपोर्ट के अनुसार राज्य में इस दौरान चार महिलाओं के साथ बालात्कार की घटनाएं हुई। वहीं तीन बुजुर्ग महिलाओं के सज्ञथ शील भंग करने की कोशिश क गई और उन पर हमला किया गया। वहीं 2022 पिछले साल राज्य में बुजुर्गों से चोरी की करीब 29 , डकैती की पांच और 1 रंगदारी की घटना दर्ज की गई है।
इसके अलावा राज्य में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराधों की लंबित जांच भी चिंता का बड़ा कारण है। 2022 में बुजुर्गों के खिलाफ अपराध से संबंधित लगभग 124 मामले पिछले वर्ष से लंबित हैं। इसके अलावा 2022 में 551 नए मामले सामने आए हैं।
74 मामलों में पुलिस ने पाया कि वरिष्ठ नागरिकों की शिकायतों पर दर्ज मामले सही थे लेकिन अपर्याप्त सबूत, पता न चलने या कोई सुराग न मिलने के कारण जांच अधूरी रही। ओडिशा पुलिस भी पिछले साल केवल 442 मामलों (2021 और 2022) की चार्जशीट दाखिल करने में सफल रही।
वहीं अन्य राज्यों की बात करें तो छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश में बुजुर्ग लोगों द्वारा क्रमशः 1,560 और 1,602 आरोपपत्र दायर किए। इतना ही नहीं चिंताजनक बात तो ये है कि 2022 में किसी भी मामले की सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। पिछले साल के अंत में सुनवाई के लिए लंबित मामलों की संख्या 2,057 थी। लंबित मामलों की दर 100 प्रतिशत है।












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