अल नीनो के प्रभाव से किसानों और कृषि को बचाने के लिए क्या है योजना?

केंद्र सरकार ने अल नीनो के प्रभाव की आशंका को लेकर पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है। वह लगातार इसके लिए भारतीय मौसम विभाग के संपर्क में है, ताकि किसानों को तुरंत अलर्ट किया जा सके।

To save farmers and agriculture from the effects of El Nino, the Central Government has prepared a special plan, in constant contact with the Indian Meteorological Department

इस साल मानसून के दौरान अल नीनो की भविष्यवाणी की गई है। इसके लिए सरकार ने कृषि और किसानों को इससे सुरक्षा दिलाने के लिए आकस्मिक योजना बनाई है। केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने एक सिस्टम तैयार किया है, ताकि प्रमुख कृषि बेल्ट में बरसात के भिन्न हालात की स्थिति को लेकर पूर्वानुमान और खास एडवाइजरी उपलब्ध करवाई जा सके।

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सरकार पूर्वानुमान और एडवाइजरी पर कर रही है फोकस
सरकार की इस पहल का मकसद ये है कि किसानों को समय रहते अलर्ट किया जा सके ताकि वह फसलों को होने वाले संभावित नुकसान को कम करने के लिए तत्काल कोई उपाय कर सकें। इसके लिए सरकार भारतीय मौसम विभाग से लगातार संपर्क में है। सरकार देश के प्रत्येक क्षेत्र के लिए खास योजना तैयार करना चाहती है।

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'हम लगातार हालात की निगरानी कर रहे हैं'
मौसम विभाग के आधिकारिक पूर्वानुमान के मुताबिक उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ इलाकों, पश्चिम-मध्य भारत के क्षेत्र और पूर्वोत्तर के कुछ जगहों पर इस साल सामान्य से लेकर सामान्य से कम बारिश देखने को मिल सकती है। एक वरिष्ठ अफसर के मुताबिक,'हम लगातार हालात की निगरानी कर रहे हैं।'

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इन महीनों में अल नीनो के 70% प्रभाव की संभावना
अधिकारी ने यह भी बताया है कि अल नीनो की संभावनाओं के बावजूद मौसम विभाग ने मानसून के मौसम में समान बरसत की संभावना जताई है। भारतीय मौसम विभाग ने इस साल सामान्य मानसून की भविष्यवाणी की है, जिसमें जून, जुलाई और अगस्त के मौसम में अल नीनो की संभावना 70% है।

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40% अल नीनो वर्ष में सामान्य या उससे अधिक वर्षा-मौसम विभाग
जबकि, जुलाई, अगस्त और सितंबर में अल नीनो की संभावना बढ़कर 80% होने की उम्मीद जाहिर की जा रही है। लेकिन, भारतीय मौसम विभाग ने भारत में अल नीनो को लेकर जो आंकड़े स्पष्ट किए हैं, उसमें राहत की संभावना छिपी है। इसके मुताबिक 1951 से 2022 के बीच करीब 40% अल नीनो वर्ष में सामान्य या सामान्य से अधिक मानसूनी बारिश हुई है।

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    अल नीनो क्या है?
    अल नीनो जलवायु की एक ऐसी घटना है, जिसमें पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में समुद्री जल का सतह असमान्य रूप से गर्म होने लगता है। अगर भारत के संदर्भ में देखें तो इसका ताल्लुक मानसून के मौसम में आमतौर पर बारिश की कमी से है। इसके प्रभाव से कई बार अत्यधिक गर्मी का सामना करना पड़ता है।

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    अल नीनो का इतिहास
    नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक स्पैनिश में अल नीनो का अर्थ छोटे लड़के से है। 17वीं सदी में प्रशांत महासागर में दक्षिण अमेरिका के मछुआरों ने पहली बार समुद्र में असमान्य गरम पानी को महसूस किया। अल नीनो के लिए पूरा नाम वे अल नीनो डे नैविडैड इस्तेमाल करते थे। क्योंकि, आमतौर पर अल नीनो दिसंबर के आसपास चरम पर होता है।

    मानसून से प्रभावित होती है भारतीय कृषि
    भारतीय कृषि का मानसून के साथ सीधा संबंध रहा है। बारिश कम हुई तो इसका सीधा असर कृषि पैदावार पर पड़ता है। खपत के लिए अनाज की किल्लत शुरू हो सकती है। क्योंकि, भारतीय अर्थव्यवस्था कृषि पर निर्भर है। ऐसे में जब भारत की आधी से ज्यादा खेती सिंचाई के लिए कुदरती वर्षा पर निर्भर है तो इसमें कमी होने से पूरी अर्थव्यवस्था दबाव में आ सकती है।

    कीमतों में बढ़ोतरी की वजह मुद्रास्फीति बढ़ रही है, ऐसे में अर्थव्यस्था की रक्षा के लिए मानसून में अच्छी बारिश बहुत जरूरी है। बारिश अच्छी हुई तो अनाज उत्पादन बढ़ेगा और खाद्य पदार्थों की कीमतें घटेंगी। इससे अर्थव्यवस्था अपने आप मजबूती की ओर बढ़नी शुरू हो जाएगी।

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