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ED Raid रोकने हाई कोर्ट पहुंची I-PAC, ममता के सांसद हिरासत में, कोलकाता ड्रामे की इनसाइड टाइमलाइन

ED Raid I-PAC TimeLine: कोलकाता में 08 जनवरी को जो हुआ, उसने बंगाल की राजनीति में जबरदस्त हलचल मचा दी। पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के दफ्तर और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी, फिर अचानक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मौके पर पहुंचना और अब I-PAC VS का कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना। पूरा घटनाक्रम किसी राजनीतिक थ्रिलर से कम नहीं रहा। ऐसे में आइए जानें पूरी टाइमलाइन।

ED और I-PAC दोनों पहुंची हाई कोर्ट

ईडी के छापेमारी के खिलाफ अब IPAC भी हाई कोर्ट पहुंच गई है। उसने तुरंत रेड रोकने की मांग की है। दूसरी ओर ईडी ने कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि उसकी जांच में दखल दिया गया।

ED Raid I-PAC TimeLine

एजेंसी का कहना है कि जब वह मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में वैध तरीके से तलाशी ले रही थी, उसी दौरान कुछ संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों ने दस्तावेजों को जबरन अपने कब्जे में ले लिया। ईडी ने अदालत से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। इस मामले की सुनवाई शुक्रवार (09 जनवरी) को जस्टिस शुभ्रा घोष की बेंच के सामने होने की संभावना है।

कोलकाता में ईडी रेड के खिलाफ टीएमसी का दिल्ली में प्रदर्शन, सांसद हिरासत में

कोलकाता में I-PAC पर ED की छापेमारी के विरोध में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने राजधानी दिल्ली में 9 जनवरी को जोरदार प्रदर्शन किया। टीएमसी नेताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय के बाहर धरना दिया और केंद्र सरकार, जांच एजेंसियों के खिलाफ नारेबाजी की।

इस विरोध प्रदर्शन में टीएमसी के राज्यसभा और लोकसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन, शताब्दी रॉय, महुआ मोइत्रा, बापी हलदर, साकेत गोखले, प्रतिमा मंडल, कीर्ति आज़ाद और डॉ. शर्मिला सरकार शामिल थे। नेताओं ने आरोप लगाया कि ईडी की कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से की जा रही है।

प्रदर्शन के दौरान स्थिति बिगड़ने से पहले ही दिल्ली पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सभी टीएमसी सांसदों को हिरासत में ले लिया। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया, जबकि टीएमसी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक विरोध की आवाज दबाने की कार्रवाई बताया।

किस मामले में हुई छापेमारी?

ईडी के मुताबिक, यह कार्रवाई किसी राजनीतिक दल या चुनाव को ध्यान में रखकर नहीं की गई। एजेंसी का दावा है कि छापे अवैध कोयला तस्करी और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस की जांच के तहत किए गए।

08 जनवरी को कुल 10 ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली गई, जिनमें 6 पश्चिम बंगाल और 4 दिल्ली में बताए जा रहे हैं। इनमें I-PAC का कोलकाता स्थित कार्यालय और उसके सह संस्थापक व डायरेक्टर प्रतीक जैन का आवास भी शामिल था। ममता बनर्जी ने इस मामले को लेकर FIR दर्ज भी कराई है।

छापेमारी को लेकर क्या कह रही है ईडी?

ईडी ने साफ किया है कि किसी भी राजनीतिक पार्टी कार्यालय पर छापा नहीं मारा गया। जांच उन परिसरों तक सीमित है, जहां कैश जनरेशन और हवाला ट्रांसफर से जुड़े इनपुट मिले थे। एजेंसी ने यह भी कहा कि तलाशी के दौरान कुछ लोगों ने मौके पर पहुंचकर जांच में अवैध दखल दिया और दस्तावेज छीन लिए, जो कानून का सीधा उल्लंघन है।

सुबह से शाम तक कैसे बदला माहौल

8 जनवरी की सुबह तड़के ईडी की टीमें दिल्ली से कोलकाता पहुंचीं। दिन निकलते ही दो जगहों पर एक साथ तलाशी शुरू हुई। पहली टीम सेंट्रल और साउथ कोलकाता के बीच स्थित प्रतीक जैन के घर पहुंची, जबकि दूसरी टीम साल्ट लेक इलाके में I-PAC के पुराने दफ्तर में दाखिल हुई।

शुरुआत में सब कुछ सामान्य तरीके से चल रहा था, लेकिन करीब साढ़े ग्यारह बजे के बाद हालात तेजी से बदलने लगे। पहले कोलकाता के पुलिस कमिश्नर प्रतीक जैन के आवास पर पहुंचे। कुछ ही देर बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद लाउडन स्ट्रीट स्थित उसी घर पर पहुंच गईं, जहां ईडी की कार्रवाई चल रही थी।

ग्रीन फाइल और बड़े आरोप

ममता बनर्जी कुछ समय तक अंदर रहीं। बाहर निकलते वक्त उनके हाथ में एक हरी फाइल दिखाई दी, जिसने सियासी हलकों में अटकलों को और तेज कर दिया। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि यह छापेमारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर कराई जा रही है। उनका कहना था कि ईडी तृणमूल कांग्रेस की चुनावी रणनीति, उम्मीदवारों की सूची और पार्टी से जुड़े संवेदनशील डेटा को जब्त करने की कोशिश कर रही है।

I-PAC ऑफिस तक पहुंचा मामला

प्रतीक जैन के घर से निकलने के बाद ममता बनर्जी सीधे साल्ट लेक स्थित I-PAC के ऑफिस पहुंचीं। बताया गया कि वह पिछले दरवाजे से अंदर गईं। करीब 15 से 20 मिनट बाद मुख्यमंत्री कार्यालय के कुछ अधिकारी बाहर आते दिखे, जिनके हाथ में फाइलें थीं। इन फाइलों को उसी गाड़ी में रखा गया, जिससे मुख्यमंत्री वहां पहुंची थीं। हालांकि यह साफ नहीं हो सका कि ये दस्तावेज ईडी की तलाशी के दौरान बरामद हुए थे या नहीं।

सीएम ममता बनर्जी ने क्या कहा?

ममता बनर्जी ने तीखे शब्दों में कहा कि क्या ईडी और गृह मंत्री का काम पार्टी की हार्ड डिस्क और उम्मीदवारों की सूची जब्त करना है। उन्होंने इसे घटिया राजनीति बताया और कहा कि उनकी पार्टी के दस्तावेज उठाकर ले जाने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से अपील की कि वे अपने गृह मंत्री को नियंत्रित करें और अगर बीजेपी चुनावी लड़ाई जीतना चाहती है तो लोकतांत्रिक तरीके से लड़े।

बीजेपी का पलटवार

बीजेपी ने ममता बनर्जी पर जांच में दखल देने का आरोप लगाया। विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने केंद्रीय एजेंसी के काम में बाधा डाली है और यह कानूनी कार्रवाई के दायरे में आता है। उन्होंने सवाल उठाया कि I-PAC के दफ्तर में वोटर लिस्ट क्यों मिली और क्या वह कोई पार्टी कार्यालय है।

I-PAC क्या है और क्यों अहम?

Indian Political Action Committee यानी I-PAC एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म है, जो राजनीतिक दलों के लिए चुनावी रणनीति, डेटा आधारित कैंपेन, मीडिया प्लानिंग और वोटर आउटरीच का काम करती है। इसकी शुरुआत 2013 में Citizens for Accountable Governance के नाम से प्रशांत किशोर और प्रतीक जैन ने की थी। बाद में इसका नाम बदलकर I-PAC रखा गया।

प्रशांत किशोर के सक्रिय राजनीति में आने के बाद संगठन की कमान पूरी तरह प्रतीक जैन के हाथों में आ गई। I-PAC 2021 से तृणमूल कांग्रेस के साथ मिलकर काम कर रही है और पार्टी के आईटी और मीडिया सेल की जिम्मेदारी भी संभालती है।

अब सबकी नजरें 09 जनवरी को होने वाली हाई कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। यह तय होगा कि ईडी की जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी और इस हाईवोल्टेज राजनीतिक टकराव का कानूनी अंजाम क्या होगा। एक बात तय है, I-PAC और ईडी की यह भिड़ंत बंगाल की राजनीति में लंबे समय तक गूंजती रहेगी।

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