Eastern Ladakh LAC Dispute: भारत और चीन गतिरोध सुलझाने के प्रयास जारी रखेंगे
Eastern Ladakh LAC Dispute के कारण एक बार फिर सुर्खियों में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत और चीन गतिरोध सुलझाने के प्रयास जारी रखेंगे। सैन्य और राजनयिक चैनल से संपर्क जारी रखा जाएगा।

Eastern Ladakh LAC Dispute लंबे समय से भारत और चीन के बीच गतिरोध का कारण है। गलवान हिंसा के बाद भारत और चीन के सैन्य अधिकारियों के बीच कई दौर की वार्ता हुई, लेकिन विवाद अनसुलझा है। मई की शुरुआत में सीमा विवाद चौथे वर्ष में प्रवेश कर जाएगा।
दरअसल, लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) का मुद्दा अभी भी नहीं सुलझा है। ताजा घटनाक्रम में India China Resolution पर पूरा फोकस कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि संवाद का सिलसिला जारी रहेगा।
भारत और चीन पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के साथ सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने, निकट संपर्क में रहने और सैन्य और राजनयिक चैनलों के माध्यम से बातचीत जारी रखने और नवीनतम दौर में शेष मुद्दों के पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान पर काम करने पर सहमत हुए।
विदेश मंत्रालय ने सोमवार को एक बयान में कहा, विवादित सीमा पर तनाव कम करने के लिए रविवार को आयोजित सैन्य वार्ता हुई। तत्काल सफलता का कोई संकेत नहीं है लेकिन गतिरोध खत्म करने के प्रयास जारी रहेंगे।
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बता दें कि भारत-चीन कोर कमांडर स्तर की वार्ता का 18वां दौर एलएसी के चीनी पक्ष में चुशुल-मोल्दो सीमा बैठक बिंदु पर आयोजित किया गया। बयान में कहा गया, "दोनों पक्षों ने पश्चिमी क्षेत्र में एलएसी के साथ प्रासंगिक मुद्दों के समाधान पर स्पष्ट और गहन चर्चा की।
वार्ता के मकसद के बारे में कहा गया, सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बहाल करना है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति होगी। दोनों राष्ट्राध्यक्षों के मार्गदर्शन में मार्च 2023 में दोनों विदेश मंत्रियों के बीच बैठक हुई। खुले और स्पष्ट विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
बता दें कि दोनों देशों के बीच लगभग तीन वर्षों से सीमा मुद्दे पर गतिरोध बरकरार है। गतिरोध खत्म करने के लिए भारतीय और चीनी सेनाओं ने दिसंबर 2022 में कोर कमांडर स्तर की 17वें दौर की वार्ता की थी।
गलवान घाटी, पैंगोंग त्सो, गोगरा (PP-17A) और हॉट स्प्रिंग्स (PP-15) से चार दौर की वापसी हो चुकी है, इसके बावजूद, भारतीय और चीनी सेनाओं के 60,000 से अधिक सैनिक और उन्नत हथियार लद्दाख थिएटर में अभी भी तैनात हैं।
दौलत बेग ओल्डी सेक्टर में डेपसांग और डेमचोक सेक्टर में चार्डिंग नाला जंक्शन (सीएनजे) में समस्याओं पर भी बात हो रही है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सैन्य मामलों के विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट जनरल विनोद भाटिया (सेवानिवृत्त) ने बताया, दोनों पक्ष एलएसी पर सख्ती से डटे हैं।
भाटिया ने कहा, जून 2020 में गलवान घाटी में झड़प के बाद पूर्वी लद्दाख में कोई तनाव नहीं बढ़ा है। जब तक बातचीत चल रही है, शांतिपूर्ण, पारस्परिक रूप से स्वीकार्य और न्यायसंगत समाधान की उम्मीद है।
रिपोर्ट के अनुसार, 27-28 अप्रैल को नई दिल्ली में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक के लिए चीनी रक्षा मंत्री ली शांगफू की भारत की आगामी यात्रा से पहले 18वें दौर की वार्ता हुई।
ली की भारत यात्रा जून 2020 में गालवान झड़प के बाद किसी चीनी रक्षा मंत्री की पहली यात्रा रही। गलवान घाटी में पैट्रोलिंग प्वाइंट 14 के पास सात घंटे तक घातक संघर्ष हुआ था। 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे।
गलवान संघर्ष के बारे में चीनी पक्ष ने केवल चार चीनी सैनिकों के मारे जाने की बात कही। अलग-अलग रिपोर्ट्स में 40 से अधिक के मारे जाने की खबर आई। भारतीय पक्ष के अनुसार, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के अधिक सैनिक मारे गए।
दिसंबर 2022 में आखिरी बैठक के बाद, दोनों पक्षों ने इसी तरह का बयान जारी किया और जमीनी स्तर पर सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने पर सहमति जताई। अरुणाचल प्रदेश के यांग्त्से में एलएसी पर झड़प में भारत-चीन के कई सैनिक घायल हुए। 11 दिन बाद मीटिंग हुई।
विगत 19 अप्रैल को, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन के साथ देश की सीमा पर किसी भी आकस्मिक स्थिति को संभालने के लिए भारतीय सेना पर विश्वास व्यक्त किया था। उन्होंने कहा था कि लद्दाख क्षेत्र में विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के लिए बातचीत जारी रहेगी।
बकौल राजनाथ, बातचीत सेना की वापसी और डी-एस्केलेशन का सबसे अच्छा तरीका है। इससे पहले मार्च में भारत ने चीन सीमा के करीब के क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को तेजी से ट्रैक करने के लिए एक शीर्ष पैनल के गठन की घोषणा की थी।
राजनाथ की अध्यक्षता में परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए सचिवों की एक समिति गठित करने का निर्णय हुआ। बता दें कि अग्रिम क्षेत्रों में क्रियान्वित की जा रही परियोजनाओं में रक्षा सहित कई मंत्रालय शामिल हैं।
सड़क परिवहन और राजमार्ग; पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन; रेलवे और संचार और बिजली और नई और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय भी इसमें शामिल है। पीएलए के साथ गतिरोध के बीच सेना लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में बेहतर सुविधाओं पर काम हो रहा है।
मोर्चे पर सैन्य सामग्री की तेज आवाजाही के लिए तीव्र गति से बुनियादी ढांचे का निर्माण हो रहा है। इसका मकसद आधुनिक हथियारों और उपकरणों के संरक्षण और किसी भी आकस्मिकता से निपटना है।
मई 2020 में चीन के साथ गतिरोध शुरू होने के बाद चीनी सैन्य निर्माण का मुकाबला करने के लिए भारत ने लद्दाख सेक्टर में हजारों अतिरिक्त सैनिकों को भेजा। सैनिकों को आधुनिक सैन्य हथियारों से लैस किया गया।
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