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Dog Meat Nagaland की संस्कृति का हिस्सा, औषधीय गुण भी! महिला जस्टिस के आदेश में 102 साल पुरानी किताब का जिक्र

डॉग मीट पर सरकारी फरमान को निरस्त करने के लिए हाईकोर्ट के आदेश में 102 साल पुरानी किताब का जिक्र हुआ। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के 15 अहम आदेश को भी रेफर किया गया है। 34 पन्नों के हाईकोर्ट ऑर्डर की खास बातें यहां पढ़िए

Dog meat Nagaland

Dog meat Nagaland की संस्कृति का हिस्सा है। इसमें औषधीय गुण भी होते हैं। इन दोनों बातों का जिक्र गौहाटी हाईकोर्ट की कोहिमा बेंच के आदेश में है। इस आदेश के बाद नागालैंड सरकार का नोटिफिकेशन निरस्त हो गया है।

क्यों चर्चा में है हाईकोर्ट का आदेश

सरकारी फरमान निरस्त होने के बाद नागालैंड में कुत्ते के मांस का व्यापार और रेस्त्रां में इसे सर्व भी किया जा सकेगा। आखिर हाईकोर्ट के आदेश में ऐसा क्या खास है जो इसकी चर्चा हो रही है।

हाईकोर्ट ने सुनाया 34 पन्नों का फैसला

हाईकोर्ट ने डॉग मीट पर नागालैंड सरकार का आदेश निरस्त कर दिया, ये मुख्य खबर हुई, लेकिन 34 पन्नों के फैसले में गौहाटी हाईकोर्ट की कोहिमा बेंच ने कई बेहद दिलचस्प बातों का जिक्र किया है। जानिए कुछ प्रमुख बातें-

महिला जस्टिस ने पारित किया आदेश

दरअसल, महिला न्यायमूर्ति Justice Marli Vankung की एकल पीठ ने आदेश पारित किया। इसमें 102 साल पुरानी किताब का जिक्र आया। 1921 में लिखी गई किताब के अलावा सुप्रीम कोर्ट के 15 आदेशों का जिक्र कर सरकार के नोटिफिकेशन को अवैध बताया गया।

DU और JNU से कानून की पढ़ाई

जस्टिस वैनकुंग के बारे में हाईकोर्ट की वेबसाइट पर मौजूद विवरण के अनुसार, इनका जन्म पूर्वोत्तर भारत के मिजोरम में 1964 में हुआ। दिल्ली यूनिवर्सिटी और जवाहरलाल यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई के बाद मिजोरम में कानूनी करियर शुरू किया।

2026 तक सेवा में बनी रहेंगी

अक्टूबर, 2021 में हाईकोर्ट जज बनीं, न्यायमूरति वैनकुंग मार्च 2026 तक सेवा में बनी रहेंगी। जून, 2023 में जब इन्होंने डॉग मीट पर आदेश पारित किया, इनकी सर्विस के 33 महीने बाकी हैं।

सुप्रीम कोर्ट के 15 आदेशों का जिक्र

Justice Marli Vankung ने अपने आदेश के पेज नंबर 16-17 और पैरा संख्या 19 में सुप्रीम कोर्ट के 15 आदेशों का जिक्र किया है। इन फैसलों की रेंज 1974 से 2017 तक है। इन फैसलों के आधार पर तय किया गया है कि सरकार के आदेश का अधिकारक्षेत्र क्या हो?

Dog meat Nagaland
Dog meat Nagaland

102 साल पुरानी किताब

इसके अलावा पैरा नंबर 33 में हाईकोर्ट ने कई किताबों का उल्लेख किया। सबसे पुराना जिक्र 102 साल पुरानी किताब का हुआ। इन किताबों के आधार पर कहा गया कि डॉग मीट नगालैंड के फूड कल्चर में शामिल है।

नागालैंड के जनजातीय लोगों का भोजन

डॉगमीट में औषधीय गुण होते हैं, इस बात का भी जिक्र किया गया। हाईकोर्ट ने कहा, इस बात को खारिज करने का कोई आधार नहीं है कि डॉग मीट नागालैंड के कुछ जनजातीय लोग नहीं खाते।

हाईकोर्ज जज ने किन किताबों का जिक्र किया

जस्टिस मार्ली वैनकुंग ने जेएच हटन की लिखी किताब- "द अंगामी नागाज, विद सम नोट्स ऑन नेबरिंग ट्राइब्स" (The Angami Nagas, With Some Notes on Neighbouring Tribes) का उल्लेख किया, जो 102 साल पुरानी है।

दो किताबें 97 साल पुरानी

इसके अलावा जेपी मिल्स की दो पुस्तकों- 1926 में प्रकाशित 'द एओ नागास' (The AO Nagas) और रेंग्मा नागास (The Rengma Nagas) और का भी उल्लेख किया।

नीचे पढ़ें हाईकोर्ट का पूरा आदेश-

कुत्ते के मांस की खपत

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में लिखा, एक मान्यता यह भी है कि कुत्ते के मांस का औषधीय महत्व भी है। कुत्ते के मांस की खपत नागाओं के बीच आधुनिक समय में भी एक स्वीकृत मानदंड और भोजन है, ऐसा लगता है।

कुत्ता मानव उपभोग के लिए नहीं

याचिकाकर्ता के अलावा कई लोग कुत्ते के परिवहन और कुत्ते के मांस को बेचकर अपनी आजीविका चलाते हैं। फैसले में अदालत ने ये भी कहा कि कुत्ते के मांस मानव उपभोग के मानक का भोजन का नहीं माना जाता। मानव उपभोग के लिए सुरक्षित जानवरों की परिभाषा में कुत्ता शामिल नहीं है।

क्या था तीन साल पुराना सरकार का नोटिफिकेशन

अदालत ने कहा, मुख्य सवाल है कि "क्या राज्य सरकार ने 2020 में जो अधिसूचना जारी की वह कानूनी रूप से सही थी?" नागालैंड के चीफ सेक्रेटरी ने नोटिफिकेशन में 6 अगस्त, 2014 को जारी सर्कुलर का जिक्र किया।

FSSAI के नियमों में मांस और पशु

भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने 2014 का सर्कुलर 2011 के प्रासंगिक विनियमन के तहत जारी किया। इसमें सर्कुलर में 'जानवरों', 'शव' और 'मांस' की परिभाषा का हवाला दिया गया।

कुत्ते के मांस का सेवन अपवाद! विदेशी विचार है

अदालत ने कहा, कुत्तों का उल्लेख 'जानवरों' की परिभाषा के तहत नहीं किया गया है। यह "आश्चर्यजनक नहीं" क्योंकि "कुत्ते के मांस का सेवन करने का विचार" देश के लिए पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों को छोड़कर विदेशी है।"

कैबिनेट का फैसला कानूनी रूप से सही नहीं है

जस्टिस वैनकुंग ने फैसले में कहा, कुत्ते के मांस की खपत आधुनिक समय में भी नागाओं के बीच स्वीकृत भोजन है, ऐसा लगता है। ऐसे में कैबिनेट के फैसले के अनुसार 4 जुलाई, 2020 की अधिसूचना रद्द की जाएगी।

मुख्य सचिव ऐसे आदेश के दायरे से बाहर

कैबिनेट के फैसले के बावजूद नोटिफिकेशन कैंसिल कियों? इस पर अदालत ने कहा, ऐसा इसलिए क्योंकि "कुत्ते के मांस के व्यापार और खपत के संबंध में अधिसूचना" विधानसभा से कानून पारित किए बिना" जारी की गई। मुख्य सचिव प्रतिबंध का आदेश जारी करने के लिए उपयुक्त प्राधिकारी नहीं।

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