मुलायम ने पाले गुंडे, अब डॉक्टरों से जंग, मारे गये 37 निर्दोष

इस जंग की शुरुआत कानपुर से हुई जहां पर सपा विधायक इरफान सोलंकी का जीएसवीएम कालेज के पास पेट्रोल पंप पर छात्रों से झगड़ा हो गया और उसके बाद सपा कार्यकर्ताओं और छात्रों के बीच जमकर मारपीट हुई। बाद में यही सोलंकी पुलिस फोर्स लेकर अस्पताल पहुंचे और छात्रों पर लाठी चार्ज करवाया। इस लाठीचार्ज में मेंडिकल छात्र व तमाम जूनियर डॉक्टर गंभीर रूप से घायल हो गये।
मेडिकल छात्रों के साथ हुई इस बर्बता के विरोध में प्रदेश भर के जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल का ऐलान कर दिया। लखनऊ, आगरा, कानपुर समेत लगभग सभी जिलों के सरकारी अस्पतालों में जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गये। यही नहीं करीब 300 डॉक्टरों ने तो अपने त्यागपत्र दे दिये हैं। ये विरोध सपा के गुंडों के खिलाफ है।
Did You Know: यूपी में 45 % विधायकों पर हैं क्रिमिनल केस
ये हड़ताल इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की यूपी इकाई के आह्वान पर है। आलम यह है कि अस्पतालों में सीनियर डॉक्टर आ नहीं रहे हैं और मरीजों को उपचार देने वाले जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर हैं। मरीज करहा रहे हैं। मंगलवार की दोपहर तक की रिपोर्ट के अनुसार हड़ताल के शुरू होने के बाद से अब तक 37 लोग मारे जा चुके हैं।
आइएमए के अध्यक्ष डॉ. आरएस यादव ने कहा है कि जब तक मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट हॉस्टल में घुसकर लाठी चार्ज करने वाले पुलिसवालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, जब तक हड़ताल जारी रहेगी।
मुलायम का बढ़ावा
इसमें कोई शक नहीं है कि समाजवादी पार्टी में गुंडागर्दी करने वाले नेताओं को किसी और ने नहीं नेता जी ने ही बढ़ावा दिया है। इसका ठोस सबूत इलाहाबाद रैली में उनका भाषण है, जिसमें उन्होंने सपा कार्यकर्ताओं से कहा, "अभी कुछ दिन के लिये ठेकेदारी बंद कर दो। इन सब चीजों से पार्टी का नाम खराब होता है। चुनाव खत्म हो जायें फिर करते रहना ठेकेदारी।" मुलायम ने कहा, "कोई मामला हो जाये तो थाने स्तर पर जाकर झगड़ा मत करो, बड़े अधिकारी से बात करो, अगर वो नहीं माने तो मुझे बताओ।"
मुलायम के इन शब्दों से साफ है कि जब तक लोकसभा चुनाव है, तब तक सपा नेता अपनी गुंडागर्दी कुछ दिन के लिये ताक पर रख दें। चुनाव हो जाये, तो फिर वो अपनी फॉर्म में आ सकते हैं।
सपा विधायक इरफान सोलंकी और Twitter का आईसीयू-
Did You Know: उत्तर में 45 % विधायकों पर हैं क्रिमिनल केस चल रहे हैं। कुल 396 में से 179 विधायकों यानी 45 प्रतिशत पर क्रिमिनल केस लगे हुए हैं, वहीं 86 यानी 22 प्रतिशत विधायकों पर गंभीर केस जैसे हत्या, अपहरण, बलात्कार, आदि के मामले दर्ज हैं।












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