महिला हवलदार बाला यादव और डॉक्टर मोहम्मद फवाज बने मानवता की मिसाल, रक्तदान कर बचाईं जान
नई दिल्ली। एम्स अस्पताल के डॉक्टर मोहम्मद फवाज और महिला कांस्टेबल बाला यादव ने मानवता की अनोखी मिसाल पेश की है। इन दोनों रक्तदान कर दो लोगों की जिंदगी बचाई है। कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी के समय कोरोना योद्धाओं की ये दरियादिली मानवता की एक अनोखी कहानी बयां कर रही है। डॉक्टर मोहम्मद फवाज ने अस्पताल में भर्ती एक मरीज को खून दिया है। मरीज को ऑपरेशन से पहले खून की सख्त जरूरत थी और कोई डोनर नहीं मिल रहा था। वहीं महिला हवलदार बाला यादव ट्विटर पर मैसेज देख रक्तदान के लिए तुरंत एम्स पहुंचीं।

जख्मी व्यक्ति को खून देकर बचाई जान
डॉक्टर मोहम्मद फवाज ने अस्पताल में भर्ती एक मरीज को खून दिया है। मरीज जख्मी था और उसे ऑपरेशन से पहले खून की जरूरत थी। काफी कोशिशों के बाद भी जब कोई डोनर नहीं मिला तो फवाज ने ही मरीज को खून दिया। बाद में उन्होंने मरीज की सर्जरी की। इसे लेकर एम्स अस्पताल के डॉक्टर विजय कहते हैं कि डॉक्टर फवाज एम्स अस्पताल के जनरल सर्जरी विभाग में काम करते हैं। यहां एक मरीज बुधवार की शाम भर्ती हुआ था। उसे ऑपरेशन के लिए रक्त की जरूरत थी लेकिन उसका ब्लड ग्रुप अस्पताल में नहीं था। मरीज के परिजनों से भी संपर्क किया गया लेकिन कोई कोरोना वायरस महामारी के कारण मदद के लिए नहीं आया।

मरीज की हालत गंभीर थी
इस मरीज के साथ उसकी पत्नी भी थी। मरीज की ऑपरेशन से पहले जांच की गई तो पता चला कि उसमें खून की कमी है। बिना रक्त चढ़े ऑपेरशन करना संभव नहीं था और रक्त नहीं मिलने के कारण ऑपरेशन में देरी हो रही थी। जिसके कारण मरीज की हालत लगातार गंभीर होती जा रही थी। काफी मशक्कत के बाद भी डोनर नहीं मिल रहा था। जिसके बाद डॉक्टर मोहम्मद फवाज ने ही उसे रक्त देने का फैसला किया। उन्होंने मरीज को रक्त देने के बाद खुद ही उसका ऑपरेशन भी किया। फिलहाल मरीज की हालत स्थिर है।

छुट्टी के बावजूद रक्तदान के लिए पहुंची बाला यादव
दिल्ली पुलिस में महिला हवलदार बाला यादव महरौली थाने में तैनात हैं। उन्होंने ट्विटर पर मैसेज देखा कि किसी को रक्त की जरूरत है। इसके बाद वह छुट्टी होने के बावजूद भी खून देने एम्स पहुंच गईं। उनके सहकर्मी भी उनकी काफी तारीफ कर रहे हैं। बाला यादव का कहना है कि उन्होंने बीते तीन साल से छुट्टी नहीं ली थी लेकिन अब लॉकडाउन के बाद कुछ दिनों की छुट्टी ली। बुधवार को उन्होंने मैसेज देखा कि किसी को खून की जरूरत है। जिसके बाद उन्होंने ये मैसेज डालने वाले दिल्ली पुलिस के सिपाही रविंद्र से बात की और पीड़ित व्यक्ति का नंबर मांगा। फिर उन्होंने मरीज के परिजनों से बात की और एम्स पहुंच गईं। बाला यादवा कहना है कि रक्तदान कर उन्हें काफी खुशी मिल रही है।












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