Diva & Jeet Adani ने अनोखे अंदाज में मनाई शादी की पहली सालगिरह, अडानी की सोच बनी 500 दिव्यांग महिलाओं की ताकत
Diva & Jeet Adani First Wedding Anniversary: कुछ लोग खुशी मनाते हैं और कुछ लोग खुशी बांटते हैं। मशहूर बिजनेसमैन के बेटे गौतम अडानी के बेटे जीत अडानी और उनकी बहू दीवा ने दूसरी राह चुनी। ठीक एक साल पहले उन्होंने अपनी शादी जैसे निजी मौके को उन्होंने सिर्फ जश्न तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे समाज के लिए कुछ बड़ा करने का जरिया बना दिया।
'अडानी मंगल सेवा' आज उसी सोच का नतीजा है, जो दिव्यांग महिलाओं को आत्मसम्मान और सुरक्षित भविष्य देने का काम कर रही है। आज से ठीक एक साथ पहले 7 फरवरी 2025 को जीत अडानी और दीवा शादी के बंधन में बंधे और शादी से ठीक पहले ये शानदार पहल की थी, जिसका उद्देश्य व्यक्तिगत उत्सव को एक स्थायी सामाजिक जिम्मेदारी में बदलना था।

दीवा-जीत अडानी ने दिव्यांग महिलाओं के साथ मनाई शादी की पहली सालगिरह
वहीं शादी की पहली सालगिरह पर, दीवा और जीत अडानी ने दिव्यांग महिलाओं के लिए अपनी सामाजिक सुरक्षा पहल 'अडानी मंगल सेवा' का एक वर्ष सफलतापूर्वक पूरा होने का जश्न मनाया। इसका लक्ष्य उन्हें दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता और सम्मान प्रदान करना है। यह अवसर गुरुवार शाम अहमदाबाद के शांतीग्राम स्थित बेल्वेदेरे क्लब के लॉन में एक कार्यक्रम में मनाया गया, जहां लाभार्थी, उनके परिवार और अदानी फाउंडेशन के प्रतिनिधि एकत्र हुए।
500 दिव्यांग महिलाओं को ₹10 लाख की फिक्स्ड डिपॉजिट
7 फरवरी 2025 को दीवा और जीत अडानी की शादी से ठीक पहले शुरू हुई इस पहल ने अपने पहले ही साल में 500 दिव्यांग महिलाओं को ₹10 लाख की फिक्स्ड डिपॉजिट दी है, जिससे उन्हें हर महीने नियमित आय मिल रही है और आगे के लिए आर्थिक सुरक्षा भी तय हो गई है। अडानी फाउंडेशन के नेतृत्व में यह पहल पांच वर्षों तक चलेगी। । ये जमा राशियां मासिक आय प्रदान करने के लिए संरचित हैं, जिनकी मूल राशि 10 साल बाद उपलब्ध होगी।
अडानी समूह की सामाजिक कल्याण शाखा अडानी फाउंडेशन इस पहल का संचालन करती है। 'यूथ फॉर जॉब्स' के सहयोग से 'विशिष्ट विकलांगता पहचान पत्र' (Unique Disability ID cards) धारक 25 से 40 वर्ष की लाभार्थी महिलाओं की पहचान की जाती है। यह कार्यक्रम पांच वर्षों तक प्रति वर्ष 500 दिव्यांग महिलाओं का समर्थन करेगा, जिसके लिए ₹50 करोड़ का वार्षिक आवंटन है।
फाउंडेशन के अनुसार, यह गौतम अदानी के इस दर्शन पर आधारित है कि सेवा निरंतर और जिम्मेदारी-प्रेरित होनी चाहिए, न कि प्रतीकात्मक। शादी की पहली वर्षगांठ समारोह में लाभार्थियों को सावधि जमा प्रमाणपत्र वितरित किए गए।
अहमदाबाद के ब्लाइंड पीपल्स एसोसिएशन ने गरबा और फ्यूजन संगीत सहित सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। कार्यक्रम की शुरुआत प्रार्थना से हुई, जिसके बाद उद्देश्यों और प्रभाव पर प्रस्तुतियाँ दी गईं।
गौतम अडानी ने बहू दीवा और बेटे जीत को दी बधाई
गौतम अडानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी पोस्ट में दीवा और जीत अदानी को उनकी वर्षगांठ पर बधाई दी और 'अदानी मंगल सेवा' की निरंतरता पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि इस पहल ने कई परिवारों को वित्तीय सुरक्षा, सम्मान और नई उम्मीद दी है, और लाभार्थियों के जीवन में आत्मविश्वास तथा मुस्कान लौटाने से मिलने वाली संतुष्टि भौतिक सफलता से कहीं बढ़कर है।
अडानी फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. प्रीति अडानी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि ''व्यक्तिगत खुशी का उच्चतम अर्थ सामूहिक कल्याण के लिए साझा करने में निहित है।'' उन्होंने जोर देकर कहा कि ''अदानी मंगल सेवा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विकलांग महिलाओं की शक्ति, लचीलेपन और सम्मान में विश्वास की अभिव्यक्ति है।''
जीत अडानी ने इस पहल को ''समर्थन का एक शांत पर स्थायी रूप'' बताया, जो परिवार की जिम्मेदारी है। दीवा अडानी ने कहा ''वित्तीय सुरक्षा स्थायी होनी चाहिए और सम्मान कभी भी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं होना चाहिए।''
कार्यक्रम में गौतम अडानी ने 'अडानी मंगल सेवा' के तहत हुए बदलाव की कहानियों को दर्शाती एक पुस्तक का विमोचन भी किया। शाम का समापन सामुदायिक रात्रिभोज के साथ हुआ, जिसने पहल की समावेशी और जमीनी भावना को दर्शाया।
अपने पहले वर्ष के समापन के साथ, अदानी मंगल सेवा एक उदाहरण बन गई है कि कैसे व्यक्तिगत मील के पत्थर को स्थायी सामाजिक प्रतिबद्धताओं में बदला जा सकता है। यह अदानी फाउंडेशन के दर्शन को भी सुदृढ़ करता है कि समृद्धि और सेवा अविभाज्य हैं।












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