दुनिया की कोई ताकत हमसे जम्मू-कश्मीर नहीं ले सकती- राजनाथ
नई दिल्ली। राज्यसभा में कश्मीर पर दिन में हुई चर्चा के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सदन में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जब मैं जुलाई 23 और 24 को श्रीनगर और अनंतनाग गया था, मैंने वहां डेलीगेशन से मुलाकात की। वहां राज्य की मुख्यमंत्री से कश्मीर के मुद्दे पर चर्चा की।

उन्होंने कहा कि मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि कश्मीर में जो हो रहा है वो पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित है। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि कश्मीर के लोग सामान्य जीवन यापन कर रहे हैं लेकिन राज्य सरकार मूलभूत सुविधाएं देने के लिए अपना पूरा प्रयास कर रही है।
राजनाथ ने आगे कहा कि कुछ स्वार्थी और गुमराह लोगों की वजह से कश्मीर अशांति की स्थिति बनी है। कश्मीर में सुरक्षा बलों ने बताया है कि वो जितना संयम बरत सकते हैं, बरत रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मैं गैर घातक हथियार के इस्तेमाल को जायज ठहराने के लिए कोशिश नहीं कर रहा हूँ, लेकिन यह पहले भी इस्तेमाल किया जा चुका है।
राजनाथ ने सदन में इस बात की जानकारी भी दी कि कश्मीर के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक 12 अगस्त को होगी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहेंगे। उन्होंने बताया कि कश्मीर में हुए विरोध प्रदर्शनों में 4,515 सुरक्षा कर्मी और 3,356 नागरिक घायल हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ एलइटी के आतंकी सुरक्षा कर्मियों और उनके परिवार वालों को धमकाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि दुनिया की कोई ताकत हमसे जम्मू-कश्मीर नहीं ले सकती। अगर पाकिस्तान से कोई बात होगी तो वो कश्मीर पर नहीं बल्कि पीओके पर होगी।
गुलाम नबी आजाद ने की चर्चा की शुरूआत
इससे पहले चर्चा की शुरूआत करते हुए नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद ने कहा कि वे गृह मंत्रालय को विपक्ष की ओर शुक्रिया अदा करना चाहते हैं कि कश्मीर के मुद्दे पर चर्चा करने की अनुमति दी।
आजाद ने कहा कि 'हम लगातार मांग करते रहेंगे कि प्रधानमंत्री को कश्मीर और दलित के मुद्दों पर सदन में बयान देना चाहिए।' उन्होंने कहा कि 'सिर्फ कश्मीर की सुंदरता को प्यार मत करिए, कश्मीर को उसके लोगों के लिए भी प्यार करिए, उन लोगों को भी प्यार करिए जिन्होंने विरोध प्रदर्शन के दौरान अपनी आंखें खो दी।'
आजाद ने कहा कि 'मिलिटेंट, मिलिटेंट होता है, चाहे वो कश्मीर का हो या पंजाब का। कश्मीर में हर कोई आतंकवाद का शिकार है। हममें से कई ने अपने लोगों को आतंक की वजह से कश्मीर में खो दिया।'
गुलाम नबी आजाद ने कहा कि मोदी हर मामले पर ट्वीट करते हैं, लेकिन कश्मीर पर खामोश क्यों हैं? उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को सदन में रहकर कश्मीर के मुद्दे बयान देना चाहिए था। आजाद ने मध्य प्रदेश में पीएम मोदी द्वारा कश्मीर के मुद्दे पर दिए गए बयान पर कहा कि यदि वास्तविक दर्द होता तो कश्मीर पर आवाज मध्यप्रदेश से नहीं आती।
सांप्रदायिकता और अलगाववाद में अंतर
उन्होंने आगे कहा कि 'सांप्रदायिकता और अलगाववाद में अंतर है।' आजाद ने कहा कि 'कानून और व्यवस्था सिर्फ कश्मीर पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि इसमें पैरामिलिट्री फोर्स भी शामिल हैं।' उन्होंने कहा कि 'हम जम्मू और कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग मानते हैं लेकिन क्या भारत और जम्मू कश्मीर के लोगों के दिलों को जोड़ने की जरूरत नहीं है?' आजाद ने यह भी कहा कि 'जरूरत है कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच एकीकरण हो।'
आजाद ने कहा कि 'जम्मू और कश्मीर में कर्फ्यू लगा है, कई लोग घायल हो गए हैं। नागरिकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। जरूरत है कि हम उनका दर्द साझा करें।' आजाद ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि 'सभी दलों का एक डेलीगेशन की मीटिंग कराई जानी चाहिए और उन्हें जम्मू -कश्मीर में भेजा जाए।'
एक आवाज की जरूरत
वहीं नेता पक्ष अरुण जेटली ने कहा कि 'जम्मू कश्मीर इस समय संवेदनशील हालात का सामना कर रहा है। हमें जरूरत है कि सभी एक ही आवाज में बोलें।'
हमें भी करनी होगी पीओके की बात
सपा नेता रामगोपाल यादव ने कहा कि 'बिना पाकिस्तान को दुरूस्त किए कश्मीर के हालात नहीं सुधर सकते। पाकिस्तान अगर कश्मीर की बात कर रहा है तो हमें कश्मीर के हिस्से की बात उठानी चाहिए जो पाकिस्तान ने कब्जा कर रखा है। हम उसकी बात क्यों नहीं करते?' उन्होंने कहा कि पैलेट गन पर पाबंदी लगनी चाहिए। रामगोपाल ने कहा कि यदि कश्मीर को भारत में बनाए रखना है तो हमें सीमाओं के साथ-साथ कश्मीर के अंदर भी सुरक्षा बढ़ानी चाहिए।
बंद हो पैलेट गन का प्रयोग
जदयू से सांसद शरद यादव ने कहा कि 'वो ( कश्मीर ) हमसे गुस्सा हैं, पर मोहब्बत के साथ उन्हें वापस लाना चाहिए, वरना इतिहास हमें माफ नहीं करेगा। हमें कश्मीरी लोगों का दिल जीतने के लिए कठिन प्रयास करना होगा। बल प्रयोग करना कोई रास्ता नहीं है। पैलेट गन का इस्तेमाल भी तत्काल बंद किया जाना चाहिए।'
बनाना होगा विश्वास का वातावरण
तृणमूल सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि 'बुरहान वानी सड़कों से ज्यादा इंटरनेट पर खतरनाक था। वो जिंदा रहने से ज्यादा मर कर खतरनाक है। यह बहुत जरूरी है कि कश्मीर की जमीन और कश्मीर के लोगों में भेद न किया जाए।'
कश्मीर मुद्दे पर बोलेते हुए सीताराम येचुरी ने राज्यसभा में कहा कि 'यदि वहां विश्वास की कमी है तो आपको विश्वसा का वातावरण बनाना होगा। मैं सरकार से अपील करता हूं कि कश्मीर के मुद्दे पर खुले दिमाग से चर्चा करे। सभी के विचारों को सुने, यह विश्वास बहाली के लिए आवश्यक है।'
उन्होंने आगे कहा कि 'समस्या को तभी हल किया जा सकता है जब राजनीति वार्ता केंद्रीय मुद्दे पर की जाए जैसा कि वहां के लोगों से वादा किया गया था। मैं चाहता हूं कि सरकार कश्मीर के मुद्दे को हल करने के लिए गंभीरता से विचार करे क्योंकि यह हम सब के लिए घाव है।'
इससे पहले राज्यसभा 2 बजे स्थगित कर दी गई थी।














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