क्या कोविड वैक्सीन के चलते बढ़े हार्ट अटैक से मौत के मामले? ICMR जवाब के करीब है
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने कहा है कि युवाओं में हार्ट अटैक के बढ़ते मामले और हार्ट अटैक और कोविड-19 वैक्सीन में लिंक को लेकर इसके शोध के नतीजे अगले दो हफ्तों में सार्वजनिक हो जाने चाहिए।
मनी कंट्रोल डॉट कॉम की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक आईसीएमआर के डायरेक्टर जनरल राजीव बहल ने कहा है कि इस शोध पर जो शोधकर्ता काम कर रहे हैं, उन्होंने अपनी रिसर्च के कुछ प्राथमिक नतीजे शेयर किए हैं और उन्हें जल्द ही जनता के सामने रखा जाएगा।

चार तरह के शोध किए जा रहे थे-आईसीएमआर
बहल का कहना है कि इस शोध के आकलन को सार्वजनिक करने से पहले आईसीएमआर इसकी विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा (peer review)का इंतजार कर रहा है। बहल के मुताबिक रिसर्च इंस्टीट्यूट कोविड-19 वैक्सीन और अचानक हार्ट अटैक के मामलों के बढ़ने के बीच के लिंक को लेकर चार तरह के शोध कर रहा था।
क्या स्वाभाविक मौतें हैं या फिर कुछ और?'
बहल के मुताबिक पहला शोध इस बात पर फोकस था कि 'युवाओं में अचानक मौत के जो मामले बढ़े हैं, वह क्या स्वाभाविक मौतें हैं या फिर कुछ और? उनके मुताबिक दिल्ली के एम्स में ऑटोप्सी कराई जा रही हैं। ऑटोप्सी के परिणामों की समीक्षा की जा रही है कि ये मौतें स्वाभाविक कारणों से हुईं या फिर इसके लिए दूसरे कारण जिम्मेदार हैं।'
समीक्षा रिपोर्ट की इंतजार
उनके अनुसार दूसरा शोध हार्ट अटैक से अचानक हुई मौतों और वैक्सीनेशन, लॉन्ग कोविड और मरीज की बीमारी की गंभीरता के आकलन पर केंद्रित था। उन्होंने कहा कि 'पहली समीक्षा का शोध पत्र आ गया है और और हम इससे जुड़े कुछ सवालों के जवाब दे रहे हैं। जैसे ही शोध पत्र की विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा (peer review)हो जाएगी, हम इसके नतीजों को जारी कर देंगे।'
इस शोधों में उन लोगों को भी शामिल किया गया है, जो कोविड संक्रमित हुए थे, अस्पतालों में भर्ती करवाए गए थे और आईसीएमआर की टीम ने उनका एक साल तक फॉलअप किया। बाकी डिटेल 40 अस्पतालों से जुटाए गए।
'मौतों का आकलन वैक्सीनेशन के दृष्टिकोण से भी कर रहे हैं'
आईसीएमआर के मुताबिक कोविड-19 के उपचार के बाद घर वापस लौटे 14,000 लोगों में से 600 की मौतें दर्ज की गई हैं। उन्होंने कहा, 'इनमें से कुछ मौतों प्राकृतिक हैं, क्योंकि वह बुजुर्ग थे, उन्हें कई तरह की बीमारियां थीं। क्या एक व्यक्ति जिसकी मौत हुई, उसने अस्पताल में दाखिल होने से पहले वैक्सीन ली थी। मरीज की बीमारी की गंभीरता कैसी थी और क्या डिस्चार्ज होने के बाद लॉन्ग कोविड के लक्षण थे? इसलिए हम मौतों का आकलन वैक्सीनेशन, लॉन्ग कोविड और मरीज की गंभीरता के दृष्टिकोण से कर रहे हैं।'
शोध पत्र का स्वतंत्र मूल्यांकन जारी-आईसीएमआर
आईसीएमआर डीजी ने कहा है कि शोध पत्र के नतीजों को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने स्वीकार कर लिया है और अभी इस शोध पत्र का स्वतंत्र मूल्यांकन चल रहा है। उन्होंने कहा, 'अगर 14,000 में से 600 लोगों की मौत हुई, तो पहले हमने वैक्सीनेशन स्टेटस के बारे में देखा। इन 600 में से कितनों ने वैक्सीन ली थी? और फिर हमने इसे डेटा को वैक्सीनेशन पूल से बाकियों की तुलना की जो जीवित हैं।'
वैक्सीनेशन के जोखिम का अनुमान कैसे लग रहा है?
इस तरह के शोध का लक्ष्य यह पता लगाना है कि जिनकी मौतें (600) हुईं, क्या उनमें वैक्सीन लेने वालों की संख्या, जो जिंदा (14,000)बच गए हैं, उनमें वैक्सीन लगवा चुके लोगों की तुलना में ज्यादा थी। इससे वैक्सीनेशन के जोखिम का अनुमान लग सकता है।
बहल ने इसे स्पष्ट करते हुए बताया, 'अगर संख्या समान है, मान लीजिए कि मरने वाले 600 में से 300 को वैक्सीन लगी थी और 14,000 लोगों में 7,000 को वैक्सीन लग चुकी है तो वैक्सीन एक रिस्क फैक्टर नहीं है।'
शोध में हार्ट अटैक या ब्रेन स्ट्रोक से अचानक मौत की घटनाएं भी शामिल
उन्होंने बताया कि अचानक हो रही मौतों को लेकर एक और शोध चल रहा था। 'इस शोध में हमने बड़ी संख्या में लोगों की पहचान की है, जिनकी हार्ट अटैक या ब्रेन स्ट्रोक से अचानक मौत हो गई है।'
चौथा शोध उन लोगों पर फोकस है, जिन्हें मायोकार्डियल इंफ्रैक्शन (हार्ट अटैक) हुआ, लेकिन मौत नहीं हुई। आईसीएमआर के डीजी ने कहा, 'ज्यादातर जो मौतें हुईं हमनें देखा है कि वे हार्ट या ब्रेन से संबंधित हैं। इस शोध में हम यह पता लगाना चाह रहे हैं कि वह क्या रिस्क फैक्टर्स थे, जिसकी वजह से लोगों के शरीर में ऐसी thromboembolic घटनाएं हुईं।'












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