गुस्से में पहले गांधी ने कस्तूरबा को घर से निकाला, फिर गलती का एहसास होते ही गले मिल फूट-फूट कर रोए दोनों
शौचालय की सफाई पर 'तकरार' होने पर मोहनदास करमचंद गांधी ने पत्नी को घर से निकाल दिया था। घटना साउथ अफ्रीका की है। हालांकि, कस्तूरबा ने एक मिनट में गांधी को गलती का एहसास करा दिया।
नई दिल्ली, 15 अगस्त : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बारे में यूं तो कई घटनाएं ऐसी हैं, जिन पर बरसों तक चर्चा हो सकती है। इतिहास की घटनाओं पर टीका-टिप्पणी भी खूब होती है, लेकिन बापू की अर्धांगिनी कस्तूरबा के बारे में चर्चा तुलनात्मक रूप से कम हुई है। बापू के प्रपौत्र तुषार गांधी ने कस्तूरबा की डायरी के कुछ ऐसे पन्नों को सार्वजनिक किया है, जो रोचक, रोमांचक और प्रेरक भी हैं। ऐसी ही एक घटना दक्षिण अफ्रीका की है।

घर में घुसने से पहले 11 बार स्नान
उन्होंने बताया, गांधी के किशोरावस्था के समय जाति प्रथा का बोलबाला था। आज के संदर्भ में दलित और उस समय हरिजन कहे जाने वाले लोगों के संपर्क में आने पर घर के दरवाजे पर बिठाकर 11 बार स्नान कराया जाता था। फिर घर में प्रवेश मिलता था। गांधी किशोरावस्था से ही इसका विरोध करते थे। कस्तूरबा की फैमिली में भी उसी दौर की थी। घरों में लोगों का प्रवेश सीमित हुआ करता था, लेकिन गांधी का स्वभाव अलग था। ऐसे में जो परिस्थितियां बनीं वो काफी प्रेरक भी हैं।

साउथ अफ्रीका में कस्तूरबा को गांधी ने घर से निकाला
बकौल तुषार गांधी, बापू का कहना था कि घर में आने वाला मेहमान अगर शौचालय साफ नहीं करता तो उसे भी हम खुद साफ करेंगे। एक बार कस्तूरबा शौचालय साफ करने में असहज दिखीं तो गांधी ने उनसे कहा मुस्कुराते हुए ये काम करें। कस्तूरबा ने विरोध किया तो आवेश में गांधी ने उन्हें घर से बाहर निकाल दिया।

कस्तूरबा और मोहनदास का रिश्ता
बकौल तुषार गांधी, भारत से कोसों दूर दक्षिण अफ्रीका जैसे परदेस में घर से निकाले जाने पर कस्तूरबा का भावुक होना स्वाभाविक था। उन्होंने घर से निकाले जाने के बाद रोते हुए पूछा कि वे कहां जाएंगी ? ये सुनते ही गांधी का क्रोध शांत हुआ और तुरंत उन्होंने कस्तूरबा को घर के अंदर बुलाया। दोनों गले लगकर फूट-फूट कर रोए। तुषार बताते हैं कि इस घटना के अलावा कई ऐसी घटनाएं हैं जो स्पष्ट करती हैं कि गांधी और कस्तूरबा के रिश्ते में ऐतबार सबसे बड़ा संबल था। उन्होंने स्वीकार किया कि अगर मोहनदास कुछ कर रहे हैं तो इसका कारण है, और परस्पर प्रेम और समझ प्रगाढ़ होता गया।

कहां मिली कस्तूरबा की डायरी
लेखक तुषार गांधी की किताब, द लॉस्ट डायरी ऑफ कस्तूर, माई बा कैसे तैयार हुई इस बारे में वे बताते हैं कि महाराष्ट्र के जलगांव में गांधी रिसर्च फाउंडेशन बापू से जुड़ी चीजों का संकलन कर रहा है। मध्य प्रदेश के इंदौर में कस्तूरबा केंद्र पर बक्से में कुछ किताबें और डायरी मिली। इसी में एक कस्तूरबा की डायरी मिली जो गुजराती भाषा में लिखी गई है। इसे अंग्रेजी अनुवाद तो किया गया है, लेकिन जिस प्रकार सहज भाव में गुजराती लिखी गई है, वैसे ही अंग्रेजी में भी ग्रामर और कुछ अन्य भाषाई गलतियों को सुधारे बिना किताब प्रकाशित की गई है।

खुद कस्तूरबा ने लिखी डायरी
बकौल तुषार कस्तूरबा के बारे में कहा जाता है कि वे लिखना नहीं जानतीं थीं। यहां तक कि परिवार की भी यही मान्यता थी। पहली बार डायरी मिलने पर लोगों ने स्वीकार ही नहीं किया कि कस्तूरबा गांधी लिखना जानती थीं। तुषार गांधी ने अपनी परदादी की गुजराती पांडुलिपियों का अंग्रेजी में अनुवाद करने की पहल की। घटनाओं, गुजराती लेखन की शैली और भाषा समझने पर कोई शक की गुंजाइश बाकी नहीं रह जाती कि घटनाओं को खुद कस्तूरबा ने ही लिखा है।

रोचक प्रसंगों का जिक्र
लेखक महात्मा गांधी के प्रपौत्र हैं। गांधी परिवार की दशकों पुरानी और निजी गाथा पर आधारित The Lost Diary of Kastur My Ba अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित हुई है। तुषार बताते हैं कि गुजराती भाषा की किताब अंग्रेजी में लिखने के दौरान इस बात का ध्यान रखा गया कि किताब में भावनाएं बरकरार रहें। तुषार बताते हैं कि कैसे गांधी ने कस्तूरबा का प्रसव कराया, सेवाग्राम में क्लिक की गई कस्तूरबा और गांधी की फोटो पर Feminism को लेकर टिप्पणी पर कैसे कस्तूरबा ने मुंहतोड़ जवाब दिया, ऐसे रोचक प्रसंगों का भी किताब में जिक्र किया गया है।












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