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इन दो शर्तों पर अखिलेश से सुलह को तैयार हुए शिवपाल, भतीजे धर्मेंद्र निभा रहे बड़ा रोल

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नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष शिवपाल यादव के बीच एक बार फिर से सुलह के कयास लगाए जाने लगे हैं। दरअसल पहले यूपी के विधानसभा चुनाव और इसके बाद हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद अखिलेश यादव के ऊपर बिखरे हुए समाजवादी कुनबे को फिर से एकजुट करने का दबाव बढ़ गया है। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव पहले ही शिवपाल यादव को पार्टी में वापस लिए जाने की वकालत कर चुके हैं। ऐसे में चाचा शिवपाल और भतीजे अखिलेश के बीच सुलह की जिम्मेदारी मुलायम सिंह यादव के एक अन्य भतीजे धर्मेंद्र यादव ने संभाली है।

शिवपाल ने रखीं ये दो शर्तें

शिवपाल ने रखीं ये दो शर्तें

'न्यूज 18' की खबर के मुताबिक, शिवपाल यादव और अखिलेश के बीच विवाद खत्म कराने की जिम्मेदारी मुलायम सिंह के भतीजे और बदायूं लोकसभा सीट से पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव ने संभाली है। दरअसल, चाचा शिवपाल और अखिलेश दोनों से ही धर्मेंद्र यादव के मधुर संबंध हैं। शिवपाल और अखिलेश के बीच सुलह के लिए कई बैठकें हो चुकी हैं और इन बैठकों में केवल मुलायम सिंह यादव के परिवार के लोग ही शामिल हुए हैं। शिवपाल यादव की तरफ से सुलह के लिए दो शर्तें रखी गई हैं। पहली- शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का सपा में विलय नहीं, बल्कि गठजोड़ होगा, और दूसरी शर्त ये कि सुलह की कोशिश में जुटे धर्मेंद्र यादव को समाजवादी पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए।

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कौन हैं धर्मेंद्र यादव

कौन हैं धर्मेंद्र यादव

बदायूं लोकसभा सीट से सांसद रहे धर्मेंद्र यादव, मुलायम सिंह यादव के भतीजे हैं। धर्मेंद्र यादव ने 2009 के लोकसभा चुनाव में बाहुबली नेता डीपी यादव को हराकर जीत हासिल की थी। हालांकि उनकी जीत का अंतर महज 32542 वोट था। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में धर्मेंद्र यादव ने बदायूं सीट पर भारतीय जनता पार्टी के वागीश पाठक को 166347 वोटों के अंतर से हराया। इससे पहले 2004 में भी यहां समाजवादी पार्टी का ही कब्जा था और सलीम इकबाल शेरवानी लोकसभा सांसद थे, जो बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए। अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच हुए विवाद के दौरान धर्मेंद्र यादव अखिलेश के साथ खड़े हुए नजर आए थे।

नरम पड़े अखिलेश और शिवपाल के तेवर

नरम पड़े अखिलेश और शिवपाल के तेवर

आपको बता दें कि हाल ही में अखिलेश यादव ने अपने चाचा शिवपाल सिंह यादव को लेकर नरम रुख के संकेत दिए थे। दरअसल, अखिलेश यादव ने पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में कहा कि अगर शिवपाल यादव दोबारा समाजवादी पार्टी में आना चाहें तो हम खुले दिल से उन्हें स्वीकार करेंगे। अखिलेश ने कहा कि सपा में जो आना चाहे, उसके लिए पार्टी के दरवाजे खुले हैं। वहीं, शिवपाल यादव ने भी हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा था कि परिवार में अभी भी एकजुटता की संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि मेरी तरफ से लगातार परिवार में सुलह की कोशिशें की जा रही हैं, बावजूद इसके कुछ ऐसे षडयंत्रकारी हैं जो परिवार को एक नहीं होने देना चाह रहे हैं।

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English summary
Dharmendra Yadav Took Over Responsibility For Reconciliation Between Akhilesh And Shivpal.
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