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Mahashay Dharampal Gulati: बंटवारे के वक्त मात्र 1500 रु लेकर भारत आए थे धर्मपाल गुलाटी, मेहनत और फौलादी इरादों से बने 'मसाला किंग'

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Mahashay Dharampal Gulati: 'इरादे अगर इंसान के फौलादी हों तो आंधियों में चिराग जलते हैं', इसी बात के साक्षात उदाहरण थे, महाशिया दी हट्टी (MDH) मसाला कंपनी के मालिक महाशय धर्मपाल गुलाटी, जिन्होंने आज 98 बरस की अवस्था में दुनिया को अलविदा कह दिया। मालूम हो कि गुरुवार सुबह 5:30 बजे दिल्ली के माता चानन देवी हॉस्पिटल में गुलाटी ने अंतिम सांस ली। उनके निधन की वजह हार्ट अटैक बताई जा रही है, हालांकि वो कई दिनों से बीमार थे और चानन देवी अस्पताल में भर्ती थे।

    Mahashay Dharampal Gulati: जानें कैसे खड़ा किया 2000 Crore का Business Empire । वनइंडिया हिंदी
     पाकिस्तान के सियालकोट में हुआ था धर्मपाल गुट्टी का जन्म

    पाकिस्तान के सियालकोट में हुआ था धर्मपाल गुट्टी का जन्म

    हाल ही में उन्हें कोरोना भी हो गया था लेकिन वो कोरोना से जंग जीत गए थे। उनके निधन से देश में शोक की लहर है, सीएम अरविंद केजरीवाल ने उनके निधन पर गहरा शोक प्रकट किया है। साल 1923 में पाकिस्तान के सियालकोट में जन्मे महाशय धर्मपाल 1947 में देश के बंटवारे के वक्त भारत आए थे। जिस वक्त वो इंडिया आए थे उस वक्त उनकी जेब में मात्र 1500 रु ,हाथ में मसाला बनाने का हुनर था और साथ में था फौलादी जज्बा, जिसके बूते उन्होंने पूरी दुनिया में एक अलग पहचान बनाई।

    यह पढ़ें: MDH के धर्मपाल गुलाटी ने 98 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा, जानिए उनके जाने पर किसने क्या कहा

    धर्मपाल के पिता चलाते थे 'महाशय दी हट्टी' नाम की दुकान

    धर्मपाल के पिता चलाते थे 'महाशय दी हट्टी' नाम की दुकान

    एमडीएच के कई टीवी एड में पगड़ी लगाए और बच्चों के बीच मुस्कुराते हुए नजर आने वाले धर्मपाल गुलाटी का जीवन बहुत ही संघर्षों से गुजरा । साल 1919 में धर्मपाल गुलाटी के पिता महाशय चुन्नीलाल सियालकोट में एक मसाले की दुकान 'महाशय दी हट्टी' चलाते थे। लेकिन बंटवारे के बाद गुलाटी को अपने परिवार संग दिल्ली आना पड़ा। इन्होंने जीविका चलाने के लिए दिल्ली के कुतुब रोड़ पर तांगा चलाना शुरू किया लेकिन थोड़े ही दिन में इन्हें समझ आ गया कि तांगे चलाने के पैसे से इनका घर-परिवार नहीं का जीवन चल नहीं सकता है।

    करोलबाग को मंदिर मानते थे गुलाटी, जाते थे नंगे पांव

    करोलबाग को मंदिर मानते थे गुलाटी, जाते थे नंगे पांव

    अपने पूरे परिवार को उन्होंने बहुत ही सुंदर ढंग से आगे बढ़ाया, उनका पूरा परिवार आज पढ़ा-लिखा और संपन्न है। महाशय धर्मपाल पक्के आर्य समाजी थे। उन्होंने कई बार आर्य समाज, कीर्ति नगर से आर्य समाज का चुनाव भी लड़ा था।

    'मेरे लिए तो मंदिर है करोलबाग'

    अपने काम के प्रति वो क्या सोच रखते थे, इस बात का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि धर्मपाल गुलाटी दिल्ली के करोलबाग में नंगे पांव ही जाते थे क्योंकि वो इस जगह को अपना मंदिर मानते थे क्योंकि इसी जगह ने उन्हें बिजनेस की दुनिया में एक बड़ी पहचान दिलाई थी।

    सबसे उम्रदराज विज्ञापन स्टार थे धर्मपाल गुलाटी

    सबसे उम्रदराज विज्ञापन स्टार थे धर्मपाल गुलाटी

    दुनिया के सबसे उम्रदराज विज्ञापन स्टार कहलाने वाले धर्मपाल गुलाटी मात्र 5वीं पास थे और पूरे देश में उनका कारोबार दो हज़ार करोड़ रुपए का है।उनकी सालाना सैलरी 25 करोड़ रुपए थी। साल 2019 में भारत सरकार ने इन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया था।

    यह पढ़ें: नहीं रहे MDH मसालों के मालिक महाशय धर्मपाल, दिल्ली में ली अंतिम सांस

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    English summary
    Mahashay' Dharampal Gulati, the owner of masala brand MDH passed away on December 3.Read his impresssive Journey, here is Profile in hindi.
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