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डेंगू शॉक सिंड्रोम बन रहा जानलेवा, FITTO से आसानी से हो सकेगी इसकी पहचान

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नई दिल्ली, 15 अक्टूबर: देश के कई राज्य इस समय में बरसात के मौसम के बाद डेंगू बुखार के प्रकोप से जूझ रहे हैं। प्रशासन, स्वास्थ्य सेवा और प्रबंधन प्रणालियां कोविड की तीसरी लहर की तैयारी कर रही हैं, वहीं डेंगू के मामले भी लगातार चिंता बढ़ा रहे हैं। भारत में डेंगू, सबसे आम आर्थ्रोपोड संक्रमण है। हाल के सालों में देश में डेंगू के मामलों में लगातार वृद्धि देखी गई है।

डेंगू शॉक सिंड्रोम बन रहा जानलेवा, FITTO से आसानी से हो सकेगी इसकी पहचान

नेशनल वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के आंकड़ों के मुताबिक, अकेले 2019 में डेंगू के 1.5 लाख से अधिक मामले आए। इनमें से ज्दातर कुछ दिनों के भीतर स्वयं को ठीक हो गए लेकिन कुछ रोगियों की हालत काफी गंभीर हुई और कुछ मामलों में मौतें भी हुईं।

जानेमाने फिजिशियन और फिट्टो के संस्थापक, डॉ अभिजीत रे ने कहा, डेंगू बुखार में मौत की वजह प्लेटलेट्स (थ्रोम्बोसाइटोपेनिया) का नुकसान है। प्लेटलेट्स की कमी से रक्त वाहिकाओं की दीवारों से द्रव का रिसाव होता है। खून की ये कमी शॉक की स्थिति की ओर ले जाती है जिसे अक्सर डेंगू शॉक सिंड्रोम या डेंगू रक्तस्रावी सिंड्रोम कहा जाता है।

डॉ रे का कहना है कि डेंगू से मौत की दर 2.5 फीसदी से ज्यादा नहीं होती है। जिसमें सबसे अहम वजह डेंगू शॉक सिंड्रोम है। डॉक्टरों और मरीजों के बीच इसको लेकर सबसे बड़ी चिंता यह थी कि अभी तक यह निर्धारित करने के लिए कोई तरीका नहीं था कि मरीज कब शॉक सिंड्रोम की ओर बढ़ रहा है। अगर शॉक सिंड्रोम को समय से पहचान लिया जाए तो डेंगू मरीज की मौत की आशंका को काफी कम किया जा सकता है।

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से रोकी जा सकती हैं डेंगू से होने वाली मौतें: स्टडीआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से रोकी जा सकती हैं डेंगू से होने वाली मौतें: स्टडी

फिट्टो एक AI-संचालित तकनीक लेकर आया है, जो मरीज के डेंगू शॉक सिंड्रोम से पीड़ित होने के जोखिम का अनुमान लगा सकती है। रोगी की प्लेटलेट काउंट और हेमटोक्रिट के स्तर को पहले 3 दिनों में सही से जानने की जरूरत है। पेटेंट किया गया एल्गोरिदम 96 फीसदी से अधिक इसे बताने में कामयाब है। ऐसे में शुरू में ही पहचान कर शॉक सिंड्रोम का इलाज हो सकता है।

  • डेंगू शॉक सिंड्रोम का शुरुआती स्तर पर इलाज से ये लाभ मरीज को हो सकते हैं-
  • डेंगू रोगियों की मृत्यु दर और रुग्णता दर को कम करना।
  • अस्पतालों को जरूरतमंद मरीजों के इलाद के लिए आईसीयू ठीक से प्रबंधित करने का अवसर प्रदान करना।
  • मुश्किल समय रोगी के रिश्तेदारों को भी ब्लड और दवाओं जैसे संसाधनों तक पहुंचने का समय मिलता है।

यह कैसे काम करता है

फिट्टो (FITTO) डेंगू शॉक सिंड्रोम प्रेडिक्टर तक पहुंचने के लिए वेबसाइट www.fitto.co.in पर विजिट कर सकते हैं। DSS प्रेडिक्टर पर क्लिक करने के बाद इससे जुड़े संक्षिप्त परिचय वीडियो भी मिल जाएंगे। मरीज में डेंगू शॉक सिंड्रोम को जानने के लिए सब ये स्टेप उठाएं-

  • मरीज का नाम और उम्र दर्ज करें।
  • प्लेटलेट काउंट और हेमटोक्रिट स्तर के पहले 3 दिन की वेल्यू एंटर करें।
  • सबसे नीचे 'Predict DSS' विकल्प पर क्लिक करें।
  • डेंगू शॉक सिंड्रोम के बारे में भविष्यवाणी दिख जाएगी।

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English summary
dengue shock syndrome predictor FITTO Four Steps to Identifing
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