राहुल गांधी को नोटबंदी में 4 पीढ़ियों की काली कमाई खोने की पीड़ा है: बीजेपी
नई दिल्ली। देश में नोटबंदी के दो साल पूरे होने पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बीजेपी पर जबरदस्त हमला बोला है। बीजेपी ने नोटबंदी का विरोध करने पर राहुल गांधी और कांग्रेस को आड़े हाथों लिया है। पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी नोटबंदी पर प्रदर्शन कर नोट बंदी के खिलाफ बोल रहे हैं। लेकिन देश की जनता उनके साथ नहीं है। उनके पास नोटबंदी पर कोई नई जानकारी नहीं है। वे पिछले दो साल से इस मामले पर रटे-रटाए बयान दे रहे हैं।

नोटबंदी के दो वर्षों बाद में भी कांग्रेस के लोगों में जो हडकंप मचा हुआ है
पात्रा ने कहा कि, नोटबंदी के दो वर्षों बाद में भी कांग्रेस के लोगों में जो हडकंप मचा हुआ है। चार पीढ़ियों की काले कारनामों से अर्जित की गई काली कमाई जिस प्रकार से एक दिन में समाप्त हो गई, इससे स्वाभाविक है कि उन्हें पीड़ा होगी । तीन लाख शेल कंपनियां बंद हो गईं। 10 साल तक इनकी आंख क्यों बंद थी आंख पर पट्टी बांधकर क्यों बैठे रहे। अब विरोध जता रहे हैं। उन्हें यह भी बताना चाहिए कि मनमोहन सिंह की अगुवाई में पिछले दस साल तक ये कंपनियां क्यों चल रही थीं।

अगर नोटबंदी फेल थी तो यह सफलताएं कहां से मिल रही हैं
पात्रा ने कहा कि, कांग्रेस नोटबंदी को सरकार का फ्लॉप कदम बताने पर तुली है। लेकिन उसे इस बात का भी जवाब देना चाहिए कि इसी दौरान पूरे देश में करदाताओं का आधार अभूतपूर्व ढंग से बढ़ा है। इस पर उसका क्या कहना है। इसी दौरान विश्व बैंक ने भारत के अर्थव्यवस्था को बेहतर होते हुए शीघ्र ही विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने का अनुमान व्यक्त किया है। भारत की डूइंग ऑफ बिजनेस रैंकिग में एतिहासिक सुधार हुआ है। अगर नोटबंदी फेल थी तो यह सफलताएं कहां से मिल रही हैं।

नोटबंदी के बाद देश में नक्सलवादी घटनाओं में 60 फीसदी की गिरावट
पात्रा ने कहा कि, आज राहुल जी ने छत्तीसगढ़ में पूछा कि,नोटबंदी के समय किसी ने काला धन रखने वाले अमीर को बडी कार से उतरकर लाइन में लगते हुए देखा है क्या? हां, हमने देखा है कि आप अपनी 4 करोड़ कार से बाहर निकलते हैं और लाइन में खड़े हो जाते हैं। पात्रा ने दावा किया कि नोटबंदी के बाद देश में नक्सलवादी घटनाओं में 60 फीसदी की गिरावट हुई है। इसके अलावा देश के 44 जिलों में नक्सलवाद बहुत कमजोर हो गया है। एक महीने में सबसे ज्यादा नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है।












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