नोटबंदी के 1 साल: मोदी सरकार ने गिनाएं ये 14 फायदे

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले का एक साल पूरा हो गया। नोटबंदी के फायदे नुकसान को लेकर हमेशा से बहस चलती रही है। केंद्र सरकार इसे सफल फैसला बताती रही है तो विपक्ष इसे सरकार की नाकामी मानती है। केंद्र सरकार ने नोटबंदी का मकसद कालाधन, भ्रष्टाचार, नकली नोट और टेरर फंडिंग को खत्म करना बताया था। सरकार इन चार मोर्चों पर कितनी कामयाब रही और सरकार का नोटबंदी का फैसला कितना सफल रहा ये जानना बेहद दिलचस्प है। वित्त मंत्रालय ने नोटबंदी को सफल बताते हुए इसके फायदे गिनवाए है।

 नोटबंदी के फायदे

नोटबंदी के फायदे

मोदी सरकार ने नोटबंदी को सफल बताते हुए बताया कि उन्होंने 1626 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति जब्त की। नोटबंदी के दौरान बैंकों ने 4.7 लाख रुपए की संदिग्ध लेनदेन का पता लगाया और उसे सीज किया।

 कर अनुपालन में वृद्धि

कर अनुपालन में वृद्धि


सरकार के मुताबिक नोटबंदी के बाद टैक्स पेयर्स की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। नोटबंदी के बाद 56 लाख नए टैक्सपेयर्स जुड़े है। वहीं टैक्स रिटर्न भरने वालों की संख्या में 25फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

 भ्रष्टाचार हुआ कम

भ्रष्टाचार हुआ कम


सरकार के मुताबिक नोटबंदी के बाद भ्रष्टाचार में कमी आई है। डिजिटल पेमेंट की वजह से लेनदेन में पारर्शिता आई है। जिसका असर करप्शन को कम करने में हुआ।

 आतंकवाद पर लगाम

आतंकवाद पर लगाम


नोटबंदी में 500 और 1000 रुपए के नोट बंद होने से नक्सलियों, आतंकवादियों की कमर टूट गई। नोटबंदी ने फंडिंग की चेन तोड़ दी और नक्सलियों को कंगाल बना दिया है। नोटबंदी से टेरर फंडिंग पर भी असर पड़ा।

 फर्जी कंपनियां हुई बंद

फर्जी कंपनियां हुई बंद


नोटबंदी के बाद करीब 2.24 ऐसी कंपनियों को बंद कर दिया गया। इन फर्जी कंपनियों में 2 साल से कोई भी कामकाज नहीं किया। नोटबंदी के बाद साथ ही 3 लाख डायरेक्टरों को अयोग्य घोषित किया गया।

 क्लीनिंग का असर

क्लीनिंग का असर


नोटबंदी के बाद 56 बैंकों से 35000 कंपनियों की जानकारी मिली है। इन कंपनियों के 58000 बैंक खातों में 17,000 करोड़ रुपए जमा किए और निकाले गए हैं। कंपनी के बैंक एकाउंट में 8 नवंबर 2016 को नेगेटिव बैलेंस था, लेकिन नोटबंदी के बाद इस खाते में 2,484 करोड़ रुपए जमा किए और निकाले गए।

 डिजिटल ट्रांजेक्शन का फायदा

डिजिटल ट्रांजेक्शन का फायदा


नोटबंदी के बाद कैशलेस ट्रांजैक्शन में तेजी आई। अक्टूबर तक साल भर में हर महीने औसतन 136-138 करोड़ रुपए के डिजिटल लेनदेन हुआ।

 डिजिटल पेमेंट में इजाफा

डिजिटल पेमेंट में इजाफा


नोटबंदी के बाद डिजिटल पेमेंट में बढ़ोतरी हुई। 2017-18 में डायरेक्ट बनिफिट ट्रांजैक्शन के जरिए 6.28 लाख करोड़ रुपए दिए गए। PoS मशीन की संख्या 15 लाख से बढ़कर 29 लाख हुईं। वहीं 78% बैंक खाते मोबाइल से जोड़े गए।

 टैक्स संबंधी शिकायतें

टैक्स संबंधी शिकायतें


टैक्स संबंधी शिकायतें को निपटारे में तेजी आई। नोटबंदी के बाद से टैक्स रिटर्न भरने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई। 2016-17 में टैक्स रिटर्न 2179 करोड़ के पार पहुंचा।

 मोबाइल वॉलेट में भी इजाफा

मोबाइल वॉलेट में भी इजाफा


नोटबंदी के बाद मोबाइल वॉलेट से पेमेंट में भी इजाफा हुआ। लोगों ने मोबाइल वॉलेट के जरिए पेमेंट का विकल्प चुना। भीम एप, एईपीएस, आईएमपीएस और एम वॉलेट से ट्रांजैक्शन में इजाफा हुआ।

 सस्ता हुआ लोन

सस्ता हुआ लोन


नोटबंदी के बाद होम लोन सस्ता हुआ। नोटबंदी के बाद बैंकों में काफी पैसा आया जिसकी वजह से बैंकों ने कर्ज सस्ता कर दिया।

 कार्ड पेमेंट में भी बढ़ोतरी

कार्ड पेमेंट में भी बढ़ोतरी


नोटबंदी के बाद कार्ड पेमेंट में भी बढ़तोरी हुई। कार्ड पेमेंट का आंकड़ा 26.55 करोड़ तक पहुंच गया जो कि करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी है।

 गरीबों को नौकरी

गरीबों को नौकरी

नोटबंदी के बाद गरीबों को नौकरी में बढ़ोतरी हुई है। सरकार का कहना है कि नोटबंदी के बाद बैंकों में 50 लाख अकाउंट खुले, जो कि कैशलेश सैलरी के लिए खोले गए। 1.01 करोड़ अतिरिक्त कर्माचरियों ने ईपीएफओ में खाता खुलवाया।

जनधन खातों में पहुंची रकम

जनधन खातों में पहुंची रकम

नोटबंदी के बाद महज 45 दिन में जनधन खातों में 87,100 करोड़ रुपए पहुंच गए। देश के जीडीपी में बढ़ोतरी हुई।

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