संक्रमण से मिली इम्यूनिटी को 60% कम करने में सक्षम है डेल्टा वेरिएंट, स्टडी में दावा
नई दिल्ली, 8 जुलाई। कोरोना वायरस का डेल्टा वेरिएंट तेजी से फैलता है और इसने प्रतिरक्षा के बचने के तरीके में और सुधार किया है। आईएनएसओसीओजी, इंपीरियल कॉलेज लंदन और कोपेहहेगन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन के अनुसार डेल्टा वेरिएंट पिछले संक्रमणों से मिली प्रतिरक्षा को 60 प्रतिशत तक कम कर देता है।

इंडियन सॉर्स-कोवि-2 कंसोर्टियम ऑन जीनोमिक्स (INSACOG) कोरोनवायरस में जीनोमिक विविधताओं की निगरानी के लिए प्रयोगशालाओं का एक अखिल भारतीय नेटवर्क है।
शोधकर्ताओं की टीम ने दिल्ली में चौथी कोविड लहर (जब भारत ने अपनी दूसरी लहर देखी) के आंकड़ों को देखा, जिसने 50 प्रतिशत की सीरो पॉजिटिविटी की रिपोर्ट के बावजूद राजधानी में स्वास्थ्य प्रणालियों को हिलाकर रख दिया था।
इस शोध को medRxiv पर पोस्ट किया गया था और अभी इसकी समीक्षा की जानी बाकी है। इसमें मॉडलिंग अध्ययन, सीरो-सर्वेक्षण के साथ ही साथ म्यूटेंट वायरस के स्पाइक प्रोटीन में संरचनात्मक अंतर्दृष्टि के डेटा का अध्ययन किया गया।
डेल्टा वेरिएंट सबसे ज्यादा संक्रामक
शोधकर्ताओं ने ये देखा कि अल्फा (बी.1.1.7) वेरिएंट- जिसे पहली बार ब्रिटेन में पहचाना गया- ने इस साल फरवरी में उत्तरी भारत में प्रवेश किया, जिसके बाद कोरोना वायरस के प्रकोप को बढ़ाया जिसने स्वास्थ्य ढांचे पर दबाव बढ़ा दिया। हालांकि स्वास्थ्य ढांचा बिखरा नहीं था।
मार्च में कप्पा (बी.1.617.1) और डेल्टा (बी.1.617.2) वेरिएंट के आने से नए मामलों में और तेजी से वृद्धि हुई। जल्द ही डेल्टा वेरिएंट, अल्फा और कप्पा से आगे निकल गया।
डेल्टा वेरिएंट के चलते दिल्ली में अप्रैल में नए मामलों में 10 गुना वृद्धि हुई। दो सप्ताह की अवधि में लगभग 2,500 से 25,000 दैनिक मामले सामने आए। इसने स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में हाहाकार मचा दिया। रोज होने वाली मौतें भी पिछली लहरों की तुलना में तीन गुना अधिक हो गई थीं।
टीम द्वारा किए गए मॉडलिंग अध्ययनों से पता चला है कि डेल्टा वेरिएंट पूर्व संक्रमण से मिलने वाली इम्यूनिटी से आंशिक रूप से बचने में सक्षम है।












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