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दिल्ली हिंसा: गांव से मजदूरी करने दिल्ली आया था ताहिर, 17 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की संपत्ति का मालिक बन गया

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नई दिल्ली- दिल्ली हिंसा में सबसे गंभीर आरोपों में घिरने वाला नाम आम आदमी पार्टी से बाहर निकाले गए निगम पार्षद ताहिर हुसैन का है। किसी को यकीन नहीं होगा कि दिल्ली में कई बिल्डिंगों और फैक्ट्रियों का मालिक ताहिर कभी दिहाड़ी मजदूरी करने दिल्ली आया था। वह मूल रूप से यूपी के अमरोहा का रहने वाला है और दो दशक पहले जब वह दिल्ली आया था, जब गांव में उसके परिवार के दिन बहुत ही गरीबी में गुजर रहे थे। लेकिन, तान साल पहले उसने खुद अपने पास करोड़ों रुपयो की प्रॉपर्टी होने की घोषणा की थी। उसपर एक आईबी कर्माचारी के दंगों के दौरान बेरहमी से कत्ल का तो आरोप है ही, दिल्ली दंगे को साजिशन भड़काने और योजनाबद्ध तरीके से हिंसा को अंजाम देने के भी आरोप लग रहे हैं।

20 साल पहले दिहाड़ी मजदूरी करने आया था दिल्ली

20 साल पहले दिहाड़ी मजदूरी करने आया था दिल्ली

दिल्ली दंगे का एक मुख्य आरोपी ताहिर हुसैन करीब 20 साल पहले गरीबी के चलते दिहाड़ी मजदूरी करने के लिए गांव से राजधानी आया था। जबसे टीवी चैनलों पर उसकी बिल्डिंग से किए गए कारनामों की तस्वीरें दिखाई जा रही हैं, दिल्ली से सैकड़ों किलोमीटर दूर यूपी के अमरोहा जिले के पोरारा गांव के लोगों का माथा ठनक रहा है। पूरे गांव में अभी ताहिर ही चर्चा का विषय बना हुआ है। अभी से तीन साल पहले 2017 में ताहिर हुसैन ने दिल्ली नगर निगम चुनाव में अपनी संपत्ति की जो घोषणा की थी, उसमें उसने 17 करोड़ रुपये से ज्यादा की प्रॉपर्टी बताई थी। दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को ही चांदबाग इलाके में उसकी चार मंजिला बिल्डिंग और एक फैक्ट्री को सील किया है। पोपरा गांव के लोग बताते हैं कि वह तंगी की हालत में ही मजदूरी की तलाश में दिल्ली गया था। कुछ साल बाद उसका पिता कल्लू उर्फ कल्लन सैफो भी परिवार के साथ बड़े बेटे के पास पहुंच गया। गांव के पूर्व प्रधान जयपाल सिंह ने मीडिया को बताया कि ताहिर गांव का अपना पुश्तैनी घर भी बेच चुका है। उसी के एक और ग्रामीण लक्ष्मी नारायण गिरी के मुताबिक ताहिर पांच भाइयों में सबसे बड़ा है। गांव में खेती की जमीन और कोई रोजगार नहीं होने की वजह से ही वह दिल्ली मजदूरी करने गया था।

ताहिर का घर या दंगे का हेडक्वार्टर ?

ताहिर का घर या दंगे का हेडक्वार्टर ?

दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन को 26 साल के आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या का आरोपी बनाया है। उनका शव उसके घर के पास चांदबाग पुलिया से बरामद किया गया था। अंकित के परिवार वाले और कई चश्मदीदों ने ताहिर के लोगों पर उसी की बिल्डिंग में उसके कत्ल किए जाने के आरोप लगाए हैं। आरोपों के मुताबिक जिन दंगाइयों ने आईबी कर्मचारी को बेरहमी से मार डाला, उसकी अगुवाई आम आदमी पार्टी से निकाले गए ताहिर ने ही की। यही नहीं ताहिर पर अपनी बिल्डिंग का इस्तेमाल दंगाइयों को करने दिया, ये भी उसपर आरोप हैं। मीडिया से लेकर पुलिस तक के पास ऐसे कई विडियो मौजूद हैं, जिसमें ताहिर को हाथ में एक छोटा डंडा लिए अपने छत पर पत्थरबाजों को निर्देश देने का दावा किया जा रहा है। तथ्य ये भी है कि ताहिर की छत से पेट्रोल बम से भरे कई बोतलें, एसिड के दर्जनों पाउच और पत्थरों के ढेर बरामद हुए हैं। यही नहीं इन हथियारों को चलाने के लिए बाकायदा गुलेल भी मिले हैं। ऐसे भी विडियो हैं, जिसमें ताहिर की छत से पेट्रोल बम फेंके जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, खुद ताहिर इन सभी आरोपों को खारिज कर रहा है, लेकिन अभी तक पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा है। वह मीडिया को अपनी कहानी बताने की कोशिश जरूर कर रहा है, लेकिन खुद को कानून के हवाले करने से बच रहा है।

अंकित के शव पर 200 से ज्यादा जख्म के निशान

अंकित के शव पर 200 से ज्यादा जख्म के निशान

आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या का आरोप ताहिर हुसैन पर पहले दिन से ही लग रहा है। बाकी सबूत और विडियो तो बाद में सामने आए हैं, जिसमें दंगे की बहुत बड़ी साजिश और बहुत ही शातिर योजना का खुलासा हो रहा है। लेकिन, अंकित की पोस्टमॉर्टम से जो खुलासा हुआ है, उससे अंदाजा लग रहा है कि दंगाइयों के दिलों में कितनी नफरत भरी हुई है। शुरुआती ऑटोप्सी में ही ये बात सामने आई है कि अंकित के शरीर पर 200 से ज्यादा जख्म के निशान थे, जिसमें धारदार हथियार से किए गए कई गहरे जख्म भी शामिल हैं। इतना ही नहीं पोस्टमॉर्टम में ये बात भी सामने आई है कि उसपर किसी भारी चीज से भी हमला किया गया, जिससे आशंका जताई जा रही है कि उसकी हत्या करने से पहले उसके साथ काफी बर्बरता की गई और फिर उसके पूरी तरह अंग-भंग शरीर को नाले में फेंक दिया गया। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का तो दावा है कि उसके शव पर 400 से ज्यादा जख्म मिले हैं और कम से कम 6 तरह के हथियारों से उसके शरीर के साथ बर्बरता की गई। बता दें कि अंकित के शव को निकालने के बाद पास से ही नाले से दो और शव भी निकाले गए थे। अब पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या उन सबकी हत्या के कोई तार जुड़े तो नहीं हैं। क्योंकि चश्मदीदों ने दावा किया है कि दंगाई अंकित के साथ कुछ और लोगों को घसीटकर ताहिर की बिल्डिंग में ले गए थे।

माता-पिता का छोटे बेटे थे अंकित

माता-पिता का छोटे बेटे थे अंकित

बहरहाल, ताहिर को आम आदमी पार्टी ने हत्या का मुकदमा दर्ज होने के बाद निलंबित कर दिया है। हालांकि, पार्टी के ओखला से विधायक अमानतुल्लाह खान ने अभी भी ताहिर का बचाव किया है। इस बीच अंकित के पिता ने उसके खिलाफ जो हत्या की एफआईआर दर्ज कराई है, उसके अनुसार इस मामले में ताहिर पर आईपीसी की धारा 302, 201, 365 और 34 के तहत केस दर्ज किया गया है। एफआईआर में अंकित के पिता ने अपना दर्द बयां किया है। उन्होंने लिखा है, अंकित उनका छोटा बेटा था। सीएए के खिलाफ भजनपुरा से करावल नगर तक जाने वाली सड़क पर कई दिनों से प्रदर्शन चल रहा था। इस दौरान फायरिंग, पत्थरबाजी और आगजनी की कई घटनाएं सामने आईं। बता दें कि दिल्ली में भड़की सीएए से जुड़े हिंसा में अबतक मरने वालों की संख्या 42 तक पहुंच चुकी है और दंगा-प्रभावित इलाकों से शवों का मिलना लगातार जारी है।

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English summary
Tahir Hussain, a major accused in the Delhi riot, came from the village to work as a laborer, owning property worth more than Rs 17 crore.
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