लोकसभा में हंगामे के चलते आज पेश नहीं हो सका दिल्ली सेवा विधेयक, अब कल बिल लाने की तैयारी
संसद में सोमवार को विपक्षी दलों ने जमकर हंगामा किया जिसके चलते पूरे दिन के लिए लोकसभा स्थगित कर दी गई। वहीं संसद में आज दिल्ली सेवा बिल पेश होना था लेकिन हंगामे के चलते बिल संसद में पेश नहीं हो सकता। हालांकि अब दिल्ली सेवा बिल कल संसद में पेश किया जाएगा।

बता दें जब से केंद्र सरकारी द्वारा दिल्ली सेवा बिल का प्रस्तवा लाया गया है तभी से दिल्ली की सत्ता पर बैठी आम आदमी पार्टी की सरकार इस का विरोध कर रही है।
याद रहे पटना में विपक्षी दलों की हुई पहली बैठक में भी आप प्रमुख और दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल ने इस संसद में इस विधेयक का विरोध संसद में विरोध करने के लिए उनके साथ आने का आह्वान किया था।
दिल्ली सेवा बिल
देश की राजधानी दिल्ली के अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग से संबंधित ये दिल्ली संशोधन बिल 2023 है। जिसके जरिए लोकतांत्रिक संतुलन का प्रावधान है। दरअसल, केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच ये अधिकारों को लेकर ये युद्ध है। दिल्ली विधानसभा और राज्य सरकार को कार्य के लिए एक रुपरेख है जिसमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (GNCTD) अधिनियम, 1991 लागू है जिसमें केंद्र सरकार ने 2021 में संशोधन किया था।
संसोधन में एलजी को दिए थे अधिकार
इसके तहत उपराज्यपाल को कुछ अधिकार दिए थे और दिल्ली सरकार के संचालन और कामकाज को लेकर परिवर्तन किए थे। जिसके तहत दिल्ली सरकार को किसी भी फैसले के लिए दिल्ली के उपराज्यपाल से राय लेना आवश्यक कर दिया था।
इस संसोधन में लिखा गया कि "राज्य की विधानसभा द्वारा बनाए गए किसी भी कानून में सरकार का मतलब दिल्ली एचजी होगा।"
दिल्ली सीएम ने एससी में लगाई थी गुहार
जिस पर दिल्ली सीएम केजरीवाल ने आपत्ति जताई थी और इसके विरोध में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और मांग की थी कि दिल्ली राजधानी की भूमि और पुलिस संबंधी मामलों को छोड़कर बाकी सभी मामलों के लिए दिल्ली में जनता द्वारा चुनी हुई सरकार ही सर्वोच्चता होनी चाहिए।
सुप्रीमकोर्ट ने केजरीवाल के पक्ष में सुनाया था फैसला
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डी वाई चंदूचूड की अध्यक्षता वाली 5 सदस्सीय पीठ ने आदेश दिया था कि विधायी शक्तियों को छोड़कर सेवाओं और प्रशासन से जुड़े सारे अधिकार दिल्ली राज्य सरकार के पास ही होने चाहिए
SC का निर्णय बदलने के लिए लाया गया था ये अध्यादेश
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदलने के लिए मई माह में मोदी सरकार अध्यादेश लाई इसमें राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण (एनसीसीएसए) बनाने की बात की गई ग्रुप-ए के अफसरों के ट्रांसफर और उनपर अनुशासत्मक कार्यवाही करने की जिम्मेदारी दी गई।
दिल्ली सरकार की शक्तियां कम हो गई
केजरीवाल सरकार ने कहा ये अध्यादेश लाने से दिल्ली सरकार की शक्तियां कम हो गई। इसके कारण सिविल सर्विसेज के ऊपर दिल्ली की निर्वाचित कसरकार को अधिकार खत्म हो जाएगा। प्राधिकार के अध्यक्ष तो दिल्ली के मुख्यमंत्री रहेंगे लेकिन वो हमेशा अल्पमत में रहेंगे। प्राधिकर के बाकी दो अधिकारी कभी भी उनके खिलाफ वोट कर सकते हैं।सीए की गैरमौजूदगी में मीटिंग बुला सकते हैं। दिल्ली सीएम लगातार इस अध्यादेश का विरोध कर रहे हैं।












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