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मोदी से खफा हैं, रेड लाइट एरिया के वोटर्स , नोटबंदी में धंधा ठप होने से नाराज

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नई दिल्ली- जीबी रोड (G B Road)। दिल्ली का रेड लाइट एरिया (red light area) देश के किसी भी बदनाम इलाकों से अलग नहीं है। न यहां रहने वाले सेक्स वर्कर्स (sex workers) के हालात अलग हैं। अलबत्ता कोठे तक पहुंचने को लेकर उनकी कहानियां अलग जरूर हो सकती हैं। जीबी रोड (G B Road) दिल्ली के चांदनी चौक (Chandni chowk) लोकसभा क्षेत्र में आता है, लेकिन यहां के कोठों पर एक तरह से पूरा भारत बसता है। कारण यहां पर देश के कई हिस्सों के सेक्स वर्कर्स (sex workers) दो जून की रोटी के लिए इस धंधे से जुड़ी हुई हैं। लेकिन, जिंदगी से अनगिनत थपेड़े खाने के बावजूद भी यहां रहने वाली सेक्स वर्कर्स (sex workers)का लोकतंत्र में विश्वास कम नहीं हुआ है। वे जानती हैं कि हर पांच साल बाद वोट मांगने आने वाले नेता दोबारा लौटकर उनके पास नहीं आने वाले और न ही उनके मुद्दों पर कुछ करने वाले हैं, लेकिन फिर भी उनका एक भी वोट जाया नहीं होता है। वह हर चुनाव में वोट करती हैं। इसके लिए मुश्किल से पैसे जुटा कर रखती हैं। ताकि, दूर-दराज के इलाकों से आने वालों को अगर वोट देने के लिए जाना पड़े, तो वह जरूर जा सकें।

बदतर जिंदगी गुजराने को मजबूर

बदतर जिंदगी गुजराने को मजबूर

सभ्य समाज के सभ्रांत लोगों के बीच 'कोठा' शब्द इतना निगेटिव क्यों माना जाता है, यह जीबी रोड (G B Road) पहुंचते ही महसूस होने लगता है। हर कोठे पर एक ही आलम नजर आता है। ऊंची-ऊचीं बेतरतीब सीढ़ियां और उसपर पान-गुठके के छींटे। यहां सामान्य तौर पर हर 'कोठा' दो फ्लोर का है, जिसमें 15 से 50 महिलाएं एक साथ रहने को मजबूर हैं। हर महिला के लिए क्युबिकल्स (cubicles) बने हुए हैं, जिसमें मुश्किल से एक बेड लगा हुआ है। इनके कमरों में ताजी हवा की कहीं से कोई गुंजाइश नहीं होती। लेकिन, जो यहां एक बार दाखिल हो जाती हैं, उनके लिए अब यहां से निकलकर सामान्य जीवन जीने के बारे में सोचना भी अकल्पनीय है।

चुनाव के बारे में क्या सोचती हैं?

चुनाव के बारे में क्या सोचती हैं?

लेकिन, इतने बदतर हालातों ने भी देश और लोकतंत्र के प्रति इनका हौसला कम नहीं होने दिया है। इनसे बात करने पर पता चलता है कि उन्हें उनके वोट की कीमत मालूम है। ज्यादातर महिलाओं का कहना है कि उनके पास वोटर आईडी कार्ड (voter ID cards) है, लेकिन उन्हें इससे ज्यादा लेना-देना नहीं कि उन्हें किसे वोट करना है। उन्हें तो सिर्फ ये लगता है कि छोटा सा वोटर आईडी कार्ड (voter ID cards) उनके इम्पावरमेंट का सिंबल है। करीब 30 साल की संगीता कहती है कि उसने 9 साल पहले पहली बार वोट डाला था। वह 17 साल से इस धंधे में है। उसके परिवार की कई और महिलाएं आगरा में इसी धंधे से जुड़ी हुई हैं। संगीता कहती है, "हमें किसी पॉलिटिकल पार्टी से कोई उम्मीद नहीं है। 2014 के लोकसभा में मैंने एक पार्टी को वोट दिया था। इस चुनाव में मैं बिना किसी उम्मीद के उनमें से किसी और को वोट दूंगी।" संगीता की बहन शबनम का मानना है कि वोट उसकी पहचान है। वो कहती है, "अगर हम वोट नहीं डालेंगे, तो हम इस देश के नागरिक कैसे पहचाने जाएंगे? हम वो करते हैं, जो हम चाहते हैं। हम पर कोई भी सवाल नहीं उठा सकता।" यहीं के एक कोठे में आरती भी रहती है। वह अभी-अभी सिलीगुड़ी से वोट देकर वापस लौटी है। सिलीगुड़ी पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग लोकसभा क्षेत्र में है, जहां दूसरे चरण में 18 अप्रैल को चुनाव हुआ था। आरती कहती है, "चाहे लोकसभा का हो या विधानसभा का चुनाव हो, मैं हमेशा अपना वोट डालती ही डालती हूं। हम इस देश के नागरिक हैं और अपना यह अधिकार निभाना हमारी जिम्मेदारी है। मेरे लिए इतनी दूर जाने के लिए पैसे जुटाना आसान नहीं होता। लेकिन, मैं पैसे बचाती हूं और वोट के लिए मैं अपने रोज की आमदनी का भी त्याग करती हूं।" आरती अकेले नहीं है, यहां जैसे-जैसे चुनाव होने वाले हैं, देशभर से आई महिलाएं वोट देने के लिए अपने-अपने घर जाने वाली हैं। आरती की तरह ही सरस्वती कहती हैं कि, "सरकारों के पास भले ही हमारे लिए कोई सोच नहीं हो। लेकिन, अगर हमें कुछ नहीं भी मिल रहा है, तो हम कोशिश कर सकते हैं, ताकि मेरे परिवार के सदस्यों के साथ ही दूसरों का ही कुछ भला हो जाए।"

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राजनीतिक पार्टियों के बारे में क्या है नजरिया?

राजनीतिक पार्टियों के बारे में क्या है नजरिया?

दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार और उसके सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल खुश हो सकते हैं कि जीबी रोड की कोठे वाली उनकी सरकार के काम से बहुत संतुष्ट हैं। ऐसी ही एक सेक्स वर्कर रीना का कहना है कि अरविंद केजरीवाल और उनकी सरकार ने बिजली और पानी का बिल कम करने के लिए बहुत कुछ किया है। वे कांग्रेस से भी खफा नहीं है। उसका कहना है, कि "कांग्रेस सरकार के समय में भी अमीर और गरीब प्रेम से जीवन गुजारते थे, लेकिन नोटबंदी ने हमें तबाह कर दिया। "

नोटबंदी ने कैसे ढाया था कहर?

नोटबंदी ने कैसे ढाया था कहर?

लेकिन, जीबी रोड की सेक्स वर्कर्स में नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार से अभी भी नाराजगी गई नहीं है। पूजा नाम की एक सेक्स वर्कर ने कहा है कि,"हमें मोदी सरकार में बहुत भुगतना पड़ा है। नोटबंदी (demonetisation) के बाद करीब तीन महीनों तक तो हम लोग भूखे मर गए। हम एक कस्टमर से 250 से 500 रुपये तक कमाते हैं। उन दिनों में हमारे कस्टमर 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोट लेकर आते थे, लेकिन हम उसे नहीं ले सकते थे, क्योंकि हमारे पास बैंक एकाउंट नहीं है।" गौतलब है कि केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने नोटबंदी (demonetisation) की सफलताओं में भी इस बात को गिनाया था, जिसपर विवाद भी हुआ था। उन्होंने कहा था कि नोटबंदी के चलते प्रॉस्टीट्यूशन और ह्युमैन ट्रैफिकिंग में काफी कमी आई है।

इतना ही तो चाहती हैं सेक्स वर्कर

इतना ही तो चाहती हैं सेक्स वर्कर

जीबी रोड की सेक्स वर्कर्स के पास राजनीतिक दलों के पास रखने के लिए कई मुद्दे हैं। इनमें उनके घरों से कूड़ा उठाना, धंधे को कानूनी मान्यता मिलना, एक उम्र के बाद उन्हें पेंशन दिए जाने और इस धंधे के लायक नहीं रहने पर शेल्टर होम के इंतजाम की मांग शामिल हैं। क्योंकि, जैसे ही इनकी उम्र ढलती है, इनकी जिंदगी और भी मुश्किल हो जाती है। पूजा की फ्रेंड रोमा कहती हैं, "हमारे धंधे को कानूनी मान्यता मिलनी चाहिए। उम्र बीतने के बाद कस्टमर नहीं आते।" रोमा की उम्र लगभग 50 साल की हो चुकी है। वो ये भी कहती हैं, "सरकार को हमारे लिए शेल्टर होम के बारे में सोचना चाहिए या एक कानून बनाना चाहिए, जिसमें रिहैबिलिटेशन, पेंशन स्कीम, बच्चों के भविष्य की सुरक्षा और हमारे काम के घंटे तय हो।" जबकि, पूजा कोठे के बाहर कूड़े के अंबार से परेशान होकर कहती हैं, "बच्चे और बूढ़े बीमार पड़ रहे हैं। कुछ साल पहले तक, रिपब्लिक डे परेड यहां से होकर गुजरता था और सफाई होती रहती थी। लेकिन, वह खत्म हो गया है और इस गंदगी को हटाने के लिए कोई कोशिश नहीं की गई है।" उसने कहा कि राजनीतिक दलों के सामने कई बार यह मुद्दा उठाया भी गया है, लेकिन उन्होंने सिर्फ भरोसा दिया है, काम नहीं किया। हालांकि, इतने के बावजूद उनका हौसला डिगा नहीं है। आशा नाम की एक सेक्स वर्कर कहती है, "हमें नीचा क्यों देखा जाता है? कानूनी अधिकार देकर हमारे काम को सम्मान दिया जाना चाहिए। मैं यह चाहती हूं, लेकिन मैं जानती हूं कि यह एक सपना है।"

जीबी रोड दिल्ली के चांदनी चौक लोकसबा क्षेत्र में आता है, जहां बीजेपी के मौजूदा सांसद और केंद्रीय मंत्री डॉक्टर हर्ष वर्धन, कांग्रेस के जय प्रकाश अग्रवाल और आम आदमी पार्टी के पंकज गुप्ता के बीच मुकाबला है। यहां 12 मई को वोटिंग है।

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English summary
Delhi's red light area: Where the vote is valued even if parties are not
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