Delhi:जंतर-मंतर पर 'भारत जोड़ो आंदोलन' के दौरान भड़काऊ भाषण का वीडियो, क्या बोले अश्विनी उपाध्याय
नई दिल्ली, 9 अगस्त: दिल्ली पुलिस ने सोमवार को जंतर-मंतर पर भड़काऊ नारे वाले वीडियो के संबंध में अज्ञात लोगों के खिपाफ एफआईआर दर्ज की है। यह नारे कथित तौर पर रविवार को एक कार्यक्रम के दौरान लगाए गए थे। जानकारी के मुताबिक 'अंग्रेजों के जमाने के कानून हटाने और एक समान कानून' बनाने की मांग को लेकर एक मार्च सुप्रीम कोर्ट के वकील और दिल्ली भाजपा के पूर्व प्रवक्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से आयोजित किया गया था, जिसमें कथित रूप से सांप्रदायिक नारेबाजी की गई थी। कनॉट पुलिस थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई है।

'भारत जोड़ो आंदोलन' में 'भारत तोड़ने' वाली नारेबाजी ?
दावे के मुताबिक उस वीडियो में कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों की ओर से समुदाय विशेष के खिलाफ नारेबाजी की गई है। माना जा रहा है कि इस वीडियो से दिल्ली पुलिस को आरोपियों की पहचान करने में मदद मिलेगी। बता दें कि 'भारत जोड़ो आंदोलन' के तहत सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय ने इस मार्च की वकालत की। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में जुलाई में मौजूदा आईपीसी के खिलाफ एक पीआईएल दायर की थी, जिसमें अदालत से एक 'अखिल' (भारतीय स्तर पर), 'सख्त' दंड संहिता ड्राफ्ट करने के लिए जुडिशियल पैनल या विशेषज्ञों की बॉडी बनाने का अनुरोध किया था, ताकि कानून का शासन सुनिश्चत हो और समानता की रक्षा की जा सके। उपाध्याय के मुताबिक यह कार्यक्रम 'भारत छोड़ो' के मुद्दे पर आयोजित किया गया था।
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अश्विनी उपाध्याय ने सख्त कार्रवाई की मांग की
हालांकि, टाइम्स नाउ की एक रिपोर्ट के मुताबिक नई दिल्ली जिले के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक उन्होंने कार्यक्रम के लिए आयोजकों के अनुरोध को कोविड-19 की वजह से ठुकरा दिया था और दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी की गाइडलाइंस की जानकारी भी दी थी। बाद में उन्हें पता चला कि अश्विनी उपाध्याय इंडोर वेन्यू की मांग कर रहे थे। वैसे विभाग के मुताबिक वहां पर पुलिस की बंदोबस्त की गई थी और उन्हें लग रहा था कि करीब 50 लोग आएंगे, लेकिन अचानक छोटे-छोटे ग्रुप में काफी संख्या में लोग जुटने लगे। उन्होंने बताया कि प्रदर्शन शांतिपूर्वक ही हो रहा था, लेकिन जब वे वहां से जाने लगे तब नारेबाजी की गई। बाद में अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि उन्होंने दिल्ली पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराकर वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस मामले में दिल्ली पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

कार्यक्रम को पुलिस ने नहीं दी थी इजाजत !
उपाध्याय ने कहा है कि कानून में खामियां हैं, इसलिए सुर्खियों में आने के लिए सांप्रदायिक भाषण दिए जाते हैं। जब उनसे सवाल किया गया कि दिल्ली पुलिस की इजाजत के बिना कार्यक्रम क्यों किया गया तो वे बोले कि डीडीएमए की गाइडलाइंस सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए है। यह ऐतिहासिक कार्यक्रम था, इसलिए अनुमति की आवश्यकता नहीं थी। इस बीच इंडियन एक्सप्रेस ने 'भारत जोड़ो आंदोलन' की मीडिया-इंचार्ज शिप्रा श्रीवास्तव के हवाले से कहा है कि यह प्रदर्शन औपनिवेशिक काल के कानूनों के खिलाफ था, जो कि अंग्रेज भारतीयों को दबाने के लिए करते थे और वह आज भी मौजूद हैं। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि 'उन्हें किसी भी भड़काऊ नारेबाजी की जानकारी नहीं है।' उनके मुताबिक वहां 5,000 लोग जुटे थे और अगर कुछ बाहरी लोग कुछ गलत बातें कह रहे थे, तब उन्हें हम अपना सहयोगी नहीं मान सकते। (तस्वीरें-अश्विनी उपाध्याय के ट्विटर हैंडल से)












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