Delhi ordinance: 2024 से पहले विपक्ष-मोदी सरकार में आर-पार, राज्यसभा में कौन किधर है? जानिए

दिल्ली में ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर केंद्र सरकार जो अध्यादेश लेकर आई है, वह विपक्षी एकता के लिए लिटमस टेस्ट की तरह है। इसको लेकर राज्यसभा में सरकार और विपक्ष में जबर्दस्त लड़ाई होने वाली है।

Delhi ordinance

दिल्ली में नौकरशाही पर दिल्ली सरकार को नियंत्रण देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के लिए केंद्र सरकार जो अध्यादेश लेकर आई है, वह 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले का सेमीफाइनल लगने लगा है। बीजेपी-विरोधी विपक्ष ने इस मुद्दे पर मोदी सरकार को राज्यसभा में पटखनी देने के लिए जबर्दस्त मोर्चाबंदी शुरू की है।

संसद के दोनों सदनों से पास कराना होगा विधेयक
केंद्र सरकार दिल्ली में सरकारी बाबुओं की ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए उपराज्यपाल की शक्ति कायम रखने वाला जो अध्यादेश लेकर आई हैं, उसे संसद के दोनों सदनों से 6 महीने के अंदर पास कराना आवश्यक है। लोकसभा में बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए के पास पर्याप्त बहुमत है।

केजरीवाल के लिए विपक्ष को एकजुट करने में जुटे नीतीश
लेकिन, राज्यसभा में एनडीए के पास अपने दम पर इस विधेयक को पास कराने लायक सांसदों के संख्या बल का अभाव है। विपक्ष को इसी स्थिति से ऊर्जा मिल रही है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के लिए विपक्षी दलों से पैरवी करने के काम में खुद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी जुटे हुए हैं।

राज्यसभा में सरकार बहुमत से थोड़ी दूर
पहले राज्यसभा का मौजूदा गणित जान लेते हैं। ऊपरी सदन में अभी एनडीए के पास कुल 110 सांसद हैं। दो ऐसी सीटें खाली हैं, जिसपर सरकार दो सदस्यों को नामित कर सकती है। फिर भी 238 सदस्यों वाले सदन में उसे 8 सहयोगी सांसदों की आवश्यकता पड़ेगी।

बीजेडी ने कई मौकों पर दिया है मोदी सरकार का साथ
जहां तक ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक का सवाल है तो उनकी पार्टी कई महत्वपूर्ण मौकों पर राज्यसभा में सरकार का साथ देती आई है। खुद सीएम पटनायक हाल ही में विपक्षी एकता से फिलहाल अपने को अलग रख चुके हैं और एक सार्वजनिक कार्यक्रम में पीएम मोदी के लिए 2024 के बाद भी उनके पद पर बने रहने की ओर इशारा कर चुके हैं।

नीतीश को है नवीन पटनायक से उम्मीद
लेकिन, तथ्य यह है कि लोकसभा चुनाव के साथ ही ओडिशा में विधानसभा के चुनाव भी होने हैं और वहां बीजेडी का मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी से ही मुकाबला है। यही वजह है कि नवीन बाबू को दिल्ली सरकार के मुद्दे पर मना लेने की उम्मीदें नीतीश ने अभी भी छोड़ी नहीं हैं।

बीजेपी को नवीन-जगन दोनों से उम्मीद
हालांकि, बीजेपी ने राज्यसभा में बीजेडी ही नहीं, आंध्र प्रदेश के सीएम जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस से भी समर्थन मिलने की उम्मीदें लगा रखी हैं। क्योंकि, कई मौकों पर उनकी पार्टी राज्यसभा में सरकार का साथ दे भी चुकी है।

पार्टी के प्रमुख प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी के मुताबिक, 'एनडीए के पास दोनों सदनों में संख्या है और हमें उम्मीद है कि दूसरी पार्टियां भी बिल को पास कराने के समर्थन में आगे आएंगी।'

ममता से भी मिलेंगे केजरीवाल
उधर आम आदमी पार्टी नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री भी इस मसले को बीजेपी बनाम विपक्ष बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। इसमें उन्हें नीतीश और बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव का साथ तो मिल ही रहा है, मंगलवार को वह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी मिलने वाले हैं।

कांग्रेस का स्टैंड होगा दिलचस्प
लेकिन, इस मामले में कांग्रेस क्या स्टैंड लेती है, यह देखना सबसे अधिक दिलचस्प रहने वाला है। वैसे तो सार्वजनिक तौर पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच ज्यादातर मुद्दों पर खटास नजर आती है। कर्नाटक के सीएम सिद्दारमैया की ताजपोशी में पार्टी ने जिन गैर-बीजेपी मुख्यमंत्रियों को नहीं बुलाया, उनमें अरविंद केजरीवाल भी शामिल हैं।

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    लेकिन, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के रिश्तों के बीच हमेशा से एक अलग तस्वीर भी नजर आती रही है। एक तो जिस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को झटका देकर केजरीवाल सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया है, अदालत में उसकी पैरवी कांग्रेस के नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी ही कर रहे थे।

    इसी तरह से जब दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी हुई तो उनके प्रति सहानुभूति दिखाते हुए विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिश में खुद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ही आगे नजर आ रहे थे।

    सत्ता के सेमीफाइनल में इन्हीं का चलेगा जादू
    उधर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच सत्ता के इस सेमीफाइनल में एक किरदार बीएसपी सुप्रीमो मायावती का भी है। इस पूरे मामले में उनका अबतक का स्टैंड दिल्ली सरकार और आम आदमी पार्टी को मायूस कर सकता है। लेकिन, असली खेल जगन मोहन रेड्डी और नवीन पटनायक के हाथों में ही होगा और उनका साथ जिन्हें मिल गया, सत्ता के सेमीफाइनल में उसकी जीत लगभग पक्की मानी जा सकती है।

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