'सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर रोक कानूनी प्रक्रिया का सरासर दुरुपयोग', दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र का जवाब
नई दिल्ली, मई 11: कोरोना की दूसरी लहर के बाद देश का हेल्थ सिस्टम बिगड़ा गया है। लगातार बढ़ते मरीजों के बाद देश में अस्पतालों में बेड, दवाओं और ऑक्सीजन की भारी किल्लत का सामना करना पड़ा रहा है। ऐसे में देश में चल रहे सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर रोक लगाने की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है, जिस पर आज मंगलवार (11 मई) को कोर्ट में सुनवाई की गई। कोर्ट में आज केंद्र सरकार की तरफ से याचिका पर अपना जवाब दाखिल किया गया है।

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दरअसल, मोदी सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट सेंट्रल विस्टा पर दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर अंतरिम रोक लगाने का आग्रह किया गया है। आज सुनवाई के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने अगली तारीख 12 मई यानी कल सुनवाई तय की है। कोर्ट ने केंद्र सरकार के जवाब को रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश दिया है।
केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय से याचिका खारिज करने का आग्रह किया है। केंद्र ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट्स में चल रहे काम का बचाव करते हुए कहा कि परियोजना के निर्माण को रोकने की मांग करने वाली याचिका कानून की प्रक्रिया का सरासर दुरुपयोग है और प्रोजेक्ट को रोकरने का प्रयास किया जा रहा है। केंद्र ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि 19.04.2021 के डीडीएमए आदेश के अनुसार कर्फ्यू के दौरान निर्माण गतिविधियों की अनुमति है, जहां मजदूर साइट पर रहते हैं।
आपको बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर रोक लगाने वाली याचिका पर फिलहाल दखल देने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दिल्ली हाई कोर्ट से जल्द सुनवाई का अनुरोध करने के लिए कहा था।












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