Manish Sisodia Delhi HC का दरवाजा खटखटाने पहुंचे, आबकारी नीति मामले में जमानत की अपील पर सुनवाई कल
आबकारी नीति मामले में मनीष सिसोदिया को कब्जे में लेकर सीबीआई और ईडी जांच कर रही हैं। जमानत की गुहार लगाते हुए दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जानिए पूरा मामला

Manish Sisodia Delhi HC में जमानत की गुहार लगाने पहुंचे हैं। बता दें कि सिसोदिया करीब 40 दिनों से केंद्रीय एजेंसियों की गिरफ्त में हैं। गिरफ्तारी के बाद सिसोदिया निचली अदालत में कई बार अपील कर चुके हैं, लेकिन उन्हें बेल नहीं मिली है।
निचली अदालत से बेल नहीं मिली, अब HC से उम्मीदें
दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया दिल्ली आबकारी नीति घोटाले के सिलसिले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की गिरफ्त में हैं। निचली अदालत इस मामले में उन्हें जमानत देने से इनकार कर चुकी है।
हाईकोर्ट में सिसोदिया की अपील पर सुनवाई
निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए सिसोदिया ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। मनीष सिसोदिया की अपील पर कल यानी गुरुवार 6 अप्रैल को सुनवाई होनी है।
सीबीआई जांच कर रही है
बता दें कि जमानत के लिए दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे सिसोदिया की याचिका जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा की बेंच में सुनी जाएगी। सिसोदिया आबकारी नीति बनाने और लागू करने में कथित अनियमितताओं के आरोप का सामना कर रहे हैं। सीबीआई इसकी जांच कर रही है।
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CBI की दलील- सिसोदिया की रिहाई से जांच बाधित होगी
पिछले हफ्ते ट्रायल कोर्ट ने सिसोदिया की जमानत याचिका खारिज की थी। कोर्ट ने कहा, जांच के इस चरण में अदालत आरोपी को जमानत पर छोड़ने की इच्छुक नहीं है। रिहाई से मामले पर प्रतिकूल प्रभाव होगा। जांच गंभीर रूप से बाधित होगी।
26 फरवरी को गिरफ्तारी, अभी जांच पूरी नहीं हुई है
विशेष न्यायाधीश एमके नागपाल ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा, सिसोदिया पर आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। मामले के इस चरण में, आरोपी जमानत पर रिहा होने के लायक नहीं हैं। 26 फरवरी को ही गिरफ्तारी हुई है। उनकी भूमिका की जांच पूरी नहीं हुई है।
आपराधिक साजिश में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका
सीबीआई का आरोप है कि सिसोदिया ने आपराधिक साजिश में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। साजिश का मकसद हासिल करने के लिए सिसोदिया नीति के निर्माण और कार्यान्वयन से गहराई से जुड़े थे।
90-100 करोड़ रुपये घूस
आरोप है कि लगभग 90-100 करोड़ रुपये की अग्रिम रिश्वत का भुगतान सिसोदिया और दिल्ली सरकार में उनके अन्य सहयोगियों के लिए किया गया। इसमें 20-30 करोड़ रुपये सह-आरोपी विजय नायर, अभिषेक बोइनपल्ली को दिए गए।
रिहाई की गुहार लगाते सिसोदिया क्या बोले
सिसोदिया ने ट्रायल कोर्ट में अपनी जमानत याचिका में कहा था कि उन्हें हिरासत में रखने का कोई सार्थक उद्देश्य पूरा नहीं होगा। मामले में सभी बरामदगी पहले ही की जा चुकी है। सीबीआई ने बुलाया तो वह जांच में भी शामिल हुए।
सिसोदिया सबूत नष्ट कर सकते हैं
CBI के अनुसार, सिसोदिया ने कहा कि उन्होंने फोन नष्ट कर दिए क्योंकि वह अपग्रेड करना चाहते थे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। उनके भागने का खतरा तो नहीं लेकिन सबूत नष्ट हो जाएगा। इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सवालों का जवाब नहीं, आपत्तिजनक साक्ष्य मिले
ट्रायल कोर्ट ने पाया कि आरोपी पहले दो बार CBI जांच में शामिल हुए, लेकिन पूछताछ के दौरान अधिकांश सवालों के संतोषजनक जवाब देने में विफल रहे। जांच के दौरान कथित रूप से उनके खिलाफ आपत्तिजनक साक्ष्य भी सामने आए।












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