OPINION: AAP के लिए निर्णायक साबित होंगे पूर्वांचली वोटर्स ?
OPINION: दस दिन बाद राजधानी में चुनाव प्रचार का शोर थम जाएगा। इसी बीच पूर्वांचलियों का समर्थन प्राप्त करने के लिए आम आदमी पार्टी (AAP) और BJP के बीच होड़ लगी है। दोनों दल इनके लिए अपने आप को हितैषी बताने का प्रयास कर रही हैं। तो कांग्रेस ने भी इन मतदाताओं को लुभाने के लिए बड़ा दांव चल दिया है। कांग्रेस ने कहा है कि दिल्ली में उसकी सरकार बनने पर पूर्वांचल के लोगों के लिए अलग मंत्रालय बनाया जाएगा। बात टिकट वितरण की करें, तो आम आदमी पार्टी ने इन पार्टियों के मुकाबले अधिक पूर्वांचलियों को टिकट दिया।
आम आदमी पार्टी ने 11 पूर्वांचलियों को लोगों को चुनाव मैदान में उतारा है। पार्टी नेता भी इसे लेकर भाजपा को घेर रहे हैं। दिल्ली के लगभग सभी विधानसभा क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश, बिहार व झारखंड से संबंधित मतदाता हैं, लेकिन 27 सीटों पर ये निर्णायक स्थिति में हैं। इन्हें अपने साथ जोड़ने को लेकर छठ पूजा के समय से ही राजनीतिक पार्टियों के बीच खूब बयानबाजी हो रही है।

दिल्ली में बिहार और उत्तर प्रदेश से आने वाले मतदाताओं की संख्या करीब 20 प्रतिशत है, जो किसी अन्य कम्युनिटी के मुकाबले सबसे अधिक है। करीब 29 सीटों पर ये मतदाता जीत-हार में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। दिल्ली की उत्तम नगर, किराड़ी, बुरारी, संगम विहार, त्रिलोकपुरी और समयपुर बादली जैसी सीटों पर पूर्वांचली मतदाता ही एक्स फैक्टर हैं।
2013 में दिल्ली के पूर्वांचली वोटर्स आम आदमी पार्टी की तरफ आ गए। इसके बाद तो इन मतदाताओं ने पूरा गेम ही पलट कर रख दिया। पिछले दो विधानसभा चुनावों में इन सीटों पर आम आदमी पार्टी ने ही जीत हासिल की। आप ने पूर्वांचली समाज को इसका इनाम भी दिया और इस समाज से आने वाले गोपाल राय को मंत्री बनाया। इस बार भी आप ने पूर्वांचल से आने वाले संजीव झा (बुरारी), अनिल झा (किरारी), दिनेश मोहनिया (संगम विहार), अवध ओझा (पटपड़गंज) और गोपाल राय (बाबरपुर) को मैदान में उतारा है। प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा ने अपने बिहार और यूपी के बड़े नेताओं को ग्राउंड जीरो पर लगा दिया है। ये नेता गली-गली घूमकर पार्टी के पक्ष में माहौल बना रहे है।
आम आदमी पार्टी पूर्वांचली वोटर को अपने पक्ष में करने के लिए अवैध कॉलोनियों को वैध करने का मामला उठा रही है। आप का कहना है कि पिछले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने कच्ची कॉलोनियों को वैध करने की घोषणा की थी, लेकिन पार्टी अब अपने वादे से पीछे हट रही है। इसके साथ ही राज्यसभा में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा द्वारा दिए गए बयान को भी मुद्दा बनाने में लगी है। पार्टी ने इसके खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन भी किया था।
2013 के पूर्वांचली वोटर कांग्रेस से आप की तरफ सिफ्ट हो गए जिस वजह से दिल्ली में सत्ता परिवर्तन हुआ। सवाल है कि क्या 2 टर्म से दिल्ली की सत्ता में आप को जिताने वाले पूर्वांचली वोटर इस बार भी आम आदमी पार्टी के निर्णायक साबित होंगे?












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