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राफेल सौदे से 6 महीने पहले रक्षा खरीद नीति बदल दी गई- CAG

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नई दिल्ली- भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की ताजा रिपोर्ट से राफेल खरीद सौदे को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है। इसके मुताबिक भारत सरकार ने इस फाइटर जेट की खरीद के लिए सौदा तय करने से पहले अपनी रक्षा खरीद नीति में बदलाव किए थे। इसके तहत सौदा बेचने वाली कंपनी को उस समय अपने ऑफसेट पार्टनर के बारे में जानकारी देने की जरूरत नहीं थी। गौरतलब है कि फ्रांस के साथ राफेल समझौता सितंबर, 2016 में हुआ था और उससे करीब एक साल पहले ही रक्षा खरीद नीति में बदलाव किया गया था, जो समझौते से कुछ महीने पहले ही प्रभावी हुआ था।

राफेल सौदे से पहले रक्षा खरीद नीति बदली गई- सीएजी

राफेल सौदे से पहले रक्षा खरीद नीति बदली गई- सीएजी

भारत और फ्रांस के बीच 36 राफेल जेट खरीदने को लेकर 2016 के सितंबर में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। लेकिन, उससे 6 महीने पहले ही अप्रैल, 2016 से बदली हुई रक्षा खरीद नीति लागू हो चुकी थी। पिछले हफ्ते सीएजी ने संसद में जो साल 2019 के लिए रिपोर्ट नंबर-20 पेश की है, उसके मुताबिक सरकार ने 2015 में ऑफसेट नीति में बदलाव किया था, वह 1 अप्रैल, 2016 से प्रभावी हुआ। इसके चलते राफेल फाइटर जेट के सप्लायर को समझौते के वक्त (सितंबर,2016 में) किसी ऑफसेट पार्टनर की घोषणा करने से छुटकारा मिल चुका था। सीएजी ने राफेल डील के बारे में यह भी कहा है कि ऑफसेट दायित्वों को पूरा करने की प्रक्रिया सितंबर, 2019 से शुरू होनी थी। इस हिसाब से पहला वार्षिक वादा मौजूदा महीने में जरूर पूरा हो जाना चाहिए और रक्षा मंत्रालय को इसका पूरा ब्योरा वेंडर से हासिल करना चाहिए।

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    रक्षा खरीद नीति, 2013 में क्या है?

    रक्षा खरीद नीति, 2013 में क्या है?

    रक्षा खरीद नीति, 2013 के मुताबिक टेक्निकल ऑफसेट प्रस्तावों की छानबीन टेक्निकल ऑफसेट इवैलुएशन कमिटी (TOEC) करती है, जो ऑफसेट गाइडलाइंस के तहत विदेशी वेंडरों को ऑफसेट प्रस्तावों में बदलावों के लिए सुझाव दे सकती है। इसमें यह साफ किया गया है कि टीओईसी से उम्मीद है कि यह अपने गठन के 4-8 हफ्तों के भीतर ही अपनी रिपोर्ट दे देगी। जबकि, 2013 की नीति में कॉमर्शियल इवैलुएशन के बारे में कहा गया है कि कॉमर्शियल ऑफसेट में इससे जुड़ी हर चीजों- कीमतें, उसका पूरा ब्योरा, चरण, भारतीय ऑफसेट पार्टनर और बैंकों की पूरी जानकारी रहेगी। यही नहीं जब टीओईसी की रिपोर्ट डायरेक्टर जनरल (अधिग्रहण) द्वारा मंजूर कर ली जाएगी, तभी कॉमर्शियल ऑफसेट ऑफर को मेन कॉमर्शियल ऑफर के साथ खोला जाएगा।

    वेंडर को ऑफसेट को लेकर दी गई राहत

    वेंडर को ऑफसेट को लेकर दी गई राहत

    सीएजी के मुताबिक 2015 में जो नीति बदली गई और जो 2016 में प्रभाव में आई उसमें कॉमर्शियल इवैलुएशन वाले हिस्से में कोई बदलाव नहीं हुआ। लेकिन, डिफेंस ऑफसेट गाइडलाइंस के पारा 8.2 में बदलाव करके कहा गया कि अगर वेंडर टेक्निकल ऑफसेट इवैलुएशन कमिटी को उस वक्त सारी डिटेल ना दे पाए तो वह ऑफसेट के लिए क्रेडिट मांगते समय या अपने ऑफसेट जिम्मेदारियों को पूरा करने से एक महीने पहले वही डिटेल डिफेंस ऑफसेट मैनेजमेंट विंग को उपलब्ध करवा सकता है।

    सीएजी की पड़ताल

    सीएजी की पड़ताल

    राफेल डील के बारे में सीएजी की रिपोर्ट कहती है कि 36 राफेल लड़ाकू विमानों के लिए भारत और फ्रांस सरकारों के बीच 23 सितंबर, 2016 को इंटर-गवर्मेंटल एग्रीमेंट (आईजीए) पर हस्ताक्षर हुए और ऑफसेट जिम्मेदारियों को लेकर सप्लायर दसॉल्ट एविएशन और एमबीडीए के बीच हस्ताक्षर किए गए। सीएजी का कहना है कि आईजीए की धारा 12 में कहा गया है कि फ्रांस सप्लाई प्रोटोकॉल के मूल्य के 50 फीसदी ऑफसेट के जरिए मेक इन इंडिया इनिशिएटिव को बढ़ावा देगा। सीएजी ने कहा है कि हालांकि, ऑफसेट पॉलिसी के लिए रक्षा खरीद नीति बदल दी गई, लेकिन टेक्निकल और कॉमर्शियल ऑफसेट ऑफर को अगस्त, 2015 में नहीं बदला गया और ना ही मॉडल ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट में ही बदलाव किया गया, जिसके तहत समझौते की तारीख के 90 दिनों के भीतर डिफेंस ऑफसेट मैनेजमेंट विंग को ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट उपलब्ध करवाने की आवश्यकता है।

    रक्षा मंत्रालय के इस जवाब से सीएजी असंतुष्ट

    रक्षा मंत्रालय के इस जवाब से सीएजी असंतुष्ट

    सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस अस्पष्टता की वजह से मंत्रालय को क्या डिटेल उपलब्ध करवाई जानी है, इसको लेकर वेंडर के दिमाग में अनिश्चितता पैदा हुई। जब सीएजी ने इसको लेकर रक्षा मंत्रालय से जानकारी मांगी तो उसने मई और अक्टूब,2019 में जवाब दिया कि इसके लिए अधिकतर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ) उपलब्ध था, जिसमें वेंडर के लिए सारी जानकारी उपलब्ध थी, इसलिए फॉरमेट में किसी तरह की बदलाव की जरूरत नहीं समझी गई। सीएजी रक्षा मंत्रालय के इस जवाब से सहमत नहीं हुआ और कहा कि FAQ ऑफसेट गाइडवाइंस के ब्योरे की जगह नहीं ले सकता।

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    English summary
    Defense procurement policy changed 6 months before Rafale deal - CAG
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