भारत का रक्षा सेक्टर होगा और मजबूत, 70 हजार करोड़ के हथियारों की खरीद को मंजूरी
चीन और पाकिस्तान के साथ भारत का विवाद जारी है। इस बीच रक्षा मंत्रालय ने 70 हजार करोड़ के हथियार खरीदने को मंजूरी दे दी है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक हुई। जिसमें देश के हालात के हिसाब से रक्षा उपकरणों की खरीद को लेकर चर्चा की गई। इस बैठक में भारतीय रक्षा बलों के लिए विभिन्न हथियार प्रणालियों की खरीद के लिए 70,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। माना जा रहा कि इसके बाद देश की तीनों सेनाओं और ज्यादा मजबूत हो जाएंगी।
मामले में एक रक्षा अधिकारी ने बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में भारतीय नौसेना के लिए 60 मेड इन इंडिया यूटिलिटी हेलीकॉप्टर मरीन, ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, भारतीय सेना के लिए 307 ATAGS हॉवित्जर तोज और 9 एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर खरीदने के प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई है। इस सौदे में भारतीय नौसेना के लिए एचएएल से 60 यूएच समुद्री हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए 32,000 करोड़ रुपये का मेगा ऑर्डर शामिल है।
रक्षा अधिकारी के मुताबिक डीएसी ने जिस ATAGS की खरीद को मंजूरी दी है। वो पूरी तरह से स्वदेश निर्मित है। इस 155mm/52 कैलिबर ATAGS को DRDO द्वारा भारत फोर्ज और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के साथ मिलकर विकसित किया गया है। एक अन्य सूत्र के मुताबिक इस तोप को उन इलाकों में तैनात किया जाएगा, जो काफी ज्यादा ऊंचाई पर हैं। इसकी तैनाती चीन के साथ पाकिस्तान की सीमा पर भी की जाएगी। साल 2021 में 15 हजार फीट की ऊंचाई वाले इलाके में इस तोप की सफलता पूर्वक टेस्टिंग की गई थी। ये भारत में बनेंगे, ऐसे में इनको जरूरत के हिसाब से मॉडिफाई भी किया जा सकेगा।
नेवी के लिए 56 हजार करोड़
मामले में रक्षा मंत्रालय ने कहा कि नौसेना के लिए ब्रह्मोस मिसाइल, शक्ति ईडब्ल्यू सिस्टम और यूटिलिटी हेलीकॉप्टर की खरीद को मंजूरी दी गई है। जिसकी कीमत 56 हजार करोड़ रुपये है। वहीं भारतीय वायु सेना के लिए लॉन्ग रेंज स्टैंड-ऑफ वेपन को मिली मंजूरी। जिसे सुखोई 30 में लगाया जाना है।












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