लोकसभा में जीएसटी पर बहस हुई शुरू, जानिए 10 खास बातें

आज सीजीएसटी, आईजीएसटी, यूनियन टेरिटरी जीएसटी और मुआवजा कानून पर लोकसभा में करीब 6 घंटे तक बहस होगी। आपको बता दें कि अरुण जेटली ने ये बिल सोमवार को लोकसभा में पेश किए थे।

नई दिल्ली। जीएसटी बिल पर आज लोकसभा में बहस हो रही है। इससे पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली मंगलवार को ही मोदी सरकार के सांसदों को इस बिल के बारे में अच्छे से बता चुके हैं। साथ ही उन्होंने सांसदों को यह भी समझाया कि इस बिल का सरकार की आय और देश की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा। आज सीजीएसटी, आईजीएसटी, यूनियन टेरिटरी जीएसटी और मुआवजा कानून पर लोकसभा में करीब 6 घंटे तक बहस होगी। आपको बता दें कि अरुण जेटली ने ये बिल सोमवार को लोकसभा में पेश किए थे। ये भी पढ़ें- अब तक का सबसे धांसू ऑफर, डाटाविंड कंपनी दे सकती है सिर्फ 17 रुपए में महीने भर इंटरनेट

अरुण जेटली ने सांसदों से कहा है कि यह एक राष्ट्र, एक टैक्स जीएसटी 1 जुलाई से लागू हो जाएगा और जीएसटी में जाने की प्रक्रिया 15 सितंबर तक पूरी कर ली जाएगी। यह माना जा रहा है कि जीएसटी के लागू होने के बाद सरकार की आय में तो बढ़ोत्तरी होगी ही, साथ ही देश की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ भी 2 फीसदी तक बढ़ सकती है। आइए जानते हैं जीएसटी बिल में अब तक क्या क्या हो चुका है। ये भी पढ़ें- RBI ने दी मंजूरी, नेपाल में प्रति व्यक्ति 4500 रुपए तक बदले जा सकेंगे 500-1000 के पुराने नोट

विदेशी पर्यटकों को टैक्स रिफंड

विदेशी पर्यटकों को टैक्स रिफंड

1- इंटीग्रेटेड जीएसटी में एक नया क्लॉज जोड़ा गया है, जिसके तहत विदेशी पर्यटकों द्वारा खरीदी गई किसी भी चीज पर लगने वाले टैक्स को उन्हें वापस किया जाएगा। टैक्स रिफंड की व्यवस्था यूके में रिफंड किए जाने वाले वैट की तर्ज पर की जा रही है।

2- सेंट्रल जीएसटी, इंटीग्रेटेड जीएसटी, यूनियन टेरिटरीज जीएसटी और मुआवजा कानून को केंद्रीय मंत्रिमंडल की तरफ से इसी महीने मंजूरी दी जा चुकी है। अगर इन सभी बिलों को संसद में मंजूरी मिल जाती है तो इसके बाद राज्य जीएसटी बिल राज्य विधानसभाओं में पेश किए जाएंगे।

जल्द से जल्द जीएसटी बिल पारित कराना चाहती है सरकार

जल्द से जल्द जीएसटी बिल पारित कराना चाहती है सरकार

3- मंत्रिमंडल की तरफ से मंजूरी दिए जाने से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली और राज्यों के वित्त मंत्रियों की सदस्यता वाली शक्तिशाली जीएसटी काउंसिल पांच कानूनों को मंजूरी दे चुकी है। इससे राज्यों और केंद्र के बीच के मतभेद दूर हो चुके हैं।

4- मोदी सरकार चाहती है कि जल्द से जल्द इन सभी बिलों को लोकसभा में पारित करवा लिया जाए, ताकि बिलों को राज्यसभा में ले जाया जा सके। इसके बाद राज्यसभा से मिले सुझावों में दोबारा से लोकसभा में पेश किया जा सके। इस तरह से सरकार को पर्याप्त समय मिल सकेगा।

12 अप्रैल तक प्रकिया पूरी करना चाहती है सरकार

12 अप्रैल तक प्रकिया पूरी करना चाहती है सरकार

5- ये सभी मनी बिल हैं यानी धन संबंधी विधेयक हैं। इसका अर्थ है कि राज्य सभा के सुझाव लोकसभा के लिए बाध्यकारी नहीं हैं। लोकसभा चाहे तो उन्हें मंजूर कर सकती है या फिर खारिज कर सकती है। सरकार इस मुद्दे पर राज्यसभा में अच्छे से बहस करना चाहती है, ताकि विपक्ष ये न कह सके कि उच्च सदन में सरकार अल्पमत में होने के कारण सरकार जानबूझकर उच्च सदन की अनदेखी कर रही है।

6- मोदी सरकार की कोशिश है कि यह प्रक्रिया 12 अप्रैल तक पूरी हो जाए, क्योंकि उसके बाद बजट सत्र खत्म हो जाएगा। जीएसटी इससे पहले भी 1 अप्रैल की डेडलाइन पर लागू नहीं हो सका है और अब 1 जुलाई की दूसरी डेडलाइन है, जिस पर सरकार इसे लागू करने की पूरी कोशिश कर रही है।

जीएसटी के तहत होंगे चार टैक्स स्लैब

जीएसटी के तहत होंगे चार टैक्स स्लैब

7- जीएसटी के तहत चार टैक्स स्लैब होंगे- 5 फीसदी, 12 फीसदी, 18 फीसदी और 28 फीसदी। इसके अलावा पहले 5 साल तक कारों, शीतल पेयों और तंबाकू से बने उत्पादों जैसी चीजों पर कुछ अन्य कर भी लगेंगे, ताकि राज्यों के नुकसान की भरपाई की जा सके।

8- मुआवजा कानून को कुछ इस तरह से तैयार किया गया है कि जीएसटी के लागू हो जाने के बाद राज्यों के राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए मोदी सरकार की तरफ से किए गए वादों को पूरा किया जा सके।

बहुत से कर मिल जाएंगे जीएसटी में

बहुत से कर मिल जाएंगे जीएसटी में

9- जीएसटी के आने के बाद राज्य और केंद्र सरकारों की तरफ से लगाए जाने वाले बहुत से टैक्स इसी में मिल जाएंगे, इसलिए केंद्रीय जीएसटी और राज्य जीएसटी में यह साफ किया गया है कि इस नई टैक्स प्रणाली के तहत राज्यों और केंद्र के बीच राजस्व का बंटवारा किस तरह से किया जाएगा। एसजीएसटी में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि राज्यवार किस तरह से छूट दी जाएगी।

10- इंटीग्रेटेड जीएसटी राज्यों के बीच सामान आने जाने वाले टैक्स के बारे में बताएगा, जबकि यूनियन टेरिटरी जीएसटी केंद्र शासित प्रदेशों के लिए है।

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