Cyclone Dana: चक्रवात दाना के कहर के बीच ओडिशा सेफ कैसे, Bhitarkanika Park को लेकर बड़ा दावा क्यों?
Cyclone Dana: चक्रवात दाना का प्रभाव खत्म हो चुका है। पश्चिम बंगाल में चक्रवात के चलते भारी तबाही देखी गई। हालांकि विनाशकारी चक्रवाती तूफान ने ओडिशा तट पर कोई भारी नुकसान नहीं हुआ। इस बीच रिपोर्ट के मुताबिक, चक्रवात के चलते ओडिशा में भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान और धमारा के बीच हबलीखाटी के पास भारी भूस्खलन देखा गया। एक रिपोर्ट मैंग्रोव बेल्ट ने गुरुवार देर रात कहा कि चक्रवात के चलते हवा की गति 110 किमी प्रति घंटा दर्ज की गई। इस बीच भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान ने एक प्राकृतिक ढाल के रूप में काम किया।
ओडिशा तट से टकराए विनाशकारी चक्रवात दाना से राज्य को भारी नुकसान क्यों नहीं हुआ, इसकी एक खास वजह सामने आई है। सवाल उठ रहे हैं कि ओडिशा को किसने या किसने बचाया? ऐसे में एक बार फिर, क्षेत्र की मैंग्रोव बेल्ट की चर्चा है, जिसमें भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान आता है।

इस हफ्ते गुरुवार देर रात 110 किमी हवा की गति से राज्य के समुद्र तट को पार कर गया। चक्रवात दाना ने ओडिशा में भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान और धमारा के बीच हबलीखाटी के पास भारी भूस्खल हुआ। स्थानीय लोगों के मुताबिक, क्षेत्र में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, कोई विशेष नुकसान भी नहीं हुआ।
एक इंटरव्यू में ओडिशा पर्यावरण सोसायटी की सचिव डॉ जया कृष्ण पाणिग्रही ओडिशा में चक्रवात के बेअसर रहने की वजह बताई। पाणिग्रही ने कहा, "भितरकनिका के मैंग्रोव ने ओडिशा को बचाया है। दाना दो चक्रवातों के टकराव से उत्पन्न हुआ, जो बहुत विनाशकारी था। चक्रवात के चलते जंगल में भूस्खलन हुआ। मैंग्रोव ने हवा की गति को काफी हद तक कम कर दिया और तूफान प्रभावी नहीं हो सका क्योंकि मैंग्रोव की जड़ों ने इसके वेग को रोक दिया।
एक सुपर चक्रवात में भी भितरकनिका बना ढाल
पुराने सुपर चक्रवात ने ओडिशा में कहर ढा दिया था। ये साइक्रोन 1999 में जगतसिंहपुर में एक आया था। इसमें 1,000 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। उस समय में भितरकनिया उद्यान के समीप केंद्रपाड़ा में मैंग्रोव के अवरोध के चलते बहुत कम मौतें हुईं थी।












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