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Cyber cheating: देश में कई छोटे शहर क्यों बन रहे हैं नया 'जामताड़ा', देखिए पूरी लिस्ट

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नई दिल्ली- इंस्टेंट जॉब, डिजिटल पेमेंट में इजाफा और आसानी से पैसा कमाने के चक्कर में देश के छोटे शहरों के युवा बहुत ही आसानी से साइबर क्रिमिनल के हत्थे चढ़ते जा रहे हैं। इन युवाओं में से कई पीड़ित भी हो रहे हैं और कई इस गोरखधंधे का हिस्सा भी बन रहे हैं। अभी हाल तक झारखंड का एक छोटा सा शहर जामताड़ा मोबाइल फोन या इंटरनेट पर होने वाले फ्रॉड का अड्डा हुआ करता था। ऐसे अपराधों के लिए कुख्यात हो चुके जामताड़ा को लेकर इसी साल नेटफ्लिक्स पर क्राइम सीरीज भी आ चुकी है। लेकिन, बीते कुछ महीनों में और खासकर लॉकडाउन के दौरान देश में जामताड़ा जैसे छोटे शहरों की बाढ़ सी आ गई है। बड़ी संख्या में युवा इस साइबर अपराध की दुनिया में घुस रह हैं, जिन्हें हाई-प्रोफाइल गैंग संचालित कर रहा है। इनका मोडस ओपरेंडी भी लगातार बदलता जा रहा है। अकेले यूपी और राज्स्थान के सीमावर्ती शहरों में ही 20 से 30 हजार युवाओं के इस काले धंधे में घुस जाने की आशंका है।(तस्वीर पोस्टर-प्रतीकात्मक)

Cyber cheating: Why many small cities are becoming new Jamtara in India, see the complete list

मोबाइल फोन या इंटरनेट के जरिए धोखाधड़ी करने का खेल पहले बिहार और झारखंड के कुछ जिलों तक ही सीमित था। लेकिन, अब ऐसे गैंग देश के दूसरे छोटे शहरों में भी पांव पसारने लगे हैं। ईटी ने ऐसे जालसाजों के गैंग पर तीन हफ्तों की छानबीन के बाद दावा किया है कि अब ये लोग कई राज्यों में छोटे शहरों के युवाओं की भर्तियां कर रहे हैं। पुलिस ने ऐसे गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई भी शुरू की है, लेकिन फिर भी जल्दी से जल्दी ज्यादा पैसे कमाने और तुरंत रोजगार की लालच में युवा इस जाल में फंसते चले जा रहे हैं। ऐसे अपराधियों का हौसला इसलिए बढ़ा है, क्योंकि हाल के महीनों में डिजिटल पेमेंट की तादाद बढ़ती जा रही है।

जिन शहरों से अब जामताड़ा जैसा फर्जीवाड़ा किया जा रहा है उनमें राजस्थान के अलवर और भरतपुर, पश्चिम बंगाल के आसनसोल और कोलकाता, हरियाणा के मेवात और गुड़गांव, यूपी के मथुरा, वाराणसी और जलालपुर और ओडिशा के भुवनेश्वर जैसे शहर और महानगर भी शामिल हैं। जालसाजी की यह गंभीर बीमारी अब दक्षिण भारत को भी अपनी चपेट में लेने लगा है। तमिलनाडु के मदुरै और मैसूर ऐसे ही शहर हैं, जहां से ऐसे साइबर अपराधी हैकिंग और जबरिया वसूली के धंधों को अंजाम दे रहे हैं। इनकी मोडस ऑपरेंडी को लेकर विभिन्न राज्यों के साइबर सेल के अधिकारियों, रेग्युलेटरी एजेंसियों के सूत्रों, पेमेंट इंडस्ट्री के अंदर के लोगों, बैंककर्मियों और साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट से बात की गई है, जिन्होंने नए साइबर क्राइम हब और उनके अपराध के तरीकों के बारे में बताया है।

कई मामलों में पाया गया है कि यह साइबर अपराधी इतने ढीठ हो चुके हैं कि अगर यह टारगेट को फोन पर फांसने की कोशिश शुरू करते हैं और अगला बंदा उनका इरादा भांप लेता है तो वह फोन पर उससे बदतमीजी भी शुरू कर देते हैं। क्योंकि, शायद उन्हें यकीन होता है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लिया गया उनका मोबाइल या फोन नंबर का पता लगाना मुश्किल है और उनके लिए नंबर बदल लेना बहुत ही आसान है। उत्तर प्रदेश के साइबर क्राइम के एसपी त्रिवेणी सिंह का कहना है, मथुरा, मेवात और भरतपुर 'तीन राज्यों का एक ऐसा इंटरसेक्शन है जहां जामताड़ा की तरह आपराधिक गतिविधियां चलती हैं।'

उन्होंने आशंका जताई है कि 'इस तरह का फर्जीवाड़ा निश्चित तौर पर और बढ़ेगा। मेरा अनुमान है कि इस क्षेत्र में 20,000 से 30,000 युवा ऐसे कार्यों में लगे हुए हैं।' उन्होंने बताया कि हालांकि वह सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उनका मोडस ऑपरेंडी 'थोड़ा अलग' है। जैसे कि कोई धोखेबाज पहली बार डिजिटल पेमेंट करने वाले यूजर का सोशल मीडिया अकाउंट हैक कर लेता है और उसके जरिए उसके ग्रुप को एक मैसेज भेजता है, जिसमें लिखता है, 'मैं कोविड-19 संक्रमित हो गया हूं। मैं एक अस्पताल में भर्ती हूं और मुझे तुरंत पैसों की जरूरत है। प्लीज मुझे इस फोन नंबर, वैलेट या बैंक अकाउंट में पैसे भेजिए।' उस बंदे के यार-दोस्त झांसे में आ जाते हैं और उस धोखेबाज की बातों में फंसकर पैसे भेज देता है।

साइबरऑप्स इंफोसेक के चीफ एग्जिक्यूटिव और फाउंडर मुकेश चौधरी की मानें तो यह साइबर लुटेरे तीन तरीके से अपने अपराधों को अंजाम देते हैं। पहला तो ये है कि वो कम समझदार डिजिटल यूजर का जाली सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाकर उसके नजदीकी दोस्तों को मैसेज भेजकर पैसों की मांग करते हैं। लोग इस जालसाजी की गिरफ्त में फंस ही जाएं इसके लिए रकम बहुत ही कम या 1,000 से 3,000 रुपये के बीच में रखते हैं। चौधरी राजस्थान पुलिस के साथ ऐसे मामलों को करीब से देखते रहे हैं।

दूसरा तरीका ये है कि वह लोगों को ऐसा जाली संदेश भेजते हैं, जो सीधे-सादे उपभोक्ताओं को बैंक या पेमेंट एक्जिक्यूटिव की ओर से आया हुआ मैसेज लगता है। इसके जरिए वह उपभोक्ताओं की अहम डीटेल्स लेने की कोशिश करते हैं। तीसरे में वह लोगों के मोबाइल नंबरों और जन्म तारीखों के आधार पर बैंक अकाउंट का पासवर्ड अनुमानित करने की कोशिश करते हैं, ताकि पीड़ित को एक ही बार में बड़ा चूना लगा सकें।

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English summary
Cyber cheating: Why many small cities are becoming new 'Jamtara' in India, see the complete list
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