CWC Meeting: मनरेगा पर क्यों आर-पार की लड़ाई की तैयारी में कांग्रेस? बंगाल चुनाव से पहले BJP के खिलाफ नया दांव
CWC Meeting 27 December 2025: कांग्रेस वर्किंग कमिटी (CWC) की बैठक शनिवार (27 दिसंबर) को दिल्ली में होने जा रही है। कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक सिर्फ एक नियमित बैठक नहीं है, बल्कि इसे पार्टी की आने वाली बड़ी राजनीतिक लड़ाई की शुरुआत माना जा रहा है।
बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे करेंगे और इसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी मौजूद रहेंगे। बैठक के एजेंडे के केंद्र में है मनरेगा की जगह लाया गया नया कानून VB G RAM G Act, जिसे कांग्रेस ग्रामीण अधिकारों पर सीधा हमला बता रही है।

🟡मनरेगा क्यों बन गया कांग्रेस का नया सियासी मुद्दा?
🔹मनरेगा, यूपीए सरकार की सबसे बड़ी और पहचान वाली योजनाओं में से एक रहा है। कांग्रेस के लिए यह सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि उसकी राजनीतिक विरासत का प्रतीक है। ऐसे में NDA सरकार द्वारा कानून का नाम बदलने और ढांचे में बदलाव को कांग्रेस अपने कोर वोट बैंक पर चोट के रूप में देख रही है।
🔹पार्टी के भीतर इसे "मजबूरी भी और मौका भी" माना जा रहा है। मजबूरी इसलिए क्योंकि मनरेगा की सफलता कांग्रेस की पहचान से जुड़ी रही है और मौका इसलिए क्योंकि यह मुद्दा सीधे रोजगार, गरीबी और ग्रामीण आजीविका से जुड़ा है।
🔹पार्टी नेताओं का मानना है कि कानून का नाम बदलना और स्वरूप में बदलाव करना कांग्रेस की राजनीतिक विरासत पर सीधा प्रहार है। इसलिए इस मुद्दे पर चुप रहना कांग्रेस के लिए मजबूरी नहीं, बल्कि नुकसान का सौदा होता।
🔹कांग्रेस को लगता है कि का मुद्दा उसकी सामाजिक न्याय की राजनीति से सीधे तौर पर जुड़ता है। 2024 लोकसभा चुनाव में आंशिक वापसी के बाद पार्टी ने दलित, ओबीसी और अल्पसंख्यक वोटरों पर फोकस बढ़ाया है।
🔹राहुल गांधी लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि मौजूदा सरकार की नीतियां गरीब विरोधी और कॉरपोरेट समर्थक हैं। ग्रामीण रोजगार का मुद्दा इस नैरेटिव को मजबूत करता है।
🟡 वोट चोरी से रोजी-रोटी तक का सियासी शिफ्ट
2024 लोकसभा चुनावों के बाद कांग्रेस ने दलित, ओबीसी और अल्पसंख्यकों पर फोकस बढ़ाया, लेकिन "वोट चोरी" और संस्थाओं पर कब्जे जैसे मुद्दे जमीन पर ज्यादा असर नहीं दिखा पाए। बिहार चुनाव इसका उदाहरण रहे।
पार्टी नेतृत्व अब मानता है कि सीधा रोजी-रोटी का सवाल उठाना बीजेपी के लिए ज्यादा असहज होगा। खासकर ऐसे समय में जब पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और असम जैसे राज्यों में चुनाव नजदीक हैं। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि ग्रामीण आजीविका को लेकर सीधा हमला बीजेपी को ज्यादा असहज कर सकता है।
🟡INDIA गठबंधन को फिर से जोड़ने की कोशिश
मनरेगा का मुद्दा कांग्रेस को विपक्षी दलों को साथ लाने का भी मौका देता है। नया कानून राज्यों पर वित्तीय बोझ बढ़ाता है, जिससे गैर-बीजेपी शासित राज्यों में नाराजगी है।
तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टियां पहले ही ग्रामीण रोजगार योजनाओं को गांधी के नाम से जोड़ चुकी हैं। कांग्रेस को उम्मीद है कि इस मुद्दे पर साझा आंदोलन INDIA गठबंधन में नई जान फूंक सकता है, जो 2024 के बाद ठंडा पड़ा हुआ है।
🟡 जमीन पर उतरने की तैयारी, लेकिन चुनौतियां भी
पिछले एक हफ्ते में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता देशभर में दर्जनों प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं। सोनिया गांधी ने भी वीडियो संदेश जारी कर सरकार पर मनरेगा पर हमला करने का आरोप लगाया। पार्टी नेताओं का दावा है कि 19 से 22 दिसंबर के बीच करीब 50 प्रेस कॉन्फ्रेंस हुईं।
CWC में अब यह तय होगा कि आंदोलन कब और कैसे शुरू किया जाए। हालांकि कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी यही रही है कि वह मुद्दों पर लंबे समय तक दबाव बनाए रखने में अक्सर नाकाम रही है।
🟡 जयराम रमेश का आरोप: ग्राम पंचायतों से छीना गया अधिकार
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश का कहना है कि नया कानून मनरेगा के मूल सिद्धांतों को कमजोर करता है। उनके मुताबिक रोजगार की गारंटी, स्थानीय ढांचे का विकास और ग्राम पंचायतों को अधिकार, ये तीनों आधार इस कानून में कमजोर किए गए हैं। अधिकार केंद्र के हाथ में जाने से विकेंद्रीकरण खत्म हो रहा है और पंचायतें कमजोर पड़ रही हैं।
🟡 CWC की बैठक से क्या निकलेगा संदेश?
CWC बैठक में देशव्यापी जन आंदोलन की रूपरेखा, राज्यों में कार्यक्रम और समयसीमा तय हो सकती है। अरावली पहाड़ियों से जुड़े पर्यावरणीय आंदोलन पर भी चर्चा होगी। कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी बैठक में शामिल होंगे। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबित पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, '' अगर इस मुद्दे पर दबाव बना पाए, तो सरकार को पीछे हटना पड़ सकता है।"
CWC में यह तय किया जाएगा कि आंदोलन कब और कैसे तेज किया जाए। हालांकि, कांग्रेस के सामने चुनौती यह भी है कि वह किसी मुद्दे पर लंबे समय तक दबाव कैसे बनाए रखे।
फिर भी पार्टी को उम्मीद है कि MGNREGA का मुद्दा उसे फिर से राजनीतिक धार देने में मदद करेगा। अब देखना है कि क्या मनरेगा कांग्रेस की खोई हुई राजनीतिक धार वापस ला पाएगा या यह भी पिछले आंदोलनों की तरह ठंडा पड़ जाएगा।
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