N Kalaiselvi: इन्होंने जो सफलता पाई, कोई भारतीय महिला नहीं पा सकी, जानिए नई CSIR चीफ के बारे में
नई दिल्ली, 8 अगस्त: वैज्ञानिक नल्लाथांबी कलाईसेल्वी ने भारत में विज्ञान की दुनिया में वह मुकाम प्राप्त किया है, जो आजतक किसी भी भारतीय महिला को नहीं मिला था। इलेक्ट्रोकेमिकल साइंटिस्ट एन कलाईसेल्वी को प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की पहली महिला महानिदेशक नियुक्त किया गया है। सीएसआईआर देश के सार्वजनिक क्षेत्र का प्रमुख अनुसंधान एवं विकास संगठन है, जो पूरे देश की 38 अनुसंधान संगठनों को नियंत्रित करता है। भारत में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में इसे एक मील का पत्थर माना जा सकता है, क्योंकि विज्ञान की दुनिया में अबतक आमतौर पर पुरुषों का ही वर्चस्व ज्यादा देखने को मिलता रहा है।

सीएसआईआर की चीफ बनने वाली पहली महिला वैज्ञानिक
नल्लाथांबी कलाईसेल्वी फिलहाल तमिलनाडु के कराईगुडी स्थित सीएसआईआर की सेंट्रल इलेक्ट्रोकेमिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट की डायरेक्टर हैं। केंद्र सरकार के आदेश के मुताबिक उन्हें दो साल के लिए सीएसआईआर के डीजी पद पर नियुक्त किया गया है, जो कि उस दिन से लागू होगा, जब से वो अपनी नई जिम्मेदारियां संभालेंगी। कलाईसेल्वी तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले के एक छोटे से कस्बे अंबासमुद्रम से आती हैं। कलाईसेल्वी सीएसआईआर में कई छोटी-बड़ी जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं और फरवरी 2019 में सीएसआईआर-सीईसीआरआई की हेड बनने वाली भी वह पहली महिला वैज्ञानिक हैं।

सीएसआईआर चीफ के अलावा भी कई कार्यभार संभालेंगी
सीएसआईआर की बॉस रहते हुए वो विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय में विज्ञान और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) की सचिव का कार्यभार भी संभालेंगी। नई जिम्मेदारी मिलते ही एन कलाईसेल्वी उन महिला वैज्ञानिकों की लिस्ट में शामिल हो गई हैं, जिसमें अंतरिक्ष संगठन और बायोटेक्नोलॉजी विभाग में महत्वपूर्ण रोल निभा चुकीं महिला वैज्ञानिक शामिल हैं। अनुसंधान के क्षेत्र में कलाईसेल्वी की दिलचस्पी लिथियम और बगैर-लिथियम बैटरी, सुपरकैपेसिटर और वेस्ट-टू-वेल्थ के विचार से बने इलेक्ट्रोड और ऊर्जा भंडारण और इलेक्ट्रोकैटलिटिक ऐप्लिकेशनों के लिए इलेक्ट्रोलाइट्स शामिल हैं। वह वर्तमान में सोडियम-आयन/लिथियम-सल्फर बैटरी और सुपरकैपेसिटर के विकास में अपना योगदान दे रही हैं।

125 रिसर्च पेपर प्रकाशित, 6 पेटेंट
कलाईसेल्वी का नेशनल मिशन फॉर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में भी योगदान रहा है। उनके नाम 125 शोध पत्रों की फेहरिस्त है और उनके नाम से 6 पेटेंट भी हैं। इनसे पहले महिला वैज्ञानिक रेणु स्वरूप विज्ञान मंत्रालय में डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी की सचिव रह चुकी हैं। इसी तरह मुथैया वनीता चंद्रयान-2 मिशन की प्रोजेक्ट डायरेक्टर और रितु करिधाल इसी मिशन की मिशन डायरेक्टर की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। वे अभी भी भारतीय अंतरिक्ष संगठन में में महत्वपूर्ण रोल अदा कर रही हैं।

अप्रैल में रिटायर हो गए थे शेखर मांडे
नल्लाथांबी कलाईसेल्वी सीएसआईआर में शेखर मांडे की जगह लेंगी, जो अप्रैल में सेवानिवृत हो गए थे। उनके रिटायर होने के बाद डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के सचिव राजेश गोखले को सीएसआईआर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। सीएसआईआर के बुलंद इतिहास में कलाईसेल्वी का योगदान कितना बुलंद है कि जिस संस्थान में उन्होंने एंट्री-लेवल की वैज्ञानिक की भूमिका से शुरुआत की थी, उसी के टॉप पर पहुंचीं हैं।

तमिल मीडियम से शिक्षा की शुरुआत
कलाईसेल्वी की प्रारंभिक शिक्षा तमिल मीडियम के स्कूल से हुई थी। उनका कहना है कि उनकी स्कूली शिक्षा ने ही उन्हें कॉलेज में विज्ञान की ओर रुचि बढ़ाने में मदद की है। शनिवार को कार्मिक मामलों के मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक उनकी नियुक्ति पदभार ग्रहण करने की तारीख से या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, दो साल की अवधि के लिए की गई है। (पहली तस्वीर के अलावा बाकी सौजन्य: सीएसआईआर-कुछ तस्वीरें सांकेतिक)












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