उत्तर प्रदेश की तरह महाराष्ट्र में भी मोदी विरोधी गठबंधन में दरार

नई दिल्ली- लोकसभा चुनाव के नतीजों ने जो आग उत्तर प्रदेश के महागठबंधन में लगाई है, वैसी ही आग महाराष्ट्र (Maharashtra) के मोदी विरोधी गठबंधन में भी लग गई है। अलबत्ता, उत्तर प्रदेश में खुद को दलितों की रहनुमा बताने वाली मायावती की बीएसपी को फायदा मिला है, लेकिन महाराष्ट्र में दलित नेता प्रकाश आंबेडकर (Prakash Ambedkar) खुद को छला हुआ महसूस कर रहे हैं। क्योंकि, वहां गठबंधन का अकेला फायद हैदराबाद से आई असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) उठाकर ले गई।

प्रकाश आंबेडकर का मुस्लिमों से मोहभंग

प्रकाश आंबेडकर का मुस्लिमों से मोहभंग

वंचित बहुजन अघाड़ी (Vanchit Bahujan Aghadi) के नेता प्रकाश आंबेडकर (Prakash Ambedkar) ने मायावती की तरह ही कहना शुरू कर दिया है कि उनकी पार्टी को एआईएमआईएम (AIMIM) के मुस्लिम वोट नहीं मिले। आंबेडकर का दर्द ये है कि दोनों पार्टियों ने महाराष्ट्र (Maharashtra) की सभी 48 सीटों पर चुनाव लड़ा और सिर्फ 0.72% वोट पाकर भी एआईएमआईएम (AIMIM) औरंगाबाद की सीट जीत गई। जबकि, वंचित बहुजन अघाड़ी (Vanchit Bahujan Aghadi) को कुछ भी नहीं मिला। इसके चलते जहां आंबेडकर की पार्टी के उम्मीदवारों को डेढ़ लाख से भी ज्यादा वोट मिले, वहां भी मुस्लिम वोट नहीं मिलने से उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। खुद प्रकाश आंबेडकर (Prakash Ambedkar) भी सोलापुर और अकोला दोनों सीटों से हार गए। माना जा रहा है कि ऐसी स्थिति करीब आधा दर्जन सीटों पर पैदा हुई। औरंगाबाद से चुनाव जीतने वाले एआईएमआईएम (AIMIM) के इम्तियाज जलील (Imtiyaz Jaleel) ने भी माना है कि सोलापुर में उनकी पार्टी के अधिकारियों तक ने प्रकाश आंबेडकर को वोट न देकर कांग्रेस के सुशील कुमार शिंदे को वोट दे दिया।

एक दर्जन सीटों पर बिगड़ा कांग्रेस-एनसीपी का खेल

एक दर्जन सीटों पर बिगड़ा कांग्रेस-एनसीपी का खेल

चुनाव से पहले ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि प्रकाश आंबेडकर महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसपी के साथ गठबंधन करेंगे। लेकिन, तब आंबेडकर को लगा कि दलित-मुस्लिम गठजोड़ उन्हें एक बड़ा नेता बना सकता है। लेकिन, उनकी यह सोच चुनाव परिणाम आने तक धाराशायी हो गई। इसलिए, अब उनका मुस्लिम वोटरों और एआईएमआईएम (AIMIM) से मोहभंग होना शुरू हो गया है। अलबत्ता, इस चक्कर में एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन को बड़ा नुकसान हो गया। महाराष्ट्र की करीब एक दर्जन सीटें ऐसी हैं, जहां कांग्रेस-एनसीपी की हार का अंतर वंचित बहुजन अघाड़ी और ओवैसी की पार्टी को मिले वोटों से कम है। जिसका सीधा लाभ बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को मिला है।

कांग्रेस-एनसीपी से हो सकता है गठबंधन

कांग्रेस-एनसीपी से हो सकता है गठबंधन

महाराष्ट्र में जो सियासी हालात बने हैं, उसमें विधानसभा चुनावों में कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन और प्रकाश आंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी (Vanchit Bahujan Aghadi)इकट्ठे हो सकते हैं। क्योंकि, निश्चित तौर पर यह कोशिश कांग्रेस और पवार की भी होगी कि बीजेपी-शिवसेना को चुनौती देने के लिए प्रकाश आंबेडकर की पार्टी को भी साथ लें। दूसरी ओर इनके लिए शिवसेना-भाजपा के बीच विधानसभा चुनाव में होने वाली तकरार भी फायदे का सौदा हो सकता है। क्योंकि, शिवसेना इसबार भी राज्य में बड़े भाई होने का दावा करते हुए, ज्यादा सीटों पर लड़ने की मांग कर रही है और बीजेपी बराबर-बराबर सीटों के फॉर्मूले पर ही अडिग है। गौरतलब है कि इसी के चलते पिछले विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ीं थी।

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