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CP Radhakrishnan ही क्यों बने NDA की पहली पसंद? 6 Point में समझें- कैसे उड़ाए INDIA ब्लॉक के तोते

CP Radhakrishnan NDA New Vice President: उपराष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने शानदार प्रदर्शन किया और 452 वोटों से जीत हासिल की। 68 साल के राधाकृष्णन अब भारत के 15वें उपराष्ट्रपति बनेंगे, जो राज्यसभा सभापति के रूप में भी काम करेंगे। INDIA ब्लॉक के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट ही मिले, जो उम्मीद से कम थे।

9 सितंबर 2025 को संसद भवन में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चले मतदान के बाद शाम 6 बजे काउंटिंग शुरू हुई, और राधाकृष्णन की जीत तय हो गई। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद खाली हुए इस पद पर NDA ने रणनीतिक चाल चली। आइए, 6 पॉइंट में समझते हैं कि NDA ने राधाकृष्णन को क्यों चुना - एक RSS स्वयंसेवक से महाराष्ट्र गवर्नर तक का सफर, जो दक्षिण भारत की राजनीति को हिला देगा..

CP Radhakrishnan New Vice President

सीपी राधाकृष्णन को क्यों चुना? NDA की मंशा और जड़ें

1. RSS की वैचारिक जड़ों से जुड़ाव: 16 साल की उम्र से स्वयंसेवक, BJP की रीढ़

सीपी राधाकृष्णन का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से गहरा नाता 1973 में तमिलनाडु के तिरुप्पुर में 16 साल की उम्र से शुरू हुआ। वो RSS के प्रचारक रहे और भारतीय जनसंघ (BJP का पूर्ववर्ती) के राज्य कार्यकारिणी सदस्य बने। 2023 में झारखंड गवर्नर बनने पर उन्होंने गर्व से कहा, 'मैं एक गौरवशाली RSS कार्यकर्ता हूं।' NDA ने राधाकृष्णन को चुना ताकि RSS-BJP के बीच हाल के मतभेद (जेपी नड्डा के बयान 'BJP को RSS की जरूरत नहीं') को सुलझाया जाए। 2024 लोकसभा चुनाव में BJP को 240 सीटें मिलीं, जो बहुमत से 32 कम थीं - राधाकृष्णन का चयन RSS को मजबूत संदेश है कि पार्टी उनकी वैचारिक रीढ़ को कभी नहीं भूलेगी। विपक्ष के तोते उड़ गए, क्योंकि ये चाल RSS को फिर से एकजुट कर रही है!

2. दक्षिण भारत का चेहरा: तमिलनाडु में BJP की सियासी मजबूती का दांव

तमिलनाडु के तिरुप्पुर में 20 अक्टूबर 1957 को जन्मे राधाकृष्णन ने कोयंबटूर से 1998 और 1999 में लोकसभा चुनाव जीते - वो भी 1998 के बम धमाकों के बाद बड़े अंतर से। 2004-07 तक तमिलनाडु BJP अध्यक्ष रहे और DMK के NDA से अलग होने के बाद AIADMK के साथ गठबंधन बनाया। NDA ने राधाकृष्णन को चुना ताकि 2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में दक्षिण में BJP का आधार मजबूत हो। 'तमिलनाडु का मोदी' कहे जाने वाले राधाकृष्णन की OBC (गौंडर-कोंगु वेल्लाला) पृष्ठभूमि दक्षिणी मतदाताओं को संदेश देती है कि BJP उनकी आवाज सुनेगी। INDIA ब्लॉक को ये चाल महंगी पड़ी - दक्षिण में NDA का विस्तार विपक्ष के लिए खतरे की घंटी है!

3. संगठनात्मक और संसदीय अनुभव का खजाना: 40 साल का सफर, UN तक पहुंच

राधाकृष्णन के पास 40 साल से ज्यादा का राजनीतिक अनुभव है। 1998-99 में कोयंबटूर सांसद, 2004 में तमिलनाडु BJP अध्यक्ष, और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य। 93 दिनों में 19,000 किमी की रथ यात्रा कर नदियों को जोड़ने, आतंकवाद विरोध, और अस्पृश्यता उन्मूलन जैसे मुद्दे उठाए। 2016-20 तक कोयर बोर्ड चेयरमैन के रूप में निर्यात को 2,532 करोड़ रुपये पहुंचाया। UN जनरल असेंबली को संबोधित करने वाले पहले BJP नेता। NDA ने राधाकृष्णन को चुना क्योंकि उपराष्ट्रपति राज्यसभा सभापति होता है - उनका संसदीय अनुभव (टेक्सटाइल कमेटी, PSU, वित्त समितियां) राज्यसभा को मजबूत बनाएगा।

4. गवर्नर के रूप में सिद्ध ट्रैक रिकॉर्ड: केंद्र-राज्य सेतु का प्रतीक

2023 में झारखंड गवर्नर बने राधाकृष्णन ने 4 महीनों में 24 जिलों का दौरा किया, आदिवासियों और वंचितों के लिए काम किया, और समान नागरिक संहिता में आदिवासियों को छूट की वकालत की। 2024 में महाराष्ट्र गवर्नर, साथ ही तेलंगाना और पुडुचेरी के अतिरिक्त प्रभार। NDA ने राधाकृष्णन को चुना ताकि गवर्नर के रूप में उनकी 'केंद्र-राज्य सेतु' वाली छवि गठबंधन को मजबूत करे। नीतीश कुमार (JD(U)) और चंद्रबाबू नायडू (TDP) जैसे सहयोगियों को ये संदेश है कि BJP क्षेत्रीय दलों का सम्मान करती है। INDIA ब्लॉक को ये चाल झटका - गवर्नर के अनुभव से NDA की एकजुटता बढ़ेगी!

5. विपक्ष के साथ सर्वसम्मति की कोशिश: गैर-विवादास्पद चेहरा, सहमति का दांव

जेपी नड्डा ने कहा कि राधाकृष्णन का चयन NDA सहयोगियों (JD(U), TDP, AIADMK) और विपक्ष से बातचीत के बाद हुआ। NDA सर्वसम्मति चाहता था। राधाकृष्णन की 'सभी वर्गों में सम्मानित' छवि विपक्ष का विरोध कम करेगी। NDA ने राधाकृष्णन को चुना ताकि चुनाव विवादास्पद न बने - उनके पास RSS पृष्ठभूमि है, लेकिन कोई विवाद नहीं। विपक्ष के बी सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट मिले, लेकिन NDA के 452 वोटों ने तोते उड़ा दिए - ये चाल सियासी स्थिरता का संदेश देती है!

6. वैचारिक और क्षेत्रीय संतुलन का मास्टरस्ट्रोक: दक्षिण से RSS, UN तक का अनुभव

राधाकृष्णन ने UN जनरल असेंबली को संबोधित किया और ताइवान के लिए पहली भारतीय संसदीय टीम का हिस्सा बने। खेलों में (टेबल टेनिस चैंपियन, क्रिकेट, वॉलीबॉल) रुचि और 20+ देशों की यात्राओं ने उन्हें बहुआयामी बनाया। NDA ने राधाकृष्णन को चुना ताकि, RSS की वैचारिक जड़ें मजबूत हों, लेकिन दक्षिण भारत (तमिलनाडु 2026 चुनाव) का संतुलन साधा जाए। उनकी OBC पृष्ठभूमि गौंडर वोट बैंक को मजबूत करेगी। विपक्ष को ये चाल महंगी पड़ी - NDA का दक्षिणी विस्तार तोते उड़ा रहा है!

कितनी गहरी हैं राधाकृष्णन की जड़ें?

  • RSS की वैचारिक नींव: 16 साल की उम्र से RSS स्वयंसेवक, तमिलनाडु में नगर, तालुक और जिला स्तर पर संगठनात्मक भूमिकाएं। उनकी यह जड़ें बीजेपी के कोर वैचारिक आधार को मजबूत करती हैं।
  • तमिलनाडु में संगठनकर्ता: 1998 और 1999 में कोयंबटूर से जीत, 2004 में AIADMK गठबंधन, और 93 दिनों की रथ यात्रा ने उन्हें तमिलनाडु में बीजेपी का मजबूत चेहरा बनाया।
  • राष्ट्रीय स्तर पर सक्रियता: झारखंड और महाराष्ट्र के गवर्नर, कोयर बोर्ड के अध्यक्ष, और UN में भारत का प्रतिनिधित्व। उनकी 64.75 करोड़ की संपत्ति और बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की डिग्री उनकी विश्वसनीयता को और बढ़ाती है।
  • दक्षिण भारत का प्रभाव: तमिलनाडु और केरल (2020-22 में प्रभारी) में उनकी सक्रियता दक्षिण में बीजेपी की रणनीति को मजबूत करती है।

सीपी राधाकृष्णन की 452 वोटों से जीत NDA की रणनीतिक जीत है। RSS जड़ें, दक्षिणी चेहरा, अनुभव, गवर्नर रिकॉर्ड, सर्वसम्मति, और संतुलन - ये 6 पॉइंट NDA के दांव को दिखाते हैं। INDIA ब्लॉक के तोते उड़ गए, लेकिन राधाकृष्णन राज्यसभा को मजबूत बनाएंगे। सवाल ये है - क्या ये चाल 2026 तमिलनाडु चुनाव में NDA को फायदा देगी?

ये भी पढ़ें- Who is CP Radhakrishnan: कौन हैं CP राधाकृष्णन, जो होंगे NDA के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार

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