डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ 8 गुना कम प्रभावी हैं कोरोना वायरस की वैक्सीन- सर गंगा राम अस्पताल
एक नए अध्ययन में यह दावा किया गया है कि कोरोना वायरस का डेल्टा वेरिएंट वैक्सीन प्राप्त एंटीबॉडी के प्रति आठ गुना कम संवेदनशीलता दिखाता है।
नई दिल्ली, 5 जुलाई। एक नए अध्ययन में यह दावा किया गया है कि कोरोना वायरस का डेल्टा वेरिएंट वैक्सीन प्राप्त एंटीबॉडी के प्रति आठ गुना कम संवेदनशीलता दिखाता है। इसका मतलब यह हो सकता है कि वुहान वेरिएंट की तुलना में कोविड-19 टीके डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ आठ गुना कम प्रभावी हैं। इस अध्ययन को दिल्ली स्थित सर गंगा राम हॉस्पिटल ने किया है।

बता दें कि B.1.617.2 और डेल्टा वेरिएंट इस वक्त दुनिया के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसको लेकर चिंता व्यक्त की है। अध्ययन में कहा गया है कि हाल ही में भारत के तीन केंद्रों के 100 से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों पर डेल्टा वेरिएंट को लेकर एक अध्ययन किया गया। अध्ययन के अनुसार, इन स्वास्थ्य कर्मियों से बरामद एंटीबॉडी को निष्क्रिय करने के लिए वेरिएंट कम संवेदनशील है।
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अध्ययन में यह भी दावा किया गया है कि भारत में डेल्टा वैरिएंट का प्रभुत्व सबसे पहले संक्रमित व्यक्तियों में एंटीबॉडी को निष्क्रिय करने और वायरस की संक्रामकता में वृद्धि के संयोजन से प्रेरित है। दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में किए गए अध्ययन में यह भी दावा किया गया है कि कोविड-19 से ठीक हुए रोगियों से प्राप्त एंटीबॉडी को बेअसर करने के लिए डेल्टा संस्करण कम संवेदनशील है।
रिसर्चरों ने दावा किया एक बार ठीक होने के बाद दोबारा होने वाले संक्रमण और इसके फैलने की तेज गति ने कोविड-19 के डेल्टा वेरिएंट के फैलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शोधकर्ताओं ने शोध में पाया कि टीकाकरण वाले स्वास्थ्य कर्मियों में ट्रांसमिशन क्लस्टर भी डेल्टा वेरिएंट से जुड़े पाए गए।
भारत में तीन केंद्रों में 100 से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों में वैक्सीन की सफलता के विश्लेषण में सामने आया कि डेल्टा वेरिएंट न केवल गैर-डेल्टा वेरिएंट्स की तुलना में उच्च श्वसन वायरल लोड के साथ वैक्सीन-सफलता संक्रमणों पर हावी है, बल्कि B.1.1.7 या B.1.617.1 वेरिएंट की तुलना में स्वास्थ्य कर्मियों के बीच अधिक ट्रांसमिशन भी उत्पन्न करता है। बता दें कि भारत में डेल्टा वेरिएंट का पहला मामला साल 2020 में महाराष्ट्र में सामने आया था और इसके बाद यह पूरे भारत में फैल गया।












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