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भारत में दी जा रही वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सीन के बारे में कितना जानते हैं आप? दाम,साइड इफेक्ट, जानें सबकुछ

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नई दिल्ली: भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर बेकाबू होती दिख रही है। एक लाख से ज्यादा कोविड-19 के केस हर दिन सामने आ रहे हैं। दूसरी ओर भारत में विश्व का सबसे बड़ा कोरोना वैक्सीनेशन अभियान जोरो से जारी है। देश में 07 अप्रैल 2021 तक कुल 9,01,98,673 लोगों को कोरोना वायरस की वैक्सीन लगाई गई है। देश में अभी भी बहुत से लोगों में कोरोना वैक्सीन को लेकर भ्रम है। तो आइए भारत में कोरोना वैक्सीन के बारे में जाने सबकुछ। भारत में वैक्सीनेशन अभियान के पहले चरण की शुरुआत 16 जनवरी 2021 से हुई थी। जिसके तहत स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन दी जा रही थी। दूसरे और तीसरे चरण में अब आम लोगों को वैक्सीन दी जा रही है। एक अप्रैल से शुरू हुए भारत में 45 के पार सभी लोगों को वैक्सीन दी जा रही है। केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि जुलाई 2021 तक देश में लगभग 30 करोड़ लोगों का टीकाकरण किया जाए।

covishield vs covaxin

1. कोविशील्ड और कोवैक्सीन को भारत में कब दी गई मंजूरी?

भारत में कोविड-19 से बचाव के लिए दो वैक्सीन लगाई जा रही है। एक है- कोविशील्ड, जो ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका का संस्करण। कोविशील्ड को भारत में सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा बनाया जा रहा है। दूसरा है- कोवैक्सीन, जो पूरी तरह से भारत की वैक्सीन है। जिसे आप देसी या स्वदेशी वैक्सीन भी कहा जा रहा है। कोवैक्सीन को हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक कंपनी ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के साथ मिलकर बनाया है। इन दोनों वैक्सीन को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने जनवरी 2021 में अनुमति दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत बायोटेक की कोवैक्सीन की डोज लगवाई है।

2. भारत में वैक्सीन पाने के लिए कहां और कैसे करें रजिस्ट्रेशन?

कोरोना वैक्सीन लेने के लिए आप लोगों को सरकार द्वारा बनाई गई वेबसाइट www.cowin.gov.in पर टीका के लिए रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इस ऐप में जीपीएस की सुविधा है, जिसके अनुसार आप अपनी इच्छानुसार वैक्सीन लेने की तारीख और जगह चुन सकते हैं। ऐप पर जिस्ट्रेशन होने के बाद आपके मोबाइल पर एक मैसेज भेजा जाएगा, जिसमें वैक्सीन लगाने की तारीख, समय और केंद्र के बारे में जानकारी दी जाएगी। कोवन ऐप पर रजिस्ट्रेशन के लिए आपको कोई भी एक फोटो पहचान पत्र सबमिट करना होगा। जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट, वोटर कार्ड इत्यादी। वैक्सीन लगाने के बाद आपको एक वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट भी मिलेगा। जिसे आप आरोग्य सेतु ऐप से डाउनलोड कर सकते हैं।

3. वैक्सीन के लिए जो cowin पर रजिस्ट्रेशन नहीं कर सकते हैं वो क्या करें?

भारत में आज भी बहुत ऐसे लोग हैं, जो ऑनलाइन ऐप पर जाकर वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं कर सकते हैं। वैसे लोग वैक्सीन लेने के लिए सीधे वैक्सीनेशन सेंटर भी जा सकते हैं। उन्हें अपने साथ में कोई भी फोटो पहचान पत्र ले जाना होगा। जैसे की आधार कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड, वोटर कार्ड इत्यादी। खास बात ये है कि आप उस राज्य में भी वैक्सीन लेने जा सकते हैं, जहां के आप मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं। जैसे कि यूपी का निवासी मध्य प्रदेश में भी जाकर वैक्सीन ले सकता है।

4. कोविशील्ड और कोवैक्सीन के दाम?

भारत के सभी सरकारी अस्पतालों में कोरोना वैक्सीन यानी कोविशील्ड और कोवैक्सीन की डोज मुफ्त में दी जा रही है। लेकिन अगर आप प्राइवेट अस्पताल में कोविड वैक्सीन लगवाने जाते हैं तो कोरोना का टीका 250 रुपये में लगेगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्राइवेट हॉस्पिटलों में टीके की कीमत अधिकतम 250 रुपये प्रति डोज तय की है। कोविशील्ड और कोवैक्सीन दोनों वैक्सीन प्राइवेट अस्पताल में 250 रुपये में ही मिलेंगे।

देश में इस वक्त 10 हजार से ज्यादा प्राइवेट अस्पताल में कोरोना वैक्सीन की डोज दी जा रही है। वहीं देशभर के हर सरकारी अस्पताल में कोरोना वैक्सीन फ्री में दी जा रही है।

5. कोरोना वैक्सीन को कैसे किया जाता है स्टोर?

कोरोना की वैक्सीन हो या कोई भी टीका हो, उसे हमेशा लो टेम्परेचर में ही रखा जाता है। कोरोना वैक्सीन को 2C से 8C तक स्टोर किया जा सकता है। बायोटेक्नोलॉजी विभाग की सचिव रेणु स्वरूप ने कहा था कि कोरोना वायरस के खिलाफ विकसित किए जा रहे सभी भारतीय टीकों को 2-8 डिग्री सेल्सियस पर स्टोर किया जाएगा। इसी को ध्यान में रखते हुए लॉजिस्टिक्स पर काम हुआ है।

6. कोविशील्ड और कोवैक्सीन की दूसरी डोज कितने दिनों के अंतराल पर दी जाएगी?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पहले निर्देश दिए थे कि कोविशील्ड हो या कोवैक्सीन दोनों वैक्सीन की दूसरी डोज 28 दिनों के अंतराल पर दी जाएगी। यानी पहली खुराक लेने के बाद दूसरी खुराक 28वें दिन लगनी चाहिए। हालांकि कुछ वक्त बाद ये निर्देश दिए गए कि कोविशील्ड वैक्सीन की दूसरी खुराक पहले डोज के 8 सप्ताह बाद दी जा सकती है। यानी 2 महीने बाद। हालांकि ये सिर्फ कोविशील्ड के लिए है। कोवैक्सीन पर ये लागू नहीं होता है।

7. कोविशील्ड और कोवैक्सीन, कौन कितना प्रभावी है?

भारत बायोटेक की कोवैक्सीन, जो आईसीएमआर के साथ मिलकर बनाई गई है, वो 81 प्रतिशत प्रभावी है। ये आंकड़ा तीसरे चरण के क्लिनिक्ल ट्रायल के बाद दिया गया है। वहीं हाल ही में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने दावा किया है कि अगर कोविशील्ड वैक्सीन के डोज को दो-तीन महीने के अंतर में दिया जाए तो ये 90 प्रतिशत प्रभावी हो सकता है। बता दें डॉक्टरों के मुताबिक अगर कोई वैक्सीन 50 फीसदी तक प्रभावी होती है तो उसे एक सफल वैक्सीन की कैटेगरी में रखा जाता है।

8. कोविशील्ड और कोवैक्सीन के साइड इफेक्ट

कोरोना वायरस वैक्सीन के साइड इफेक्ट को लेकर लोगों में काफी भ्रम है। कई लोगों ने ये भी बात फैलाई कि इसका असर जानलेवा भी हो सकता है। WHO की मानें तो वैक्सीन लेने के बाद से अब तक किसी की भी मौत नहीं हुई है। कोवैक्सीन हो या फिर कोविशील्ड, या कोरोना को लेकर कोई भी वैक्सीन लगभग सबके साइड इफेक्ट एक से हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, वैक्सीन की डोज लेने के बाद मामूली बुखार, सिर दर्द, बदन दर्द, आलस, नींद का आना या फिर जहां इंजेक्शन लगाई गई है, वहां दर्द हो सकता है। ज्यादातर देशों के मेडिकल संस्था ने सभी वैक्सीनों को सुरक्षित बताया है।

हालांकि वैक्सीन लगवाने वाले शख्स को अपने हेल्थ का खास ध्यान रखने को कहा जाता है। अगर किसी भी तरह का बदलवा शरीर में दिखे तो फौरन डॉक्टर को दिखाने को कहा जाता है।

9. कोविशील्ड और कोवैक्सीन कैसे करेगा काम?

कोविशील्ड वैक्सीन भारत के अलावा कई अन्य देशों में भी इस्तेमाल की जा रही है। कोविशील्ड को डेवलप कॉमन कोल्ड एडेनेवायरस से किया गया है। इसमें चिम्पांजी को संक्रमित करने वाले इस वायरस में बदलाव किए गए हैं। जितसे इंसान संक्रमित ना हो। वैक्सीन 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों पर ट्रायल किया गया है।

जबकि भारत बायोटेक की कोवैक्सीन का विकास मृत कोरोना वायरस का इस्तेमाल कर बनाया गया है। यह वैक्सीन शरीर में जाने के बाद संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी तैयार करता है। वैक्सीन के असर के लिए दो डोज लेना जरूरी है।

10. क्या बच्चों को दी जा सकती है कोरोना वैक्सीन

भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को 12 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों पर आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति मिल चुकी है। क्लीनिकल ट्रायलस में 18 से कम उम्र के बच्चों को शामिल करने की अनुमति दी गई थी। हालांकि जिन बच्चों को भारत बायोटेक की कोवैक्सीन लगाई जाएगी, उनका स्वास्थ्य लक्षणों की निरंतर मॉनिटरिंग की जाएगी।

ये भी पढ़ें- वैक्सीन की कमी पर बोले सीरम इंस्टीट्यूट के CEO,सरकार से फंड मांगा है, मिला तो टीकों की दोगुनी मात्रा देंगे

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English summary
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