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Covid19: अति आवश्यक मेडिकल सप्लाई के लिए चीनी कंपनियों से बात कर रहा है भारत!

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नई दिल्ली। वर्तमान राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन में ढील के बीच भारतीय अधिकारी COVID-19 संक्रमण में संभावित वृद्धि की आशंका में चीन से आवश्यक चिकित्सा आपूर्ति पर लगातार बातचीत कर रहे हैं। हालांकि अभी तक भारत में घोषित 21 दिनों के लॉकडाउन 14 अप्रैल को खत्म हो रहा है और लॉकडाउन में विस्तार पर अभी भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा फैसला लिया जाना है।

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सूत्रों के मुताबिक आपूर्तिकर्ताओं के साथ बातचीत उस समय हो रही थी जब चीनी चिकित्सा उत्पादों की वैश्विक मांग में जबर्दस्त इजाफा हो रहा था, क्योंकि चीन कोरोना वायरस की चपेट में बुरी तरह फंसे इटली, संयुक्त राज्य अमेरिका, स्पेन और जर्मनी जैसे देशों में एक विशिष्ट विक्रेता बाजार में अपनी पकड़ बनाने के लिए तैयार थे।

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एक अधिकारी ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में हर कोई चीन के दरवाजे पर कतार लगा रहा है, जिसने घरेलू मांग में एक बार की उछाल को पूरा करने के लिए मास्क, दस्ताने, कवर, काले चश्मे और बूट कवर बनाने की क्षमता विकसित की थी। चूंकि देश के भीतर महामारी के बावजूद चीन विशिष्ट रूप से बड़े पैमाने पर निर्यात करने के लिए तैयार है।

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अपेक्षाकृत दुर्लभ उत्पादों की प्रतिस्पर्धा में भारत फंडों में बाधा नहीं है, लेकिन प्रक्रियात्मक कठोरता भारत के लिए बड़ी बाधा है। सूत्र ने बताया कि अब तक विभिन्न चैनलों के माध्यम से उपलब्ध धन की कोई कमी नहीं है, जिसमें नवनिर्मित पीएम केयर्स फंड, एशियाई विकास बैंक समेत विश्व बैंक द्वारा प्रदान किया गया एक अरब डॉलर शामिल है, लेकिन भारत का बाई दि बुक दृष्टिकोण विकल्पों को सीमित करता है।

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गौरतलब है इस समय आपूर्तिकर्ता प्रतिस्पर्धात्मक आर्डर ले रहे हैं और वो चाहते हैं कि आप अपनी कंसाइनमेंट को सुरक्षित रखने के लिए नकद अग्रिम राशि लगाएं, क्योंकि यह लंबी निविदा प्रक्रियाओं का समय नहीं है या न ही भविष्य में लेखा परीक्षकों द्वारा कंसाइनमेंट की नुक्ताचीनी के बारे में चिंता करने का समय है।

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इस समय प्रणाली को उसके लचीलेपन के लिए परीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि चीन से चिकित्सा उपकरणों की लागत में भारी वृद्धि हुई है। सूत्र ने बताया कि एक मास्क जिसकी कीमत एक डॉलर से भी कम थी, अब उसे 4-6 डॉलर के बीच कहीं भी बेचा जा रहा है।"

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भारतीय चिकित्सा नियोजक भी चीन से आयात किए जाने वाले चिकित्सा उपरकणों की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए एक फुल फ्रूफ विधि की तैयार में जूझ रहे हैं ताकि कम गुणवत्ता वाले उपरकरणों के आयात न हो सके। सूत्र बताते हैं कि कई राज्य सरकारों ने पहले चीन से सब स्टैंडर्ड उत्पादों के आयात पर राजी हो गए थे, क्योंकि उन्हें केंद्र सरकार द्वारा जमा किए जा रहे चिकित्सा स्टॉक के पूरक के रूप में बताया गया था।

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मालूम हो, भारत में संभावित मेडिकल उपरकरणों की डिमांड की प्रत्याशा में चीन में दिसंबर में ही भारतीय मिशनों ने चीनी आपूर्तिकर्ताओं से स्टॉक करने की सलाह दे दी थी। स्रोत के मुताबिक समय की कमी को देखते हुए, केंद्र और राज्य सरकारें एक साथ इस अभ्यास में लगी हुई थीं।

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हालांकि खरीद के वर्तमान चक्र में यह निर्णय लिया गया है कि ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों पर कई उत्साही फर्मों से खरीदने से बचने के लिए केवल चीनी सरकार द्वारा अनुशंसित केवल 20 प्रतिष्ठित कंपनियों से मेकिडल उपरकरों की खरीद का ध्यान केंद्रित किया जाएगा। चूंकि भारत को मालवाहक विमानों की कमी है, इसलिए अब माल की भारी मात्रा को भी कम कर सकते है।

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माना जा रहा है कि परिवहन पर अधिकार प्राप्त समिति इस समस्या का समाधान करेगी, क्योंकि उनका रासायनिक उपचार किया जाता है। मसलन, मेडिकल किट को विशेष रूप से सूखी बर्फ और अन्य सामग्री से पैक होते हैं, जो पैकेज की मात्रा और वजन को बढ़ाता है।

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स्रोत ने बताया कि विशेष रूप से सिंगल यूज वाले आवरण, मास्क और अन्य उपकरणों के कारण चिकित्सा खेपों का आकार बड़ा होता है। सामान्यतया दो तरह के कवर होते हैं। एक सिंगल यूज है जिन्हें बाद में जला दिया जाता है, जबकि बेहतर गुणवत्ता का दूसरे कवर को 5-6 बार उपयोग किया जा सकता है। एक राष्ट्रीय पैमाने पर खपत की कल्पना करें तो प्रत्येक चिकित्सा किट का उपयोग कुछ घंटों की एकल पारी के लिए किया जाता है।

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English summary
According to sources, talks with suppliers were taking place at a time when global demand for Chinese medical products was increasing drastically, as China was badly caught in the grip of the Corona virus in countries like Italy, the United States, Spain and Germany. Sellers were ready to make a mark in the market.
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