कोविड वर्किंग ग्रुप के चेयरमैन बोले- तीसरी लहर बच्चों को ज्यादा प्रभावित करेगी, ऐसा कहने की कोई वजह नहीं
नई दिल्ली, 25 मई: देश में इस समय कोरोना की दूसरी लहर है लेकिन तीसरी लहर को लेकर भी लगातार बात की जा रही है। कहा जा रहा है कि कोरोना की तीसरी लहर आने का बहुत ज्यादा अनुमान है, साथ ही ऐसा अंदेशा जताया जा रहा है कि तीसरी लहर बच्चों को ज्यादा नुकसान पहुंचाएगी। हालांकि विशेषज्ञों ने इसे नकार दिया है। केंद्र सरकार के कोविड वर्किंग ग्रुप के चेयरमैन डॉक्टर एनके अरोड़ा ने कहा कि ऐसा कोई प्रमाण नहीं है, जिसके आधार पर ये माना जाए कि तीसरी लहर में बच्चे ज्यादा संक्रमित होंगे।

डॉ एनके अरोड़ा ने कहा है कि भारत में कोरोना के जो आंकड़े हैं, वो ऐसा नहीं दिखाते कि किसी एक खास आयुवर्ग में कोरोना संक्रमण ज्यादा हुआ हो। कोरोना के केस जब बढ़े तो सभी उम्र के लोगों में संक्रमण बढ़ा, सभी आयु वर्ग में मरीज सामने आए। उन्होंने कहा कि अभी तक यह मानने की कोई वजह नहीं है कि आने वाले महीनों में या अगली लहर में बच्चे कोरोनोवायरस से असमान्य रूप से प्रभावित होंगे। हालांकि उन्होंने तीसरी लहर को लेकर तैयारी पर जो दिया है।
कोरोना की तीसरी लहर का असर बच्चों पर ज्यादा होगा, ऐसा नहीं कह सकते: एम्स डायरेक्टर
डॉ. एनके अरोड़ा के तरह ही दिल्ली स्थित एम्स के डायरेक्टर, डॉ. रणदीप गुलेरिया ने भी कहा है कि यह पुख्ता तौर पर नहीं कहा जा सकता कि कोरोना की अगली लहर में बच्चों पर बहुत ज्यादा असर होगा। गुलेरिया ने कहा, पिछली दोनो लहर में बच्चों में माइल्ड केस ही रहे हैं। यह कहना कि अगली लहर में बच्चों में सीरियस केस होंगे या डेथ ज्यादा होगी। ये वैज्ञानिक तौर पर ठीक नहीं है।
इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) की ओर से कहा गया है कि इस बात की बहुत कम आशंका है कि तीसरी लहर विशेष रूप से बच्चों को प्रभावित करेगी। आईएपी ने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि कोविड संक्रमण वाले अधिकांश बच्चों को तीसरी लहर में गंभीर बीमारी होगी।












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